कौन से वो ग्रह है जो राजनीति में दिलाते हैं सत्ता का सुख, लोकसभा चुनाव में ग्रहों की अनुकूल स्थिति किसके पक्ष में होती जा रही है; ग्रहों के शुभ प्रभाव के लिए इस मंत्र का जाप फलदाई

राजनीति में सूर्य, चंद्रमा, राहु और शनि मुख्य ग्रह है. सूर्य को राजा और चंद्रमा को राजमाता की उपाधि दी गई है. कौन से ग्रह है जो राजसत्ता में जोड़ने में सहयोग देता है. जो सत्ता का सुख दिलाते हैं ंंजबकि विभिन्न ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव जीवन में संघर्ष बढा देता है- चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक अध्यक्ष बगुलामुखी पीठ देहरादून

भारतीय ज्योतिष बहुत प्राचीन विद्या है। प्राचीन काल में ग्रह, नक्षत्र और अन्य खगोलीय पिंडो का अध्ययन करने के विषय को ही ज्योतिष कहा गया है। इसके बारे में वेदों में स्पष्ट गणनाएं दी हुई हैं। ज्योतिष विज्ञान के अन्वेषक महर्षियों नें इस ब्रह्मांडीय उर्जा और उर्जा प्रवाहों को चार चरणों वाले सत्ताइस नक्षत्रों,बारह राशियों एवं एवं नवग्रहों को वर्गीकृत किया है। ग्रह नक्षत्रों की गणना एवं निरुपण मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। यह व्यक्तित्व की परीक्षा के लिए एक कारगर तकनीक है। इसके द्वारा किसी व्यक्ति के जीवन के भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पता किया जा सकता है। साथ ही जीवन में कौन -कौन से अवरोध उसकी राह रोकने वाले हैं। ज्योतिष के माध्यम से साधक को सही दिशा मिल जाती है।

शाह, मोदी की कुंडली; सितारे सत्ता में बने रहने का प्रबल योग बना रहे , योगी जी की कुंडली में ,, इंडिया अलायंस की सीटों में बढ़ोतरी पर केन्द्र का राजयोग अभी नही : लोक सभा चुनाव में भी बंगाल में ममता बनर्जी की पकड़ देखने को मिलेगी।

14 APRIL 24 LOKSABHA ELECTION APRIL 2024; # ज्योतिष गणना के अनुसार #ज्योतिष विद्वान जनों का मानना है कि ग्रह-गोचर के लिहाज से साल 2024 में राजनीतिक उथल-पुथल तो मचेगी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के योग नहीं हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सरकार बनाते हुए हैट्रिक बनाने की संभावना अधिक दिख रही है। वहीं मोदी को स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

पंडित वैभव नाथ शर्मा ने ज्योतिष पूर्वानुमान लगाया है कि विपक्ष के किसी भी नेता की कुंडली केंद्र की सत्ता में आने का योग नहीं बना रही है, जबकि अमित शाह और नरेंद्र मोदी की कुंडली सत्ता में बने रहने का प्रबल योग बना रही है, जबकि योगी जी की कुंडली में उनके किसी मार्ग दर्शक, किसी सलाहकार के प्रबल सानिध्य से वो राजनीति में प्रगति पथ पर अग्रसर होगे : Himalayauk News

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राहुल गांधी के लिए साल 2024 उनकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट साबित होने जा रहा है। भारतीय राजनीति में वह अपने आप को पुनर्स्थापित करने जा रहे हैं। 2024 निश्चित तौर पर राहुल गांधी के लिए स्वर्णिम साल होने जा रहा है। बहुत सारे प्रदेशों में कांग्रेस की स्थिति सुधरती दिखाई देगी। राहुल गांधी में एक नया जोश और जुनून दिखाई देगा, जो उनके आने वाले समय को बेहतर बनाने जा रहा है।

चुनाव आयोग ने 16 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी थी, अत: इस दिन का पंचांग विशेष हो जाता है , कांग्रेस की नहीं होगी सत्ता में वापसी पर बढ़ सकती हैं कुछ सीटें, लेकिन अंतर दशा नाथ राहु का पंचमेश चंद्रमा से युत को कर एक अच्छे योग के निर्माण करने से कांग्रेस पार्टी को लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।

नरेंद्र मोदी की कुंडली में चंद्रमा से केंद्र में गुरु के होने से गजकेसरी योग तथा पंचम भाव में बैठे राहु पर दशमेश सूर्य की दृष्टि से बन रहा राजयोग भी बड़ी सफलता दिलाने का योग है। लेकिन वर्तमान में चंद्रमा से चतुर्थ में गोचर कर रहा शनि तथा विंशोत्तरी दशा में मंगल में शनि की कठिन दशा के चलते उनकी पार्टी का मत प्रतिशत और सीटों की संख्या कुछ कम हो सकती हैं, जिसके चलते उनको अपने गठबंधन में राज्यो के क्षत्रपों की सहायता भी लेनी पड सकती है।

अप्रैल-मई के महीनों में मंगल और शनि का गोचर पार्टी में बड़े विवादों और कुछ अनहोनी घटनाओं के बाद चुनावों में विजयी होने का योग बन रहा है। लेकिन बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन का 400 सीटें जीतने का लक्ष्य ज्योतिषीय दृष्टिकोण से पूर्ण होता नहीं दिख रहा है। चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक अध्यक्ष बगुलामुखी पीठ देहरादून

18वीं लोकसभा के लिए होने जा रहे हैं इस चुनाव में नए कीर्तिमान देखने को मिलेगें. गलतियां करने वाले दंडित भी होगें. ये चुनाव भारत की दिशा-दशा दोनों बदलने वाला साबित होगा. ग्रहों की चाल भारत के लोकतंत्र को अधिक मजबूती प्रदान करते नजर आ रहे हैं.

बीजेपी और नरेंद्र मोदी की कुंडली को देखकर पता लग रहा है कि इस बार उनकी सीटों में गिरावट आ सकती है और इंडिया अलायंस की सीटों में बढ़ोतरी होगी

शुभ कार्यों को करने के लिए शुभ मुहूर्त और पंचांग का अध्ययन करने की परंपरा अति प्राचीन है. 16 मार्च 2024 के दिन ग्रह नक्षत्र की चाल कैसी थी,और क्या शुभ-अशुभ योग बने, जिससे आसमानी सितारों की क्या स्थिति रहेगी, ज्योतिष विदो की गणना क्या कहती है?

पंचांग के अनुसार 16 मार्च 2024, शनिवार को कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा था. रात्रि 09:39 तक सप्तमी तिथि. दोपहर 04:06 तक रोहिणी नक्षत्र फिर मृगशिरा नक्षत्र था. इस दिन शनिवार था, यानि शनि देव का प्रिय दिन, पंचांग अनुसार इस दिन वाशि योग, आनन्दादि योग, सुनफा योग, बुधादित्य योग, प्रीति योग, सर्वाअमृत योग बना हुआ था. दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 01 बजकर 30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त था;; चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक अध्यक्ष बगुलामुखी पीठ देहरादून

16 मार्च को वृषभ राशि में चंद्रमा का गोचर हो रहा था. भारत देश की कुंडली भी वृष लग्न की है. इस दिन वृष राशि में शश योग बना हुआ है. ज्योतिष के अनुसार शश योग का निर्माण तब होता है जब शनि अपनी ही राशि में मूल त्रिकोण या उच्च राशि का होकर केंद्र में विराजमान हो. वर्तमान समय में शनि कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं. कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं. यहां शनि के साथ मंगल और शुक्र की मौजूदगी से त्रिग्रही योग बना हुआ है. शनि जनता के कारक भी है. राजनैतिक से जुडें लोगों की कुंडली में शनि का विशेष अध्ययन किया जाता है. इसलिए शनि की भूमिका विशेष मानी जाती है. गुरू उच्च पद के कारक हैं.

चुनाव आयोग द्वारा 16 मार्च 2024 को चुनाव की घोषणा के समय वृष राशि में शश योग बनने से चुनाव में भारत को इस शुभ योग का लाभ मिलता दिख रहा है. ज्योतिष ग्रंथों में ऐसा बताया गया है कि शश योग में राजनीति से जुडे़ कार्यों में विशेष सफलता मिलती है, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में जन्म के समय ये योग हो तो ऐसा व्यक्ति साधारण कुल में जन्म लेकर भी राजनीति में विशेष सफलता प्राप्त करता है, साथ राजनीति का माहिर होता है. ; चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक अध्यक्ष बगुलामुखी पीठ देहरादून

भारत देश की कुंडली वृषभ लग्न की है जबकि राशि कर्क है. भारत को शनि की महादशा में आजादी प्राप्त हुई थी. भारत के लिए शनि एक महत्वपूर्ण ग्रह है.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि प्रजा का कारक है. शनि कमजोर वर्ग का भी प्रतिनिधित्व करता है. यही कारण है कि चुनाव में इस वर्ग की भूमिका सबसे अहम होती है. इस बरस भी यही स्थिति दिख रही है. राजनीतिक दलों को इस वर्ग को आकर्षित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी क्योंकि शनि स्वराशि होकर गोचर कर रहे हैं.

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह देखना दिलचस्प होगा क्या बीजेपी सत्ता में वापसी कर पाएगी ? और यदि हां तो क्या पिछली बार से अधिक बहुमत के साथ जैसा की प्रधानमंत्री मोदी दावा कर रहे हैं या फिर उसे सरकार बनाने में कुछ नए सहयोगियों की जरूरत पड़ सकती है

18 जुलाई 2023 को कर्नाटक के बंगलुरु में सांय 4 बजकर 20 मिनट पर एक प्रेस कांफ्रेंस में 27 विपक्षी दलों के नेताओं ने अपने गठबंधन का नाम ‘इंडिया’ घोषित किया। इन विपक्षी दलों के इस घोषणा के समय वृश्चिक लग्न उदय हो रहा था, जो की इस इंडिया अलायन्स का जन्म लग्न है। नवम भाव में चंद्रमा, बुध और सूर्य की युति से बन रहे राजयोग और धनयोग के चलते गठबंधन को मीडिया में अच्छा प्रचार मिला। लेकिन वृश्चिक लग्न के लिए अशुभ ग्रहों शनि में शुक्र की विंशोत्तरी दशा के चलते इंडिया अलायन्स के दलों में जल्द ही मतभेद उभरने लगे और अभी हाल ही में इसके बड़े घटक जदयू के नितीश कुमार अब बीजेपी के एनडीए गठबंधन में चले गए हैं। इंडिया अलायन्स की वृश्चिक लग्न की कुंडली में वर्तमान में जनवरी 2024 से जून 2024 के बीच शनि में शुक्र में गुरु की विंशोत्तरी दशा चल रही है। प्रत्यंतर दशा नाथ गुरु विवाद के छठे भाव में राहु से युत हो कर शनि की तीसरी दृष्टि से पीड़ित हैं। ऐसे में इंडिया अलायन्स के चुनाव जीतने की ज्योतिषीय संभावना नहीं बन रही है लेकिन सूर्य और चंद्रमा के नवम भाव में बन रहे राजयोग के चलते इस गठबंधन के कुछ बड़े दलों जैसे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक को पिछले चुनाव की तुलना में कुछ अधिक सीटें मिल सकती हैं।

नरेंद्रभाई दामोदरदास मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को वडनगर, मेहसाणा, गुजरात में हुआ था. वह वृश्चिक राशि का है. मोदी की जन्म कुंडली में चंद्रमा और मंगल की युति से लक्ष्मी योग का निर्माण हो रहा है. इसी लक्ष्मी योग के प्रभाव से वे लंबे समय तक प्रशासन के शीर्ष पद पर रहे हैं. नमो 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. वह मई 2014 से भारत के प्रधान मंत्री हैं. पिछले दो लोकसभा चुनावों में मोदी की लोकप्रियता देशभर में देखने को मिली 2024 में भी नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली में ग्रहों की अनुकूल स्थिति बनी रहेगी. वर्तमान में उनकी जन्म कुंडली में मंगल की महादशा और शनि की अंतर्दशा चल रही है. इन दोनों ग्रहों के शुभ प्रभाव से 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद मोदी तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं.है. नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली में पंचम भाव में राहु की स्थिति, कन्या राशि में बुध और दशमेश सूर्य की दृष्टि एक अच्छा राजयोग बना रही है. ज्योतिषियों का कहना है कि मोदी की राजनीतिक रणनीति और चुनावी नीतियां इसी राजयोग के प्रभाव में हैं. शनि कुंडली में तीसरे (मित्र) और चौथे (सिंहासन) घर का स्वामी है, इसलिए शुभ ग्रह शुक्र शासन के 10वें घर के साथ युति में होगा. इसके अलावा पंचमेश बृहस्पति अन्य शुभ ग्रहों के साथ मिलकर समसप्तक योग बनाएगा और इसके प्रभाव से उन्हें दोबारा देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी मिलेगी, ऐसा ज्योतिषियों की गणना के अनुसार है. विभिन्न ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है. मोदी को अगले साल अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा अधिक सचेत रहना होगा क्योंकि शनि की तीसरी दृष्टि बारहवें घर (नुकसान और विदेशी मामले) पर है

मनुष्य को समस्याओं से निजात पाने के लिए ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी मंत्र का जाप करना चाहिए।    

मा पीताम्बरा श्री बगुलामुखी शक्तिपीठ मंदिर पंजी0 के संस्थापक अध्यक्ष चन्द्रशेखर जोशी का कहना है कि इस सृष्टि का निर्माण ब्रह्मा ने किया है। अपने शुरुआती काल से ही ये संसार तरह-तरफ की जीवों से पूर्ण है। यहाँ प्रत्येक जीव की अपनी एक खास पहचान है, एक अद्भुत विशिष्टता है। इस संसार में निवास करने वाले प्रत्येक जीव में मनुष्य सबसे अद्भुत और अनोखा है। अन्य जीव के मुकाबले मनुष्य में जोख़िम लेने की क्षमता सबसे कम है। इसी तरह इस संसार में मनुष्य ही वह जीव है जो सबसे अधिक समस्याओं से घिरा रहता है और वह उससे निकलना चाहता है। मनुष्य को समस्याओं से निजात पाने के लिए ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी मंत्र का जाप करना चाहिए।    

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु॥

मा पीताम्बरा श्री बगुलामुखी शक्तिपीठ मंदिर पंजी0 के संस्थापक अध्यक्ष चन्द्रशेखर जोशी

हे ब्रह्मा, हे विष्णु, हे शिव आप तीनों से ही इस सृष्टि पर सब कुछ चलती है। हे तीनों लोको के स्वामी आप सूर्य, चंद्रमा, भूमि, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि,  राहु और केतु सभी ग्रहों को शांत करें। ;;;;

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी मंत्र का जाप प्रातः काल में सूर्योदय के पहले ब्रह्म मुहूर्त में करना होता है। इस मंत्र के जाप के दौरान नमस्कार के मुद्रा में रहना होता है। इस मंत्र का जाप ब्रह्मा, विष्णु   शिव के प्रतिमा के सामने करना चाहिए और भूमि पर जल छोडते रहे।

मंत्र के जाप के दौरान घी के दीये जलाने होते है। इस मंत्र का जाप कम से कम पांच बार ज़रूर करना होता है। इस मंत्र के जाप से जीवन में आ रही सारी समस्या दूर हो जाती है और समस्या का समाधान बड़ी आसानी से मिल जाता है। इस मंत्र के जाप के प्रभाव से मनुष्य के जीवन में शांति स्थापित होती है और मनुष्य अपने जीवन के पथ पर आगे बढ़ता है।

चन्द्रशेखर जोशी संस्थापक अध्यक्ष बगुलामुखी पीठ देहरादून

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