भाजपा सरकार की नींद उड़ा दी
देश के 7 राज्यों में किसान 10 दिनों का आंदोलन शुरू करते हुए सड़कों पर उतर आए हैँ. किसानों का ये आंदोलन सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान के वादे को जल्द से जल्द पूरा करने को लेकर है. राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर शुरू हो रहे आंदोलन में किसानों के 130 संगठन शामिल हैँ. आंदोलन का असर दिखने भी लगा है. पंजाब के होशियारपुर में किसानों ने सड़कों पर दूध बहा दिया. पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर भी किसानों ने 40 हजार लीटर दूध बहाया. पंजाब के फरीदकोट में किसान सड़कों पर सब्जियां फेंक कर विरोध जता रहे हैं. कुछ समय पर किसानों के हिंसक आंदोलन का गवाह बने मध्य प्रदेश के मंदसौर में आंदोलन को देखते हुए भारी सुरक्षा बल को तैनात कर दिया गया है. आंदोलन की वजह से उज्जैन समेत कई इलाकों में सब्जियों की किल्लत की खबर है. महाराष्ट्र के बुलढाणा में मंडियां आज खुली नहीं हैँ.
देश के 7 राज्यों में किसानों ने आंदोलन के साथ बंद का आह्वान किया है. राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 130 संगठनों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का ऐलान किया है. किसानों का यह 10 दिवसीय आंदोलन सब्जियों के न्यूनतम मूल्य, समर्थन मूल्य और न्यूनतम आय समेत कई मुद्दों को लेकर किया गया है.
राज्य सरकारों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहरों में पुलिस की तैनाती कर दी है. कई जगह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. अगर 10 दिन तक किसानों का यह आंदोलन चलता है तो शहर में सब्जियों और खाद्य पदार्थ को लेकर संकट खड़ा हो सकता है.
आंदोलन के दौरान किसानों ने किसी भी प्रकार के प्रोडक्ट को मार्केट तक पहुंचाने से मना किया है, चाहे वो सब्जी हो दूध हो या फिर कुछ और. शुक्रवार को शुरू हुए इस आंदोलन के तहत किसानों ने पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर 40 हजार लीटर दूध बहाया और सरकार के खिलाफ विरोध प्रकट किया.
देश के 22 राज्यों में एक जून यानी आज से किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष ने बड़ा ऐलान किया है।
एएनआई के मुताबिक, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि हमारे साथ 130 किसान संगठन हैं। अब ये राष्ट्रीय आंदोलन बनेगा। हमने इस आंदोलन का नाम गांव बंद दिया है। हम शहरों में नहीं जाएंगे। हम लोगों के सामान्य जीवन को झुकाव नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमने निर्णय लिया है कि हम 10 जून को दोपहर 2 बजे तक भारत बंद रखेंगे। हम शहरों के सभी व्यापारियों से प्रार्थना करते हैं कि वो 2 बजे तक अपनी सभी दुकानें बंद रखें। आगे कहा कि ये आंदोलन उस किसानों के लिए किया जा रहा है जो पिछले साल अपनी जिंदगी खो चुके हैं। बता दें कि 1 जून यानि की आज (शुक्रवार) से मध्य प्रदेश समेत 22 राज्यों के किसान अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।
बता दें कि इस आंदोलन के लिए देशभर के किसान एकजुट हो चुके हैं और इस बात का ऐलान कर चुके हैं कि हड़ताल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों से फल, सब्जी, दूध व अन्य सामान शहरों की तरफ नहीं आने देंगे।
वहीं दूसरी तरफ किसान संगठन के नेताओं का कहना है कि यह हड़ताल फिलहाल 10 जून तक प्रस्तावित है, अगर सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो इसे आगे भी लड़ा जाएगा।
पंजाब में फेंकी सब्जियां
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर पंजाब के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया. राज्य के फरीदकोट में किसानों ने सड़कों पर फल और सब्जियों को फेंककर विरोध जताया. वहीं पंजाब के होशियारपुर में किसानों का जबर्दस्त प्रदर्शन देखने को मिला. यहां किसानों ने सड़कों पर दूध के टैंकर खाली कर दिए, सब्जियां भी फेंकी. ‘किसान अवकाश’ के दौरान पंजाब के लुधियाना में किसानों ने सड़क पर दूध बहाया. राज्य में कई जगह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं.
मध्य प्रदेश के झाबुआ में धारा 144 लागू
मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा प्रभाव देखा जा रहा है. यहां बड़ी संख्या में किसानों ने सरकार के खिलाफ बंद का ऐलान किया है. मंदसौर के किसानों ने किसी भी हालत में सब्जी और दूध को शहर से बाहर भेजने से इनकार कर दिया है. यही नहीं, किसानों ने एमपी के मंदसौर में आंदोलन शुरू करने से पहले मंदिर में भगवान का दूध से अभिषेक किया.
खरगौन में किसानों के बंद के चलते सब्जी मंडी में सिर्फ 50 फीसदी ही सब्जियां पहुंचीं. वहीं, कुछ किसानों ने छिपकर मंडी में सब्जियों को पहुंचाया. होशंगाबाद में बंद के दौरान किसानों ने अस्पताल में मुफ्त दूध बांटने का फैसला किया, मंडी में सब्जी की आवक भी घट गई है. बता दें कि 6 जून को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंदसौर का दौरा करने वाले हैं, जिसे लेकर शिवराज सरकार अलर्ट हो गई है.
रिजर्व पुलिस फोर्स की 5 कंपनियां तैनात, लगाए गए 200 CCTV
मंदसौर में किसान आंदोलन की गंभीरता देखते हुए प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रिजर्व पुलिस फोर्स की 5 कंपनियों को तैनात किया है. यही नहीं सुरक्षा के मद्देनजर 200 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. वहीं, राज्य के झाबुआ में धारा 144 लगा दी गई है. साथ ही प्रशासन ने किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
महाराष्ट्र में भी असर
महाराष्ट्र में भी पहले दिन से ही किसान आंदोलन का असर दिखने लगा है. यहां बुलढाणा में किसानों की हड़ताल के कारण शुक्रवार को ही दूध और सब्जियों की सप्लाई पर असर पड़ा है. वहीं, पुणे के खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर किसानों ने 40 हजार लीटर दूध बहा कर विरोध जताया.
यूपी में भी किसान संगठनों का विरोध
किसान आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है. यहां ताज नगरी आगरा में किसानों ने जमकर उत्पात मचाया. उन्होंने अपने वाहनों की फ्री आवाजाही कराने के लिए टोल पर किया कब्जा कर लिया और जमकर तोड़फोड़ की.
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देश के 22 राज्यों में एक जून यानी आज से किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष ने बड़ा ऐलान किया है।