ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान एक दर्दनाक हादसा & पुरी: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में मची भगदड़, 3 की मौके पर मौत, 50 के करीब घायल, 6 की हालत गंभीर & HIMALAYAUK (Leading Newsportal & Daily Newspaper & youtube Channel) by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor

रविवार सुबह करीब 4:30 बजे, जब भक्त श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने भगवान के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में जमा थे, उसी दौरान वहां धक्का-मुक्की हो गई भगदड़ जैसी स्थिति बन गई पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। रथयात्रा के दौरान भगवान को श्रीमंदिर से बाहर लाकर श्रीगुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है। जहां वे कुछ दिन विश्राम करते हैं। इसी यात्रा के बीच यह हादसा हुआ है।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भगदड़ होने के बाद चीख-पुकार मच गई। दर्शन के समय भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। एक-एक कर लोग जमीन पर गिरते चले गए। भगदड़ के चलते 3 लोगों की जान चली गई।
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। रविवार सुबह करीब 4:30 बजे, जब भक्त श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने भगवान के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में जमा हुए थे, उसी दौरान वहां काफी धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद वहां भगदड़ मच गई। पुरी के श्रीगुंडिचा मंदिर के पास रविवार को मची भगदड़ में 3 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 अन्य घायल हो गए।
ओडिशा के पुरी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आज रविवार की सुबह श्रीगुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ मचने से 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं इस घटना में 10 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी आ रही है। मिली जानकारी के मुताबिक, आज सुबह करीब 4:30 बजे, भारी संख्या में भक्त श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने भगवान के दर्शन करने के लिए एकत्रित हुए थे। उसी दौरान वहां काफी धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से ही जातक के पूर्वजों को मुक्ति मिल जाती है और उस पर भगवान कृपा बनाए रखते हैं। भगवान जगन्नाथ को लेकर कई दंतकहानियां मशहूर हैं, जिन पर उनके भक्त भरोसा भी करते हैं। बता दें कि भगवान की मूर्ति के हाथ और पैर नहीं है, आखिर भगवान की मूर्ति अधूरी क्यों है पूरी क्यों नहीं हो सकती जबकि देश में बड़े-बड़े मूर्ति कलाकर हैं। साथ ही मूर्ति की आंखें इतनी बड़ी क्यों हैं
यह घटना शारदाबली के पास, श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने उस समय हुई जब रथ पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी। दर्शन के समय भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया और लोगों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ लोग जमीन पर गिर गए और भगदड़ की स्थिति बन गई ।
यह हादसा शरधाबली के नजदीक, श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने हुई है। घटना के वक्त रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्तों का हुजुम जुटा हुआ था। इस दौरान सुरक्षा में लगी पुलिस और कर्मियों को भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल हो गया और लोगों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस दौरान कुछ लोग जमीन पर गिर पड़े और भगदड़ मच गई।
इस भगदड़ में 3 लोग भीड़ के नीचे दब गए और उनके उपर से भक्तों का भीड़ गुजराता रहा, जिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सभी मृतक खुर्दा जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। मरने वालों में 2 महिलाएं प्रभाती दास और बसंती साहू शामिल हैं, वहीं एक 70 वर्षीय पुरुष प्रेमाकंत महांती का भी मौत हो गया है।
इस भगदड़ की घटना में घायल लोगों को तुरंत इलाज के लिए 108 एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों की टीम घायलों की लगातार इलाज कर रही है। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। रविवार सुबह करीब 4:30 बजे, जब भक्त श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने भगवान के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में जमा हुए थे, उसी दौरान वहां काफी धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद वहां भगदड़ मच गई। पुरी के श्रीगुंडिचा मंदिर के पास रविवार को मची भगदड़ में 3 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 अन्य घायल हो गए।
6 की हालत गंभीर
घटना की अधिक जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घटना सुबह करीब 4 बजे के आसपास हुई है। जब सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर के पास एकत्र हुए थे। पुरी के जिला कलेक्टर सिद्धार्थ एस स्वैन ने कहा कि घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 6 लोगों की हालत गंभीर है।
मृतकों की हुई पहचान
जिला कलेक्टर सिद्धार्थ ने कहा कि मृतकों की पहचान बोलागढ़ की बसंती साहू और बालीपटना के प्रेमकांत मोहंती और प्रवती दास के रूप में हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच चल रही है।
जानिए कैसे हुई भगदड़?
यह घटना शरधाबली के पास, श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने हुई है। उस समय रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भारी भीड़ जमा थी। दर्शन के समय भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया और लोगों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ लोग जमीन पर गिर पड़े और भगदड़ मच गई।
घायलों को ले जाया गया अस्पताल
घटना में घायल हुए लोगों को तत्काल 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज कर रही है। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इससे पहले शनिवार, 28 जून को जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान बीमार पड़े 600 से अधिक भक्तों का पुरी के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज किया गया। जगनाथ यात्रा में भारी भीड़ के कारण कई लोग धक्का-मुक्की से घायल हो गए थे, जबकि 200 से अधिक लोग गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण बेहोश हो गए थे।
ओडिशा के पुरी में आयोजित जगन्नाथ यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। ओडिशा पुलिस, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के लगभग 10,000 से अधिक जवानों की तैनाती की गई है। पुलिस ने रथ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सभी स्तर पर अपनी तैयारियां की है।पुलिस महानिदेशक खुरानिया ने शनिवार को बताया था कि भीड़ पर नजर रखने के लिए 275 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
भगवान की मूर्ति के हाथ और पैर नहीं है, आखिर भगवान की मूर्ति अधूरी क्यों है पूरी क्यों नहीं हो सकती
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार की बात है पुरी के तत्कालीन राजा इंद्रद्युम्न को भगवान जगन्नाथ ने सपने में दर्शन दिए और कहा कि उन्हें समुद्र तट पर एक लकड़ी का लट्ठा मिलेगा। उसकी उन्हें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां बनवानी है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा से देवताओं ने विनती कि वे इस मूर्ति को बनाएं। इसके बाद वे मान गए और राजा इंद्रद्युम्न के दरबार में भेष बदल कर आए और राजा से अपनी शर्त बताते हुए मूर्ति बनाने को कहा। विश्वकर्मा ने राजा को शर्त बताते हुए कहा कि वे बंद कमरे में भगवान की मूर्ति बनाएंगे और जब तक मूर्ति बनकर तैयार नहीं हो जाती उस कमरे में कोई नहीं आएगा। राजा इस शर्त को मान गए।
काम की शुरुआत हुआ और जैसे-जैसे दिन बीतता राजा की उत्सुकता बढ़ती गई, करीबन एक माह हो गए राजा और बेचैन हो उठे और फिर वे शर्त को दरकिनार करते हुए कमरे में घुस गए। राजा जैसे ही कमरे में घुसे विश्वकर्मा भगवान अंतर्ध्यान हो गए, इस पर राजा को बहुत अफसोस हुआ क्योंकि मूर्ति अधूरी थी और उसके हाथ-पैर नहीं थे। इसके बाद राजा ने बहुत कोशिश की मूर्ति के हाथ-पैर बन जाएं लेकिन कोई भी कारीगर यह नहीं कर सका और फिर राजा ने यही मूर्ति मंदिर में रखवा दी और तब से प्रभु की यही मूर्ति की पूजा की जाती है।
आखों को लेकर कथा है कि भगवान कृष्ण जब द्वारका में रहते थे तब एक दिन रोहिणी लोगों को वृंदावन की रासलीला बता रही हैं। वहीं, कृष्ण, बलराम और सुभद्रा जी दरवाजे के पास खड़े होकर सुन रहे थे। कथा इतनी भावपूर्ण थी कि तीनों भाई-बहन प्रेम से भर उठे और उनकी आखें बड़ी हो गईं। इसी समय नारद मुनि आ गए और उनका यह रूप देख वह भी भावुक हो उठे और प्रभु से प्रार्थना की यह रूप हमेशा भक्तों को भी देखने को मिले। इस पर भगवान ने यह स्थायी रूप ले लिया।