मंत्रों का जाप करते हैं, तो हमारा मन शांत होता है, विचार सकारात्मक होते हैं; 8 जून 2025 को रवि प्रदोष व्रत

DT 8 JUNE 2025 (HIMALAYAUK NEWS)  ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानि 8 जून 2025 को रवि प्रदोष व्रत रखा गया है. प्रदोष व्रत पर जो भक्त पूरे मनोभाव से शिवजी की पूजा और व्रत नियमों का पालन करते हैं उनके सभी कष्ट दूर होते हैं और आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है. जानिए प्रदोष व्रत में किन नियमों का पालन करना जरूरी होता है. इस दिन काले वस्त्र न पहलें, वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़े से दूरी बनाएं, मन में भी किसी के प्रति बुरा विचार न लगाएं. BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

 8 जून यानी आज सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर शुरू होगी और समापन 9 जून को सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर होगा. प्रदोष व्रत दिन महादेव के संग मां पार्वती की पूजा संध्याकाल में होती है। साथ ही अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। 

प्रदोष व्रत की पूजा दिन के साथ ही रात में भी की जाती है. पूजा के दौरान भक्त शिव चालीसा, प्रदोष व्रत की कथा और शिवजी की आऱती जरूर करें.पूजा करते समय शिव जी के 108 नामों का जप करना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल मिलता है और रुके हुए काम भी पूरे हो जाते हैं।

रविवार का दिन वैसे भी सूर्य देव को समर्पित माना जाता है, और जब यही दिन प्रदोष व्रत के साथ मिल जाए तो इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। 8 जून 2025 को रवि प्रदोष व्रत (Ravi Pradosh Vrat 2025) पड़ रहा है, जो शिव भक्ति के साथ-साथ पारिवारिक सुख-शांति के लिए भी बेहद फलदायक माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से बिगड़े रिश्ते सुधरते हैं और मन की कड़वाहट भी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।

आजकल जब छोटी-छोटी बातों पर घरों में तनाव बढ़ रहा है, तो ऐसे व्रत मानसिक और भावनात्मक रूप से भी संबल देते हैं। विशेष मंत्रों का जाप इस दिन और भी ज्यादा प्रभावशाली माना गया है, जिससे मन शांत होता है, सोच सकारात्मक बनती है और रिश्तों में फिर से वही पुराना अपनापन लौट सकता है।

कुछ असरदार मंत्रों में शामिल हैं:

ॐ सर्वमंगलायै नमः

ॐ अन्नपूर्णायै नमः

ॐ शिवप्रियायै नमः

इन मंत्रों का जाप करते समय दीपक जलाएं, गंगाजल का छिड़काव करें और मन में यह भावना रखें कि आपके रिश्ते फिर से पुराने जैसे मधुर बन जाएं।

प्रदोष व्रत जैसे पर्व न सिर्फ धार्मिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी हमें मजबूती देते हैं। जब हम एकाग्र होकर पूजा करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, तो हमारा मन शांत होता है, विचार सकारात्मक होते हैं और हम दूसरों की बातों को समझने लगते हैं। यही समझ ही किसी भी रिश्ते को जोड़ने की सबसे पहली सीढ़ी होती है।

वि प्रदोष व्रत जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपने मूल से जोड़ सकते हैं। लोग अब समझने लगे हैं कि मन की शांति सिर्फ सोशल मीडिया या बाहर घूमने से नहीं, बल्कि अंदर से संतुलन पाने से आती है और उसमें मदद करते हैं ये व्रत और पूजा-पाठ।

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