मंगलवार, 19 अगस्त 2025 अति शुभ, अजा एकादशी & करें देवी तुलसी की खास पूजा, दूर होंगे सभी कष्ट

 मंगलवार, 19 अगस्त 2025 का दिन अति शुभ है. &  त्रिपुष्कर और वज्र योग  & इस दिन के स्वामी हनुमान जी है और दिन की शुरुआत शौर्य व रक्त के कारक मंगल ग्रह से होती है. मंगलवार दिन के दिन हनुमान जी की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना की जाए तो जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और महादेव अति प्रसन्न होते हैं. हनुमान जी भक्त पर हमेशा अपनी कृपा बनाए रखते हैं.  &  महाराजा वीर विक्रम किशोर माणिक्य बहादुर की जयंती & 19 अगस्त 2025) भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि &  अजा एकादशी के दिन कई सारे शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इस दिन सिद्धि योग और शिववास योग दोनों ही साथ में बन रहे हैं। इसलिए यह व्रत लोगों के लिए लाभदायक होने वाला है।  अजा एकादशी के दिन करें देवी तुलसी की खास पूजा, दूर होंगे सभी कष्ट

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR; HIMALAYAUK Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper. Mob. 9412932030A. PL CALL ME: & YR CONTRIBUTION FOR RELIGIOUS WORK

अजा एकादशी का व्रत हर साल भाद्रपद महीने में एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह व्रत 19 अगस्त, 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। एकादशी का व्रत नारायण को बहुत ज्यादा प्रिय है, 

 19 अगस्त 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है. इस दिन अजा एकादशी का व्रत है, ऐसे में विष्णु जी का शंख मं जल भकर अभिषेक करें और फिर उन्हें केसर मिश्रित जल चढ़ाएं. इसके बाद उन्हें पीले फूल, पीले फल अर्पित करें. इससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं,

अजा एकादशी के दिन घर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर घी का दीपक लगाएं, मान्यता है इससे घर में मां लक्ष्मी का वास होता है.

19 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर आर्द्रा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग रहेगा। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 − 12:50 मिनट तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 15:38 − 17:15 मिनट तक रहेगा।

दू धर्म में एकादशी की तिथि सबसे अहम होती है। इसकी महत्वता लोगों के जीवन में सबसे ज्यादा होती है। कई सारे लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ व्रत भी रखते हैं। इसलिए पूरे साल में पड़ने वाली एकादशी का महत्व ही अलग होता है। इस बार अगस्त के महीने में अजा एकादशी पड़ रही है। 

हिंदू पंचाग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 18 अगस्त को शाम के समय 5 बजकर 23 मिनट से आरंभ हो रही है और 19 अग्त दोपहर 3 बजकर 33 मिनट तक ही रहेगी। ऐसे में उदया तिथि में अजा एकादशी की पूजा और व्रत किया जाएगा। 

अजा एकादशी का व्रत 19 अगस्त को रखा जाएगा। ऐसे में इसका पारण 20 अगस्त को सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर किया जाएगा। 

अजा एकादशी का व्रत हर साल भाद्रपद महीने में एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह व्रत 19 अगस्त, 2025 को पड़ रहा है। ऐसा माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को रखते हैं, उन्हें सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है

अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ऐसे में जीवन में धन-धान्य और संपदा बनी रहती है, जो बेहद जरूरी होती है। इस दिन आप अपनी आर्थिक स्थिति को सही रखने के लिए भगवान विष्णु की पूजा कर सकती हैं। साथ ही, जीवन में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं। इसलिए आप एकादशी का व्रत कर सकती हैं।

अजा एकादशी व्रत में गलती से न खाएं ये चीजें

अजा एकादशी पर जो साधक व्रत रख रहे हैं, वे दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि चीजों को खा सकते हैं। व्रती को एकादशी व्रत के दिन भोजन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस तिथि पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन, मसाले, तेल आदि से भी परहेज करना चाहिए।

चावल और नमक का सेवन करने से भी बचना चाहिए। ऐसे में अगर आप इस व्रत का पालन कर रहे हैं, तो इन सभी बातों का जरूर ध्यान रखें

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु को भोग लगाते समय इस मंत्र ‘त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।” का जप करें। ऐसा करने से भगवान भोग स्वीकार कर लेते हैं। इसके साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना है। यह सभी एकादशी में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस साल अजा एकादशी 19 अगस्त, 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। अजा एकादशी (Aja Ekadashi 2025 2025) पर मां तुलसी की पूजा का बड़ा महत्व है,

पंचांग गणना के आधार पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 18 अगस्त को शाम 05 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 19 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट पर होगा।

अजा एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन साधक कठिन व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, इस दिन दान और पुण्य का बड़ा महत्व है। इस साल हिंदू पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। व्रत के साथ-साथ इस दिन (Aja Ekadashi 2025 Importance) देवी तुलसी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। वहीं, इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है।

मां तुलसी की पूजा विधि (Tulsi Puja Rituals)

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु और मां तुलसी की पूजा का संकल्प लें।
  • इस तुलसी के पौधे को जल अर्पित न करें। मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता स्वयं भी व्रत करती हैं, इसलिए उन्हें जल नहीं देना चाहिए।
  • तुलसी को जल चढ़ाना हो, तो एकादशी से एक दिन पूर्व ही चढ़ा लें।
  • सुबह और शाम तुलसी के समक्ष दीपक जलाएं।
  • तुलसी जी को लाल चुनरी और शृंगार का सामान अर्पित करें।
  • 11, 21, या 108 बार तुलसी जी परिक्रमा करें।
  • परिक्रमा करते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘जय जय तुलसी माता’ जैसे मंत्रों का जाप करें।
  • भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।
  • अंत में आरती करें और निर्जला एकादशी कथा का पाठ करें।
  • तुलसी पूजा मंत्र (Tulsi Puja Mantra)
  • 1. वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
  • पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
  • एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
  • य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
  • 2. महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी,
  • आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
  • ।दोहा तुलसी चालीसा।।
  • श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।
  • जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।
  • नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
  • दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
  • विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
  • भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
  • जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
  • करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
  • कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
  • तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
  • कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
  • वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
  • श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
  • कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
  • छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
  • तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
  • औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
  • देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
  • वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
  • नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
  • नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
  • नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
  • नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
  • नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
  • नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
  • जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
  • निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
  • करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
  • शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
  • क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
  • मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
  • जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
  • बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
  • प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
  • चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
  • करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
  • पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
  • यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
  • करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
  • है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
  • तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
  • भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।
  • यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।
  • गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

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