29 वर्षों बाद मकर संक्रांति पर सूर्य-शनि की युति का दुर्लभ संयोग; राशियों पर प्रभाव

29 वर्षों बाद मकर संक्रांति पर सूर्य-शनि की युति का दुर्लभ संयोग  : मान्यता है कि सूर्य अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। भगवान विष्णु ने असुरों का संहार भी इसी दिन किया था। महाभारत युद्ध में भीष्म पितामह ने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक प्रतीक्षा की थी। # इस पर्व के दिन श्री नारायण कवच, आदित्य हृदय स्तोत्र और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और विधि-विधान से पूजा करना चाहिए। मकर संक्रांति पर पात्र में जल, सिंदूर, लाल पुष्प और तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। सूर्य देव का ध्यान करते हुए मंत्र (ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं सः) बोलते हुए जल अर्पित करें। # मकर संक्रांति 2022: सभी राशियों पर इसका प्रभाव

इस साल सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 8.49 बजे हो रहा है, लेकिन स्नान-दान समेत पर्व के विधान 15 जनवरी को पूरे किए जाएंगे। कारण यह कि धर्म शास्त्रीय निर्णय अनुसार सूर्यास्त के बाद सूर्य की मकर राशि में संक्रांति होने पर पुण्यकाल अगले दिन मान्य होता है। यह प्रातः से दोपहर 12.49 बजे तक रहेगा। सूर्य जब धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार सूर्यदेव के एक माह बाद धनु से 14 जनवरी की रात मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास की समाप्ति हो जाएगी। अगले दिन 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। सूर्य के उत्तरायण होते ही विवाह आदि मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। विवाह का प्रथम मुहूर्त 15 जनवरी को है।

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति का त्योहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। संक्रांति पर सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन सूरज की यात्रा दक्षिणायन से उत्तरायण दिशा में होने लगती है। सूर्य के मकर राशि में गोचर करते ही खरमास समाप्त होते हैं । शुभ कार्य आरंभ हों जाते हैं। मकर संक्रांति पर दान पु्ण्य का भी बड़ा महत्व है। इस दिन तिल का दान किया जाता है। इससे शनिदेव और भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं। 

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान सूर्य देव की दो पत्नियां थीं। एक का नाम छाया और दूसरी का नाम संज्ञा था। सूर्य देव की पत्नी छाया के पुत्र शनि देव थे। शनि देव को सूर्य बिल्कुल पसंद नहीं करते। एक दिन सूर्य देव ने छाया और शनि देव को एक घर दिया। जिसका नाम कुंभ था। काल चक्र के अनुसार 11वीं राशि कुंभ है। सूर्य ने घर देकर शनि देव को अलग कर दिया। सूरज देव के इस कदम से छाया काफी क्रोधित हो उठीं। उन्होंने सूर्य देव को कुष्ट रोग का श्राप दे दिया। देव की पीड़ा देख उनकी दूसरी पत्नी संज्ञा ने भगवान यमराज की आराधना की। संज्ञा की तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज सूर्य देव को श्राप से मुक्ति दिलाते हैं।

सूर्य देव जब स्वस्थ्य हो जाते हैं। फिर कुंभ को जला देते हैं। जिसके बाद शनि देव और छाया बिना घर से घूमने लगते हैं। तब संज्ञा सूर्य देव से शनि और छाया को माफ करने की विनती करती हैं। इसके बाद सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं। शनि देव अपने पिता का तिलों से स्वागत करते है। इससे भगवान सूर्य काफी प्रसन्न होते हैं। वह शनि को दूसरा घर देते हैं। जिसका नाम मकर है। इसके बाद शनि के पास दो घर हो जाते हैं।

मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पूजा, यज्ञ, दान और तिल का सेवन करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। वह सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

ग्रह का जिस राशि में प्रवेश होता है, उस राशि की संक्रांति मानी जाती है। भास्कराचार्य के रवेस्तु ताः पुण्यतमाः वचन अनुसार सभी ग्रहों की संक्रांतियों में सूर्य की संक्रांति विशेष पुण्यदायक होती है। इसीलिए संक्रांति के नाम से सामान्यतया सूर्य की संक्रांति का ही बोध होता है। सूर्य के सभी राशियों में भ्रमण क्रम में 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन सूर्य के उत्तरी गोलार्ध की तरफ उन्मुख होकर देवताओं की अर्धरात्रि की समाप्ति के अनंतर दिन की तरफ अग्रसर होने से मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य के दक्षिण से उत्तर की तरफ अग्रसरित होने से इसे उत्तरायण संक्रांति भी कहते हैं।

सूर्य 365 दिनों से लगभग छह घंटे अधिक समय में 12 राशियों का संपूर्ण चक्र पूरा करता है। अंग्रेजी कैलेंडर में 12 माह (365 दिन) होते हैं, लेकिन सौर वर्ष 365 दिनों से लगभग छह घंटा बाद पूरा होता है। यह छह घंटे का अंतर हर साल जुड़ता जाता है और प्रत्येक चौथे वर्ष जब लीप ईयर लगता है तो यह अपने पूर्व निर्धारित तिथि के आसपास आ जाता है। इस कारण कुछ वर्ष पूर्व तक मकर संक्रांति व उसका पुण्यकाल 13-14 जनवरी को होता था। आजकल इसका पुण्यकाल 14 या 15 जनवरी की तिथि होती है। इस तरह कुछ दशकों बाद संक्रांति व उसका पुण्यकाल 15 व 16 जनवरी में होने लगेगा।

तिथि विशेष पर ब्रह्मा और आनंदादि योग भी बन रहा है। ब्रह्मा योग शांति का प्रतीक है तो आनंदादि योग मनुष्य की असुविधाओं को दूर करता है। संक्रांति के समय ब्रह्मा योग के साथ ही रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का योग है। मित्र नामक महाऔदायिक योग भी लग रहा है। मेदिनीय संहिता के अनुसार यदि मेष, वृषभ, कर्क, मकर और मीन राशि में संक्रांतियां होती हैं तो वे सुखदायी होती हैं। इस वर्ष मकर संक्रांति वृषभ राशि में घटित होने से सुखदायक रहेगी। संक्रांति का प्रवेश रात में हो रहा है, इसलिए उत्तम माहौल रहेगा। शनिवार दिन होने से यह संक्रांति सुख प्रदान करने वाली होगी।

मकर संक्रांति 2022: सभी राशियों पर इसका प्रभाव

मेष राशि: यह मकर संक्रांति शुभता का वरदान लाई है। इस दौरान आपको कार्यक्षेत्र में विशेष प्रगति दायक अवसर प्राप्त होने की संभावना प्रबल हैं।

वृषभ राशि: यह संक्रांति आपके लिये शुभ रहने वाली है। इस अवधि में धार्मिक कार्य कल्प आपको अधिक भाग्यवान बनाएंगे।

मिथुन राशि: स्वास्थ्य के लिए यह मकर संक्रंति मिथुन जातकों के लिए प्रतिकूल रहने वाली है। इस अवधि में आपकी सेहत बिगड़ सकती है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

कर्क राशि: मकर संक्रांति कर्क जातकों के उन लोगों के लिए शुभ रहने वाली है जो व्यवसाय के क्षेत्र से जुड़े हैं। इस दौरान पार्टनरशिप के द्वारा कार्यक्षेत्र में आपको सफलता मिलेगी |

सिंह राशि: सिंह राशि के जातक इस वक़्त विशेष सावधानी रखें क्योंकि यह समय आपके लिए प्रतिकूल रहने वाला है। इस समय अवधि में आपकी अपने परिवार के लोगों या पड़ोसी से अनबन हो सकती है।

कन्या राशि: कन्या जातकों के लिए मकर संक्रांति का यह समय अनुकूल रहने वाला है। इस वक़्त रोमांस में बढ़ोतरी होगी। साथ ही इस राशि के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की भी प्रबल संभावना है।

तुला राशि: इस मकर संक्रांति तुला राशि के जातकों के जीवन में मित्रों के तरफ से चिंता बनी रहेगी। हालाँकि इस दौरान आपको शुभ संदेश मिलने के भी प्रबल योग बन रहे हैं।

वृश्चिक राशि: मकर संक्रांति वृश्चिक जातकों के लिए शुभ एवं मंगलमय समय साबित होगा। सूर्य का राशि परिवर्तन आपके लिए यश कीर्ति बढ़ाने में सहायक साबित होगा।

धनु राशि: मकर संक्रांति धनु राशि शुभ संदेश लेकर आ रही है। इस दौरान आपके धन में वृद्धि होगी। इसके अलावा इस समय अवधि में भविष्य की नई योजनाएं बनेंगी।

मकर राशि:। इस मकर संक्रांति आपके करियर में प्रसिद्धि के योग हैं। इसके अलावा इस समय अवधि में आपके सभी अधूरे कार्य पूरे होंगे।

कुंभ राशि: मकर संक्रांति कुंभ जातकों के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाली है। इस समय अवधि में आपके धन हानि के योग हैं। अनावश्यक खर्च से बचने की सलाह दी जाती है।

मीन राशि: मकर संक्रांति मीन जातकों के लिए अनुकूल समय साबित होगा। इस दौरान आपके कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी साथ ही आपको हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

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