सौ साल में एक बार; सावन 2025 में बन रहे हैं ऐसे योग; धर्म, ज्योतिष और विज्ञान के संगम का एक अद्भुत अवसर; बगलामुखी पीठ के संस्थापक अध्यक्ष सिक्किम में साधनरत रहेगे?

 11 जुलाई से सावन माह की शुरूआत;  शिवपूजा करने से  महिला के   बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव    सावन 2025 में 10 जुलाई से 9 अगस्त तक चार सोमवारों पर सात दुर्लभ शुभ योग बन रहे हैं. इनमें सर्वार्थ सिद्धि, ब्रह्म और इंद्र योग शामिल हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन योगों में शिव पूजन करने से रुके कार्यों की पूर्ति और विशेष लाभ की संभावना है.

श्रावण मास सिर्फ 29 दिन का होगा और यह शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है क्योंकि इस बार चारों सोमवारों पर सात विशेष योग बन रहे हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से यह माह शिव भक्ति और कामनाओं की सिद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. कांवड़ यात्रा की तैयारियों में प्रशासन और शिविर संचालक पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं.

इस बार श्रावण मास में त्रयोदशी तिथि का क्षय हो रहा है. इसी कारण यह माह सामान्य 30 दिन के स्थान पर केवल 29 दिन का रहेगा. हालांकि, यह छोटा जरूर है, परन्तु इसमें बनने वाले शुभ संयोग इसे अत्यधिक प्रभावशाली बना रहे हैं. भक्तों को कम समय में अधिक फल देने वाला यह मास अद्भुत रहेगा.

देवों के देव महादेव का प्रिय माह सावन की शुरुआत जल्द होने जा रही है। इस महीने भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पूजा-पाठ और व्रत करते है। वैसे तो सावन महीने में भगवान शिव पूजा के साथ शिवलिंग का अभिषेक का खास महत्व होता है, लेकिन इस माह पूजा-पाठ और अभिषेक के साथ भगवान को अनाज चढ़ाने का भी विधान है, इसे ‘शिवा मुट्ठी’ कहा जाता है।

आपको बता दें, मनोकामना पूर्ति के लिए सावन में भोलेनाथ को शिवा मुट्ठी यानी एक मुट्ठी अनाज चढ़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है। कहा जाता है कि, इससे भक्त के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान शिवजी की कृपा से घर पर कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। ऐसे में आइए दिल्ली के आचार्य गुरमीत सिंह जी से जानते हैं सावन माह में ‘शिवा मुट्ठी’ में कौन से 5 अनाज चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं महादेव-

शिवा मुट्ठी में चढ़ाएं ये 5 अनाज :

  • एक मुट्ठी अक्षत् चढ़ाना

आचार्य गुरमीत सिंह के अनुसार, शिवजी के प्रिय माह सावन में एक मुट्ठी अक्षत् या चावल चढ़ाना भी बेहद शुभ होता है। कहा जाता है कि इससे धन लाभ होता है और धन संबंधी परेशानियां भी समाप्त होती हैं।

शनि देव के साथ ही भगवान शिव को भी काला तिल चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि सावन माह में शिवजी को एक मुट्ठी काला तिल चढ़ाने से घर से कलह-क्लेश समाप्त होते हैं। साथ ही मानसिक और शारीरिक परेशानियां भी दूर होती हैं। अगर आप घर से कलह-क्लेश को लेकर परेशान है तो ये उपाय कर  सकते हैं।

  • मूंग की दाल

सावन महीने में शिवलिंग पर पीली मूंग की दाल अर्पित करें। ऐसा करने से काम में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

  • अरहर दाल

धन-ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए सावन में भगवान शिव को एक मुट्ठी अरहर की दाल अर्पित करनी चाहिए। शिवलिंग पर पीली अरहर की दाल अर्पित करना शुभ होता है और इससे महादेव प्रसन्न होते हैं।

  • एक मुट्ठी गेहूं

सावन माह में शिवजी को एक मुट्ठी गेहूं चढ़ाने से व्यक्ति को सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती हैं। इसके साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। संतान सुख की प्राप्ति के लिए आप सावन में शिवा मुट्ठी में गेहूं जरूर चढ़ाएं।

सावन के पूरे महीने भी आप यह काम कर सकते हैं या फिर अगर आप सिर्फ सावन के सोमवार को शिव मुट्ठी चढ़ना चाहते हैं, तो ऐसा भी कर सकते हैं लेकिन यह याद रहे यह पांच चीजें एक साथ मिलाकर नहीं चढ़ानी है बल्कि इन 5 अनाजों को एक-एक मुट्ठी करके आपको शिवलिंग पर अर्पित करना है। इसके बाद एक घी का दीपक जलाकर अपनी मनोकामना मांगनी है।

सनातन धर्म में तुलसी की महिमा अपरंपार मानी गई है। ये एक ऐसा औषधीय पौधा है, जो घर-घर में पाया जाता है और कोई भी पूजा तुलसी के बिना पूरी नहीं होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे में साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है।

आपको बता दें, कुछ ही दिनों में सावन का महीना आने वाला है। यह महीना भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु के लिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं। ऐसे में सावन महीने में तुलसी की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं, जिससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं को पूजा-पाठ करनी चाहिए। ऐसा करने से मंत्रोच्चारण करने से गर्भ में पल रहे बच्चे को अच्छे आचरण मिलते है। 

1 जुलाई से सावन माह की शुरूआत होने वाली है साथ ही सावन का महीना शिवभक्तों के लिए सबसे पावन महीना माना जाता है। सावन के महीने में शिवभक्त, भगवान शिव की पूजा भक्ति भाव के साथ करते है और मनोकामना की प्राप्ति करते है। सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के नियम होते है। जहां पर शिवलिंग की पूजा हर व्यक्ति कर सकता है लेकिन क्या आप जानते है प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेग्नेंसी के दौरान शिवलिंग की पूजा करने के क्या नियम होते है।

वैसे कहा जाता हैं कि, प्रेग्नेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं को पूजा-पाठ करनी चाहिए। ऐसा करने से मंत्रोच्चारण करने से गर्भ में पल रहे बच्चे को अच्छे आचरण मिलते है। वहीं पर कई लोगों का कहना यह भी होता है कि, गर्भवती महिला को शिवलिंग पूजा नहीं करनी चाहिए।

शास्त्रों में क्या है नियम

यहां पर ज्योतिषाचार्य और शास्त्रों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में शिवलिंग पूजा को लेकर बताया गया है। यहां पर ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, शिवजी की पूजा करने से भक्तों को  हर समस्या का समाधान मिलता है। वहीं पर कोई भी भक्ति के साथ पूजा करें तो, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। यदि आप सच्चे मन से एक लोटा शुद्ध जल भी शिवलिंग पर चढ़ा देंगी तो महादेव की कृपा आप पर जरूर बरसेगी। यहां शास्त्रों में गर्भवास्था के दौरान शिवलिंग पूजन करने की कोई मनाही नहीं होती है। कहते हैं कि, शिवपूजा करने से प्रेग्नेंट महिला के आने वाले बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला विधि के साथ शिवलिंग की पूजा कर सकती है लेकिन इस दौरान कई बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। यहां पर नियम कहते हैं कि,अधिक समय तक खड़े रहकर पूजा न करें, बल्कि आराम से बैठकर पूजा करें। वहीं पर प्रेग्नेंसी में आपको जमीन पर बैठने में परेशानी है तो कुर्सी या छोटी टेबल पर बैठकर पूजा करना चाहिए। प्रेग्नेंसी में व्रत रखने के दाैरान भी ध्यान देने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी के दौरान आप बगैर कठिन उपवास या निर्जला व्रत के बिना भी शिवलिंग पर जल चढ़ा सकती हैं. अगर घर से मंदिर दूर हो या मंदिर में अधिक सीढ़िया चढ़नी हो तो आप घर पर भी छोटी सी शिवलिंग स्थापित कर पूजा कर सकती हैं।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान शिवलिंग पूजा या शिव पूजा करने से कई लाभ मिलते है। प्रेग्नेंसी के दौरान शिवलिंग पूजन करने से नकारात्मक ऊर्जा का साया भी आपके बच्चे पर नहीं पड़ेगा और ग्रह-दोषों से मुक्ति मिलेगी. इससे मां और बच्चा दोनों की मानसिक और शारीरिक स्थिति अच्छी रहेगी।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर के साथ ही मानसिक विचारों में भी बदलाव आते हैं. इस समय महिला कभी अधिक तनाव का अनुभव करती है तो कभी अधिक भावुक हो जाती है. ऐसे में इस समय शिवलिंग पूजन करने से मानसिक शांति मिलेगी, चिंता कम होगी और भावनात्मक विचारों में कमी आएगी।
  • 14 जुलाई 2025 इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग का पावन संयोग बन रहा है. इसके साथ ही गणेश चतुर्थी भी इसी दिन पड़ रही है, जो एक दुर्लभ संयोग माना जा रहा है. भगवान शिव और भगवान गणेश दोनों की पूजा इस दिन विशेष फलदायी मानी गई है.
  • दूसरा सोमवार – 21 जुलाई 2025
  • इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में होंगे और वृषभ राशि में गोचर करेंगे. साथ ही इस दिन कामिका एकादशी भी है, जो भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए उत्तम मानी जाती है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, संकल्प या व्रत के लिए श्रेष्ठ है. शिव के साथ-साथ विष्णु कृपा की भी संभावना इस दिन बढ़ जाती है.
  • तीसरा सोमवार – 28 जुलाई 2025
  • इस सोमवार को चंद्रमा पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में गोचर करेंगे. यह स्थिति मानसिक स्थिरता, भक्ति और ध्यान के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से समस्त पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
  • अंतिम सोमवार – 4 अगस्त 2025
  • यह सोमवार विशेष रूप से पवित्र है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग तीनों का महासंयोग बन रहा है. चंद्रमा इस दिन अनुराधा और चित्रा नक्षत्र में होंगे तथा वृश्चिक राशि में विचरण करेंगे. यह संयोग भक्तों को अद्वितीय ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान कर सकता है. इस दिन का व्रत व शिवलिंग पर रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी रहेगा.
  • 9 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और बुद्ध-आदित्य योग का महासंयोग
  • श्रावण मास का समापन 9 अगस्त 2025 को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन होगा. इस दिन बुद्ध-आदित्य योग भी बन रहा है, जो ज्ञान, व्यापार और निर्णय लेने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्य चतुर्वेदी के अनुसार, इस दिन नए व्यवसाय शुरू करना, संपत्ति खरीदना-बेचना, रजिस्ट्रेशन, औद्योगिक स्थापना, विवाह-संवाद आदि जैसे कार्यों के लिए यह समय अत्यंत उपयुक्त है. यह संयोग वर्षों बाद बन रहा है और इसका लाभ उठाना चाहिए.
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