धार्मिक दृष्टि से खास.. 11 सितंबर 2026, शुक्रवार & विक्रम संवत: 2083 मास: भाद्रपद & शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस दिन को कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है पक्ष: कृष्ण पक्ष (अमावस्या तिथि सुबह 08:56 AM तक, उसके पश्चात शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा आरंभ वार: शुक्रवार अयन: दक्षिणायण ऋतु: शरद & नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 01:16 PM तक, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र & राहुकाल: सुबह 10:44 AM से दोपहर 12:18 PM तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 PM से 12:54 PM तक ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 05:17 AM से 06:09 AM

महामाई पीतांबरा श्री बगलामुखी शक्ति पीठ स्थान बंजारा वाला देहरादून उत्तराखंड में विजय भट्ट को पार्षद बनने का संकेत महामाई ने 2 वर्ष पूर्व दे दिया था, महामाई का मेमेंटो और अंग वस्त्र देकर सम्मानित भी किया था,, महामाई का, वचन पूर्ण हुआ,, 8 सितंबर 26 को उत्तराखंड शासन ने विजय भट्ट को पार्षद नामित किया:
- by ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI ;
- Award : Sanatan Dharma Journalist of The Year 2026 अवॉर्ड: सनातन धर्म जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर , नई दिल्ली में सम्मानित
- Awardy : Aadi Guru shankaracharya Sanatani Sewa Puruskar आदि गुरु शंकराचार्य सनातनी सेवा पुरस्कार, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक जी द्वारा सम्मानित &
- Founder President & Sadhak संस्थापक साधक अध्यक्ष :
- Mahamai Peetambra shree Bagla Mukhi Shakti Peeth Dehradun Uttrakhand
- महामाई पीतांबरा श्री बगलामुखी शक्ति पीठ देहरादून
- &
- #President Uttrakhand: Rastriya shashkat Hindu Maha Sangh ( राष्ट्रीय सशक्त हिन्दू महासंघ, )
- # President Uttrakhand: अध्यक्ष उत्तराखंड
- Rashtriya Saint Suraksha Parishad (HQ Gujrat) राष्ट्रीय संत सुरक्षा महापरिषद
- मुख्यालय:
- Nanda Devi Enclave Banjara Wala Dehradun Uttarakhand Cont. us: Mob 9412932030 Mail himalayauk@gmail.com
ब्राह्मण को भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा स्वरूप ‘कुश का आसन’ भेंट करें। कुशाग्रहणी अमावस्या पर गुंथे हुए आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर किसी तालाब में मछलियों को खाने के लिए डालें। इसके साथ ही अपने पितरों के निमित्त किसी धर्मस्थल या मंदिर में कुछ-न-कुछ दान अवश्य करें।

ग्रहण दोष रहेगा साथ ही सूर्य-चंद्रमा की युति से अमावस्या दोष : सितंबर के महीने में 11 तारीख को सिंह राशि में सूर्य, चंद्रमा और केतु त्रिग्रही योग में रहेंगे। सूर्य और केतु की युति के चलते जहां सिंह राशि में ग्रहण दोष बनेगा वहीं सूर्य-चंद्रमा की युति के कारण अमावस्या योग विराजमान होगा। इसके साथ ही 11 सितंबर को ही भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि भी इसी दिन है। चंद्रमा 11 सितंबर की रात में सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर & चंद्रमा का यह गोचर रात्रि 7 बजकर 8 मिनट पर होगा। कन्या में चंद्रमा का प्रवेश करना कुछ राशियों के जीवन के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

2 YEAR BEFORE; MY PREDICTION ;
शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस दिन को कुशोत्पाटिनी अमावस्या (कुशाग्रहणी अमावस्या) के नाम से भी जाना जाता है। स्नान-दान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से इस दिन शुभ फलों की प्राप्त हो सकती है। साथ ही इस दिन कुशा ग्रहण की जाती है।
भाद्रपद अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है जोकि साल 2026 में 11 सितंबर को है। इस दिन सालभर के शुभ कार्यों के लिए कुशा ग्रहण की जाती है इसलिए कुशाग्रहणी अमावस्या इसे कहा जाता है। इस दिन कुछ खास उपाय आपको जीवन में शुभ परिणाम भी दिला सकते हैं। इन उपायों को करने से पितरों की कृपा भी आप प्राप्त करते हैं और साथ ही आपको आर्थिक और करियर के क्षेत्र में भी उपलब्धि मिल सकती है।
- भाद्रपद अमावस्या तिथि- 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक
- साध्य योग- 11 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 2 मिनट तक
- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र- 11 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक
- शुक्रवार विशेष- भाद्रपद अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या

- सूर्योदय- सुबह 6:03 बजे
- सूर्यास्त- शाम 6:31 बजे
भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को कुशाग्रहणी अमावस्या, पिठोरी अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कुशा ग्रहण (कुश घास) करने की परंपरा है जिसका इस्तेमाल सालभर होने वाले धार्मिक और मांगलिक कार्यों में किया जाता है। इसके साथ ही भाद्रपद माह की इस अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है और पीपल तले दीपक जलाया जाता है। वहीं इस दिन किए गए स्नान-दान से व्यक्ति के पाप धुल सकते हैं।
पितरों का आशीर्वाद पाने और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए कुशाग्रहणी अमावस्या पर गोबर का कंडा जलाकर उस पर पितरों के निमित्त खीर-पूड़ी के प्रसाद का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद कंडे के पास, अपने से दाहिनी तरफ दोनों हाथों से थोड़ा सा जल छोड़ दें। इसके बाद बचे हुए प्रसाद में से थोड़ा-सा हिस्सा गाय को खिलाएं और बाकी प्रसाद घर के सभी सदस्यों में बांट दें। ऐसा करने से पितरों के आशीर्वाद से आपके सारे काम बनेंगे।
तनाव में फंसते जा रहे हैं, तो आज किसी योग्य ब्राह्मण को घर पर आदर सहित बुलाकर भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा स्वरूप ‘कुश का आसन’ भेंट करें। कुशाग्रहणी अमावस्या पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का पैकेट दान करें। साथ ही अपने पितरों का ध्यान करके उन्हें प्रणाम करें और आशीर्वाद लें। ऐसा करने से समाज में आपका पद-प्रभाव और सम्मान बढ़ेगा।
कुशाग्रहणी अमावस्या पर थोड़े से दूध में एक चुटकी शक्कर मिलाएं। इसे किसी कुएं में या घर के बाहर कच्ची मिट्टी पर अर्पित कर दें। यह उपाय करने से पारिवारिक मतभेद खत्म होंगे और घर में सुख-शांति बनी रहेगी।
कुशाग्रहणी अमावस्या पर अपने बाएं हाथ में चावल के दाने (अक्षत) लें। सूर्यदेव की ओर देखते हुए अपने दाएं हाथ से बाएं हाथ पर नीचे की तरफ जल गिराएं और जल गिराते समय मन ही मन गायत्री मंत्र का उच्चारण करें। ऐसा करने से आपके परिवार में पुनः सुख-समृद्धि और खुशियों का आगमन होगा।
कुशाग्रहणी अमावस्या पर अमावस्या के दिन सरसों के तेल से चुपड़ी हुई दो रोटियां लें। इन्हें अपने सिर के ऊपर से सात (7) बार वारें (उतारें) और फिर काले कुत्ते को खाने के लिए डाल दें। यह उपाय करने से बुराई करने वाले लोग अपने आप आपसे दूर हो जाएंगे।