अयोध्या; समरसता कुंभ का श्रीगणेश

अयोध्या –  ब्‍यूरो रिपोर्ट-  देहरादून से श्री राजेन्‍द्र पंत के नेत़त्‍व में भारी संख्‍या में महिला,पुरूष पदाधिकारी अयोध्‍या  पहुंचे- 
मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शनिवार को यहां अवध यूनिव‍िर्सिटी के कैंपस में समरसता कुंभ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्‍होंने कहा कि यूनेस्‍को ने कुंभ को भारत की अमूर्त धरोहर की मान्‍यता दी है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी मेहनत है। उनके विशेष प्रयासों के चलते ही यूनेस्‍को ने कुंभ को आज यह दर्जा दिया है। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने पुस्‍तक का विमोचन भी किया। समरसता कुंभ का आयोजन दो दिनों तक चलेगा।  
 डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में आयोजितहोने वाले इस समरसमा कुंभ का उद्घाटन प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ द्वारा किया गया.16 दिसंबर को इसका समापन केंद्रीयमंत्री थावरचंद गहलोत करेंगे.  

देहरादून से अयोध्‍या रवाना होने से पूर्व आरएसएस विचारक श्री राजेन्‍द्र पंत ने हिमालयायूके  सम्‍पादक चन्‍द्रशेखर जोशी को  बताया कि  अयोध्‍यामें दो दिनी समरसता कुंभ का आयोजन हो रहा है.

प्रयागराज में मकर संक्रांति पर्व पर 15 जनवरी से आयोजित होने वाले महाकुंभ से पहले उत्‍तर प्रदेश सरकार की ओर से अलग-अलग पांच वैचारिक कुंभों का आयोजन किया गया है। पहले दो वैचारिक कुंभ काशी एवं वृंदावन में आयोजित हो चुके हैं जिन्हें क्रमश: पर्यावरण एवं नारी शक्ति कुंभ का नाम दिया गया था। तीसरे समरसता कुंभ का श्रीगणेश शनिवार को होगा। इसके लिए  अवध विश्वविद्यालय के नवीन  परिसर के करीब 44 एकड़ के विस्तृत क्षेत्रफल में  कुंभ नगरी बसाई गई है। वाल्मीकि नगरी के नाम से विश्रुत इस टेंट नगरी को 54 हिस्सों में बांटा गया है।

दो दिवसीय समरसता कुंभ के अनावरण से पहले तैयारियों का जायजा लेने अयोध्या पहुंचे प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने कुंभ नगरी में ही आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बताया कि महाकुंभ के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वैचारिक कुंभों का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता ही  देश की विरासत है।  विविधता में एकता का मूल तत्व ही सामाजिक समरसता है। इसी के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान हो सकता है।  

अयोध्या विवाद पर योगी ने कहा कि मंदिर मामले को लेकर कोर्ट में कौन लोग गए? वे जो कभी खुद मंदिर नहीं गए होंगे। अयोध्या पर षड्यंत्र आरंभ हुए तो मुझे लगा प्रयागराज कुंभ होगा तो उसके खिलाफ भी साजिश की कोशिशें होंगी। उससे पहले हम वैचारिक कुंभ करके इसका पर्दाफाश करेंगे।   
वैचारिक कुंभ के लिए अवध विश्वविद्यालय कैंपस में करीब 44 एकड़ में कुंभ नगरी बसाई गई है। वाल्मीकि नगरी के नाम से बनी इस टेंट नगरी को 54 हिस्सों में बांटा गया है। यहां पर 3000 अतिथियों के ठहराने की व्‍यवस्‍था की गई है। 

दो दिवसीय समरसता कुंभ के अनावरण से पहले तैयारियों का जायजा लेने अयोध्या पहुंचे प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री ने कुंभ नगरी में ही आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बताया कि महाकुंभ के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वैचारिक कुंभों का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता ही  देश की विरासत है।  विविधता में एकता का मूल तत्व ही सामाजिक समरसता है। इसी के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान हो सकता है।  

उन्होंने कहा कि अयोध्या में समरसता कुंभ के आयोजन के पीछे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम की ओर से स्थापित मानदंड ही हैं। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती नरेश की राजगद्दी का त्याग कर प्रभु राम ने वनवास को स्वीकार किया। इसके साथ 14 वर्षों के वनवास में उन्होंने समाज के वंचितों, कोल-भील, गिरिजनों व आदिवासियों सभी को एकता के सूत्र में आबद्ध किया और समरस समाज की रचना की। इसके कारण रामराज्य की स्थापना हो सकी। उन्होंने कहा कि रामराज्य का यही संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित करने के लिए समरसता कुंभ का आयोजन किया गया।

इस मौके पर डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि  भारत के विभिन्न स्थानों पर आयोजित होने वाले महाकुंभों की एक ऐसी अनूठी परम्परा है जिसका कोई सानी पूरी दुनिया में नहीं है। उन्होंने कहा कि इन महाकुंभों का अपना  धार्मिक और सांस्कृतिक  मूल्य है। इन्हीं मूल्यों की पुनस्र्थापना के लिए ही वैचारिक कुंभ का आयोजन हो रहा है। उन्होंने बताया कि समरसता कुंभ में देश के विभिन्न क्षेत्रों के करीब तीन हजार प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे जो कि विविध समुदायों और वर्गों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आचार्य दीक्षित के अनुसार सभी प्रतिनिधि एक साथ एक स्थान पर दो दिवस तक रहकर एक समाज, एक रक्त और एक ईश्वर की भावना को प्रस्फुटित करेंगे। 

वहीं दूसरी ओर प्रयागराज में भी आज कुंभ 2019 को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. इसमें 72 देशों के राजदूत शिरकत करेंगे. विदेश राज्‍य मंत्री वीके सिंह इन सभी को विशेष विमान से लेकर प्रयागराज पहुंचेंगे. ये सभी राजदूत यहां कुंभ की तैयारियों का जायजा लेंगे और अपने-अपने देशों का झंडा फहराएंगे. अगले साल होने वाले कुंभ मेले के संदर्भ में पांच स्थानों पर हो रहे विचार कुंभ के मद्देनजर अगले तीन विचार कुंभ के आयोजन स्थल और तारीखों का निर्धारण कर दिया गया है. 

आगामी 15 व 16 दिसंबर को समरसता कुंभ, अयोध्या में यूं ही नहीं, बल्कि इसके पीछे इस धरा-धाम की विशेषता भी है। नगरी में 62 जातीय मंदिर हैं तो भगवान राम, भागीरथ, हरीशचंद्र व पांच जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमि भी अयोध्या है। गौतमबुद्ध के 16 वर्षावास की नगरी भी अयोध्या ही है, जहां सिखों के प्रथम, नवम और दशमगुरु के चरण पड़े, जिसे मानवता का सूत्रपात करने वाले धरती के प्रथम पुरुष मनु ने बसाया था। शैव, शाक्य और वैष्णव परंपरा के प्रतिनिधि मंदिर भी अयोध्या के समरसता से भरे-पगे स्वरूप को बखूबी रेखांकित करते हैं। इसीलिए योगी सरकार बनने के बाद समरसता कुंभ दूसरा ऐसा मौका होगा, जो अयोध्या की ग्लोबल ब्रां¨डग करेगा।

अयोध्या में ‘समरसता-कुंभ’ का आयोजन 15 और 16 दिसंबर को हो रहा है. वहीं लखनऊ में ‘युवा कुंभ’ का आयोजन 22 और 23 दिसंबर को और प्रयागराज में ‘संस्कृति-कुंभ’ का आयोजन 30 जनवरी, 2019 को होगा. वाराणसी और वृंदावन में दो विचार कुंभ का आयोजन पहले ही हो चुका है.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 दिसंबर को प्रयागराज आकर कुंभ की तैयारियों को लेकर पूर्ण हुई परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे. उन्‍हें यहां लगभग 3500 करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण करेंगे. उनसे पहले आज (15 दिसंबर) इसी क्रम में करीब 72 देशों के राजदूत भी प्रयागराज आएंगे.

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