17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्यग्रहण. प्रभाव; सत्ता संगठन में बदलाव, राजनीतिक माहौल उच्च & शिवलिंग के सामने स्तोत्र का पाठ, & विशेष ज्योतिषीय साये में

शनि प्रदोष व्रत, सेन्ट वेलेन्टाइन दिवस & 17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्यग्रहण & प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी & साल 2026 खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। 17 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में 37 साल बाद एक दुर्लभ सूर्यग्रहण & प्राकृतिक आपदाओं, राजनीतिक बदलाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव का संकेत & महाश्विरात्रि 15 फरवरी वार रविवार को शाम पांच बजकर चार मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 16 फरवरी वार सोमवार पांच बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसा इसलिए क्‍योंकि शिवरात्रि की पूजा निशिथ काल में ही की जाती है इसलिए 15 फरवरी को ही शिवरात्रि मनायी जाएगी। & पहले पहर में दूध, दूसरे पहर में दहीं, तीसरे पहर में घी और चौथे पहर में शहद से पूजन करना विशेष फलदाई रहता है और इन सब के साथ हर पहर में जल का भी प्रयोग करें। & सूर्योदय का समय : 07: 01 ए एम सूर्यास्त का समय : 06: 11 पी एम

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob.9412932030

महाशिवरात्रि  पूरा ब्रह्मांड शिवमय & 14 फरवरी 2026, शनिवार है. आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है और शाम को 4 बजकर 1 मिनट के बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी. इसलिए आज शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में यानि शाम के समय की जाती है और यह व्रत भगवान शिव को समर्पित

महाशिवरात्रि की रात को चार हिस्सों (प्रहर) में बांटा जाता है। हर प्रहर में शिव का अलग-अलग अभिषेक होता है:

प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक।

द्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक।

तृतीय प्रहर: घी से अभिषेक।

चतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक।

महाशिवरात्रि की पूजन में सामग्री रखें, ये भी जानना नितांत जरूरी है। गन्ने का रस, कच्चा दूध, शुद्ध घी, बेलपत्र, भांग, धतूरा, जायफल, कमलगट्टे, फल, फूल, मिठाई, मीठा पान, इत्र, शहद, बेर आदि चीजों को शिवलिंग पर अर्पित करें। शिव चालीसा का पाठ करें शिव आरती गाएं।

महाशिवरात्रि की पूजा चार पहर की होती है, तो जानते हैं चार पहर की पूजन का मुहूर्त- प्रथम पहर पूजा 15 फरवरी शाम 6:11 से रात 9:22 तक, दूसरे पहर की पूजा 15 फरवरी को रात 9:23 से16 फरवरी रात 12:34 तक तृतीय पहर पूजा 16 फरवरी को रात 12:35 से सुबह 3:46 मिनट तक और चतुर्थ पहर पूजा 16 फरवरी को सुबह 3:46 मिनट से सुबह 6.59 मिनट तक कर सकते हैं।

शिवलिंग पर तुलसी दल या तुलसी का पत्ता ना चढ़ाएं, केतकी और चंपा के फूल भी ना चढ़ाएं, शिवजी को टूटे चावल भी अर्पित ना करें, शिवलिंग पर नारियल भी हमेशा पूरा ही चढ़ाना चाहिए, शिवलिंग पर कुमकुम सिंदूर कभी नहीं चढ़ाना चाहिए।
शिवरात्रि का व्रत अगर आपने रखा है तो फलाहार ही करें इस दिन अन्‍न या किसी भी प्रकार का अनाज ग्रहण नहीं किया जाता है।

महाशिवरात्रि का पर्व विशेष इसलिए भी है क्योंकि इस दिन सूर्य बुध और शुक्र त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं, ज्योतिष के अनुसार इसे बड़ा ही दुर्लभ संयोग माना जाता है 300 साल बाद महाशिवरात्रि इस बार आठ शुभ संयोग लेकर आ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिव जी का शिवलिंग के रूप में प्राकट्य हुआ था, बारह ज्‍योर्तिलिंग का प्राकट्य उत्‍सव का दिन है महाशिवरात्रि।

शिव पार्वती के विवाह का दिन भी शिवरात्रि को ही माना जाता है, इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा उपासना से जीवन में सुख प्राप्त होता है, इस दिन मनुष्य को व्रत उपवास मंत्र जाप और रात्रि में जागरण करना चाहिए, सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर शिव पूजा का संकल्प लें, भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य दें। शिव जी को भी जल अर्पित करें, पंचोपचार पूजन करें और भगवान शंकर के मंत्रों का जाप करें। शिवरात्रि पर रात्रि में रुद्राष्टक या शिव स्तुति का पाठ अवश्य करें।

14 FEB 2026 शनिवार का दिन भगवान हनुमान और शनि देव दोनों की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक बजरंगबली की पूजा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन के संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। खासकर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो, उनके लिए शनिवार की हनुमान साधना बेहद लाभकारी मानी जाती है।यदि आप जीवन में आ रही बाधाओं, आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव से परेशान हैं, तो शनिवार को सरल मंत्र, हनुमान चालीसा पाठ और दीपदान जैसे उपाय अपनाकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद पा सकते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति से बजरंगबली अपने भक्तों की हर पीड़ा हर लेते हैं।

रावण ने शनिदेव सहित कई ग्रहों को बंदी बना लिया था, तब हनुमान जी ने उन्हें मुक्त कराया। आभारी होकर शनिदेव ने वचन दिया कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे वे कष्ट नहीं देंगे। तभी से शनिवार को हनुमान पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

हनुमान जी की पूजा सूर्योदय के बाद या फिर सूर्यास्त के समय की जा सकती है। इन दोनों समयों में वातावरण शांत रहता है और मन भी एकाग्र होता है।पूजा प्रारंभ करते समय “ॐ श्री हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। इसके बाद लाल फूल, गुड़, चना और नारियल का भोग लगाएं। लाल लंगोट अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।फिर “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके पश्चात हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में श्रद्धापूर्वक आरती कर पूजा पूर्ण करें।

 शिवरात्रि के दिन दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से भगवान महादेव का जलाभिषेक करें, फिर जल की धारा शिवलिंग पर चढ़ाएं और धन प्राप्ति के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करें। संतान प्राप्ति के लिए शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर घी अर्पित करें फिर जल की धारा अर्पित करें और संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें, संतान प्राप्ति की पूजा पति-पत्नी दोनों मिलकर करें। किसी का विवाह नहीं हो रहा है तो उसके लिए शिवरात्रि के दिन यह उपाय जरूर करें कि शिवलिंग पर 108 बेलपत्र अर्पित करें स्वयं के विवाह के लिए अगर भोलेनाथ से प्रार्थना करते हुए बेलपत्र अर्पित कर रहे हैं तो नमः शिवाय का जाप करें, और अगर दूसरे के विवाह के लिए बेलपत्र अर्पित करें तो ओम नमः शिवाय का जाप करें। अगर वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी हो तो शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर को पीला वस्‍त्र अर्पित करें, फिर इसे संभाल कर रखलें। अगर आप रोजगार की तलाश में है या कोई व्‍यापार शुरू करना चाहतें हैं तो शिवलिंग पर जलाभिषेक करें, जल की धारा धैर्य के साथ अर्पित करें। शिव मंदिर में शाम के समय ग्‍यारह घी के दीपक जलाए। अगर आपको स्‍वास्‍थ्‍य की परेशानी है तो शिवलिंग पर गुलाब या चंदन का इत्र अर्पित करें, उसके बाद जल अर्पित करें। फिर ग्‍यारह माला इस मंत्र का जाप करें— ‘ऊं जूं स: माम पालय पालय।।

हनुमान जी के प्रभावशाली मंत्र

यश-कीर्ति के लिए:
“ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय…”

धन प्राप्ति के लिए:
“ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय भक्तजनमनः कल्पनाकल्पद्रुमायं…”

शत्रु नाश के लिए:
“ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय रामसेवकाय…”

नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति हेतु:
“ॐ हं हनुमत्ये नमो नमः… जय जय हनुमत्ये नमो नमः…”

पहला सूर्य ग्रहण साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इस सूर्य ग्रहण का भारतीय समयानुसार 3:27 बजे पर आरंभ होगा और 6:06 बजे पर समाप्त होगा। यह ग्रहण कुल 4 घंटे 31 मिनट की अवधि तक रहेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और ना ही इसका सूतक काल मान्य होगा।

सूर्य ग्रहण की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा। इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं का संकेत मिल रहे हैं। प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है। फिल्म एवं राजनीति से दुखद समाचार। व्यापार में तेजी आएगी। बीमारियों में कमी आएगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। वायुयान दुर्घटना होने की संभावना। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है।

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त विशेष रूप से शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हैं। मान्यता है कि इस स्तोत्र की रचना लंका के राजा रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए की थी।

 रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि इस स्तोत्र का नियमित जाप न केवल भय और बाधाओं को दूर करता है, बल्कि आत्मबल, सकारात्मकता और सफलता का मार्ग भी प्रशस्त करता है। शिव तांडव स्तोत्र को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। नियमित रूप से और पूरी श्रद्धा के साथ इसका पाठ करने से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह मन और वातावरण दोनों को शुद्ध करता है। घर में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जो लोग कालसर्प दोष से पीड़ित हैं, उन्हें प्रतिदिन भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के सामने बैठकर इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से दोष के प्रभाव में कमी आती है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। जीवन में लगातार समस्याएं आ रही हैं या मन अशांत रहता है, तो शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर भगवान शिव से क्षमा याचना करनी चाहिए। सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान तक अवश्य पहुंचती है और राह आसान होती है। मान्यता है कि इस स्तोत्र का जाप करने से असमय मृत्यु का भय दूर होता है और व्यक्ति को लंबी आयु व उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है। जिन लोगों को मानसिक तनाव, चिंता, नकारात्मक विचार या चंद्रमा से जुड़े दोष परेशान कर रहे हों, उन्हें शिव तांडव स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और मानसिक संतुलन बेहतर होता है।

शिव तांडव स्तोत्र


जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।
कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।
मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।
भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।
सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।
धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।
निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-
धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥13॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

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