24 सितंबर; शारदीय नवरात्रि की तृतीया; चंद्रघंटा; सत्ता डोलते ही बगुलामुखी की शरण में कांगडा और दतिया भागते है सत्ताधीश

24 सितंबर 2025 को अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि की तृतीया तिथि है। इस तिथि पर मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा-उपासना की जाती है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा। राहुकाल दोपहर 12:09 − 13:39 मिनट तक रहेगा।  नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा की पूजा में मां दुर्गा की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप जरूर करें। इससे न केवल आपके घर सुख-समृद्धि मिलेगी, बल्कि आपकी सभी योजनाएं भी दूर होंगी।

कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश में बनखंडी गांव में स्थित बगलामुखी मंदिर, देवी बगलामुखी को समर्पित एक प्रसिद्ध सिद्ध पीठ है, जो दस महाविद्याओं में से एक हैं। भारत के कई राजनेता, जैसे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, और अभिनेता गोविंदा, इस मंदिर में आ चुके हैं। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में बनखंडी गांव में स्थित है। राजनीति में विजय प्राप्त करने के लिए इस मंदिर में प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी पूजा कर चुकी हैं। वर्ष 1977 में चुनावों में हार के बाद पूर्व पीएम इंदिरा ने मंदिर में तांत्रिक अनुष्ठान करवाया। उसके बाद वह फिर सत्ता में आईं और 1980 में देश की प्रधानमंत्री बनीं। बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पीएम मोदी के बड़े भाई प्रह्लाद मोदी मंदिर में पूजा कर चुके हैं। सांसद अमर सिंह, सांसद जया प्रदा, मनविंदर सिंह बिट्टा, कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर, भूपेंद्र हुड्डा, राज बब्बर की पत्नी नादिरा बब्बर, गोविंदा और गुरदास मान जैसी हस्तियां यहां आ चुकी हैं। संकट के समय कॉमेडी किंग कपिल शर्मा भी यहां आ चुके हैं मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ ने अपनी पत्नी कोबिता के साथ तांत्रिक पूजा और हवन करवाया।

मां दुर्गा के कई शक्तिशाली मंत्र हैं, जिनका जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मंत्र हैं “ॐ दुर्गायै नमः”, “ॐ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”, “ॐ श्रीं देवी क्लीं चामुण्डायै विच्चे” आदि। इन मंत्रों का जाप न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा करता है। ऐसा माना जाता है कि अगर भक्त निष्ठावान और पूर्ण विश्वास के साथ इन मंत्रों का जाप करें तो मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से हर कार्य सफल होता है।

मां चंद्रघंटा के मंत्र

  • ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः..
  • पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता. प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता..
  • या देवी सर्वभूतेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः..

 24 सितंबर को नवरात्रि का तीसरा दिन है और इस दिन मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है. धर्म शास्त्रों के अनुसार मां चंद्रघंटा देवी पार्वती का विवाहित स्वरूप हैं और यदि उनका विधि-विधान से पूजन किया जाए तो जीवन में आ रहे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है. साथ ही हर मनोकामना पूरी होती है. 

शास्त्रों के अनुसार मां चंद्रघंटा की सवारी बाघिन है और मां ने अपने मस्तक पर अर्ध चंद्रमा धारण किया हुआ है. माता की 10 भुजाएं हैं, जिनमें बाएं भुजाओं में माता त्रिशूल, गधा, तलवार, कमंडल और वर मुद्रा धारण करती हैं और बाएं भुजाओं में कमल, पुष्प, तीर, धनुष, जप माला और अभय मुद्रा धारण करती हैं. देवी चंद्रघंटा का स्वरूप भक्तों के कल्याण करने वाला और शांतिपूर्ण है. साथ ही वह सभी अस्त्र और शास्त्रों से सुसज्जित हैं और युद्ध के लिए तत्पर रहती हैं. देवी चंद्रघंटा के मस्तक पर विद्यमान चंद्र-घंटी को भक्तों की रक्षा का प्रतीक माना जाता है.

नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की पूजा करते समय दीपक जलाना, फूल चढ़ाना, भोग लगाना और कथा श्रवण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। ये सभी कर्म मां को प्रसन्न करती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। इसके अलावा, उपवास करना भी इस त्योहार की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।

नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद मंदिर में माता रानी के सामने देसी घी का दीपक जलाएं और मन ही मन उनके चंद्रघंटा स्वरूप का ध्यान करें. इसके बाद माता रानी को फल, फूल अर्पित करें और खीर का भोग लगाएं. इसके बाद मां दुर्गा की आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. साथ ही मां चंद्रघंटा के मंत्रों का जाप करें.

एक माह में तीस तारीखें होती हैं और ये तारीखें दो-तीन में बंटी हुई होती हैं। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा कहलाती है। तिथि के नाम – प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा/पूर्णिमा।

पंचांग मुख्य रूप से पांच पहलुओं से मिलकर बनता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ नक्षत्र, राहु काल, सूर्योदय और सूर्य का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू मास और पक्ष आदि की जानकारी देते हैं। 

माँ दुर्गा के विशेष मंत्र 

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।

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