26 जून से लेकर 04 जुलाई तक गुप्त नवरात्र है। इस दौरान जगत की देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही देवी मां दुर्गा के निमित्त व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर परेशानी दूर होती है।
एक साल में चार बार नवरात्रि आती है। चैत्र और अश्विन मास में प्रकट नवरात्रि रहती है, जबकि आषाढ़ और माघ मास में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। प्रकट नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में देवी सती की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है, ये साधनाएं गुप्त रूप से की जाती है। इन महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी शामिल हैं।
आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि की शुरुआत आज यानि 26 जून से हो गई है। गुप्त नवरात्रि में 9 दिनों तक माता दुर्गा की 10 महाविद्याओं- काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की साधना की जाती है। तंत्र, मंत्र और सिद्धियां प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि को बेहद शुभ माना जाता है। हालांकि, इस दौरान कुछ ऐसे नियम भी हैं जिनका पालन करना बेहद आवश्यक होता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि गुप्त नवरात्रि में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
ज्योतिषियों की मानें तो गुप्त नवरात्र के दौरान कई राशि के जातकों पर देवी मां मेहरबान रहेंगी। उनकी कृपा से सभी दुख और दर्द दूर हो जाएंगे। साथ ही खुशियों से जीवन भर जाएगा। शुभ कामों में सफलता मिलेगी। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा।
“ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” मंत्र का नियमित रूप से जाप करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। इस मंत्र के प्रत्येक अक्षर से एक ग्रह जुड़ा हुआ है। रोजाना आपको विषम संख्या जैसे 1, 3, 5 या 7 माला का जाप करना चाहिए।
गुप्त नवरात्रि में क्या करें
- गुप्त, नवरात्रि में दुर्गा माता की 10 महाविद्याओं की साधना करनी चाहिए। हालांकि, महाविद्याएं माता दुर्गा का रौद्र रूप हैं इसलिए गृहस्थों को बिना किसी गुरु के ऐसा करने से बचना चाहिए।
- जो लोग तंत्र, मंत्र की विधाओं में पारंगत हैं और सांसारिक मोह-माया से परे हैं उनको साधना करके शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
- गृहस्थ इस दौरान मंत्र जप, योग, ब्रह्मचर्य का पालन कर माता को प्रसन्न कर सकते हैं।
- गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में आपको सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। मांस-मदिरा का सेवन आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान दुर्गासप्तशती, अर्गला स्तोत्र, दुर्गा चालीसा आदि का पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
- राहु-केतु और शनि के प्रभावों को दूर करने के लिए गुप्त नवरात्रि का समय बेहद शुभ माना गया है। इस दौरान इन ग्रहों की शांति के लिए पाठ आप कर सकते हैं।
- दीपदान, पवित्र नदियों में स्नान और ध्यान करने से भी आप माता दुर्गा को गुप्त नवरात्रि में प्रसन्न कर सकते हैं।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान छोटी कन्याओं को उपहार देकर भी आप माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
गुप्त नवरात्रि में क्या न करें
- गृहस्थ हों या सांसारिक सभी लोगों को गुप्त नवरात्रि की अवधि में कामवासना से दूर रहना चाहिए। वासना जनित विचार आप पर हावी न हों इसके लिए योग-ध्यान आपको करना चाहिए।
- कुछ लोग बिना सोचे-समझे गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक अनुष्ठान करने लग जाते हैं, लेकिन बिना किसी गुरु के आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। इसके घातक परिणाम हो सकते हैं।
- गुप्त नवरात्रि के दौरान आपको बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए।
- इस दौरान स्त्रियों का अपमान न करें और घर में भी लड़ाई-झगड़ा करने से बचें। मन में किसी के प्रति भी गलत विचार न आने दें।
- अगर आप माता को प्रसन्न करने के लिए साधना या मंत्रों का जप कर रहे हैं तो गलती से भी मांसाहार, प्याज, लहसुन आदि का प्रयोग खाने में न करें।