हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले & HIMALAYAUK NEWS BY CHANDRA SHEKHAR
नगर निगम भूमि घोटाले के मास्टरमाइंड को क्यों नहीं लिया गया शिकंजे में- मोर्चा & वरिष्ठ वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की, रजिस्ट्रार कानूनगो तहसील हरिद्वार राजेश कुमार और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तहसील हरिद्वार कमलदास को भी निलंबित किया गया है.
#उक्त मास्टरमाइंड के निर्देश पर ही लिखी गई थी घोटाले की पटकथा ! इस जमीन की मार्केट वैल्यू करीब 13 करोड़ रुपए है, लेकिन हरिद्वार नगर निगम के अधिकारियों ने ये जमीन 54 करोड़ रुपए में खरीदी. सबसे बड़ी बात ये है कि जमीन किस उद्देश्य से खरीदी गई, ये अभी तक भी स्पष्ट नहीं हुआ है. बता दें कि कृषि भूमि को 143 में दर्ज कराया गया था. गौरतलब हो कि 143 के अंतर्गत कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में बदला जाता है. #
मास्टरमाइंड आज भी पिक्चर से बाहर, लेकिन अन्य अधिकारियों की चढ़ गई बली !
# राजभवन मास्टरमाइंड की भूमिका को लेकर कराये सीबीआई जांच | इस मुद्दे को हवा दे दी. आखिर में मामला सीएम धामी के पास पहुंचा. सीएम धामी ने भी मामले को गंभीरता से लिया और सचिव शहरी विकास रणवीर सिंह चौहान को मामले की जांच के आदेश दिए. सचिव रणवीर सिंह चौहान की जांच पर ही आज शासन ने दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी समेत 7 लोगों पर कार्रवाई की है
#भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हो एफ आई आर |
विकासनगर- जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि कुछ दिन पूर्व हुए हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में सरकार द्वारा विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई है, जोकि सराहनीय कदम है, लेकिन उक्त पूरे घोटाले में मास्टरमाइंड/ जालसाज अधिकारी, जो सरकार में अच्छी दखल रखता है, के निर्देश पर उक्त अधिकारियों द्वारा ये जालसाजी की गई, को खुला छोड़ दिया गया, जो कि अपने आप में गंभीर प्रश्न पैदा करता है | सवाल इस बात का है कि उक्त अधिकारियों द्वारा कैसे कूड़े के ढेर से लगती लगभग 30 बीघा भूमि लैंड यूज चेंज कर रातों-रात खरीद ली गई, जिससे सरकार को लगभग 40 करोड रुपए की चपत लगी | उक्त भ्रष्ट जालसाज अधिकारी के निर्देश पर ही इन अधिकारियों द्वारा पटकथा को अंजाम दिया गया था |
नेगी ने कहा कि उक्त मास्टरमाइंड अधिकारी के निर्देश पर ही इन पीसीएस/ आईएएस अधिकारियों द्वारा ये कदम उठाया गया, इसमें गलती अधिकारियों की ही है कि क्यों इन्होंने उक्त जालसाज की बात मानी ! नेगी ने कहा कि वैसे तो उक्त घोटाले की जांच आईएएस अधिकारी श्री रणवीर सिंह चौहान द्वारा की जा चुकी है, जिसके परिणाम स्वरूप कुल मिलाकर 12 अधिकारियों को निलंबित/ सेवा विस्तार समाप्त किया जा चुका है | अब तक उक्त घोटाले में इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हो जानी चाहिए थी ,लेकिन नहीं हुई |
नेगी ने कहा कि मोर्चा उक्त निलंबित अधिकारियों को आश्वस्त करता है कि अगर उक्त अधिकारी का नाम उजागर कर दें तो चाहे उक्त भ्रष्ट जालसाज अधिकारी के खिलाफ मा. न्यायालय की शरण ही क्यों ना लेनी पड़े, सबक सिखा कर ही दम लेंगे| आखिर उस जालसाज अधिकारी के गुनाहों का खामियाजा ये अधिकारी क्यों भुगतें! आलम यह है कि अधिकारी सिर्फ और सिर्फ अपना हित देख रहे हैं, उनको जनहित एवं जन भावनाओं से कोई लेना देना नहीं है | पहले भी प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल की सेवा समाप्त की गई थी. वहीं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण को निलंबित किया गया था. कर एवं राजस्व अधीक्षक अधिकारी लक्ष्मी कांत भट्ट और अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को भी संस्पेड किया था. वहीं सम्पत्ति लिपिक वेदपाल का सेवा विस्तार खत्म किया गया था. यानी इस मामले में कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है. वहीं तीन मई को ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की जांच विजिलेंस से कराने के भी आदेश दिए है. विजिलेंस की जांच में कई और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है.
मोर्चा राजभवन से मांग करता है कि इस पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने एवं पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की दिशा में काम करे, जिससे उक्त महा भ्रष्ट मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे डाला जा सके | पत्रकार वार्ता में- विजयराम शर्मा व दिलबाग सिंह मौजूद थे |
- 19 सितंबर 2024 से शुरू होकर जमीन खरीद की कागज़ी प्रक्रिया 26 अक्टूबर को समाप्त हो गई
- इसके बाद नवंबर माह में तीन अलग अलग तारीखों में, अलग अलग लोगों से 33-34 बीघा जमीन खरीद ली गई
- जमीन को नगर निगम ने ₹53.70 करोड़ में खरीदी
- खरीद की प्रक्रिया के दौरान ही भूमि की श्रेणी में बदलाव का खेल हुआ
- श्रेणी बदलने से 13 करोड़ की जमीन 53.70 करोड़ की हो गई
- श्रेणी बदलने के लिए 143 की प्रक्रिया तीन अक्टूबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर को खत्म हो गई
- श्रेणी बदलने का यह समय भूमि खरीद की प्रक्रिया के दौरान का है
- आवेदन की तिथि से परवाना अमलदरामद होने तक मात्र 6 दिन में तत्कालीन एसडीएम अजय वीर सिंह ने सारा काम निपटा दिया
- एसडीएम कोर्ट में एक अक्टूबर से जो मिश्लबंद बनता है, उसने चढ़ाने के बजाय नया मिश्लबंद (राजस्व वादों की पंजिका) बना दिया