तय है कि यह राजनेता 2019 के बड़े खिलाड़ियों में से एक हैं

राहुल गांधी 2019 के बड़े खिलाड़ी साबित होंगे: मुख्य प्रतिद्वन्दी को 150 सीट पर रोकने के लिये दृढ़ प्रतिज्ञ है राहुल, सितारों की चाल अनुकुल रही तो करिश्मा कुदरत का हो सकता है# भाजपा छोड़ कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए उदित राज # Execlusive Report by CS JOSHI- EDITOR www.himalayauk.org (Leading Digital Newsportal)

लोकसभा चुनाव से पहले तीन राज्यों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की. इसके लिए राहुल गांधी की तारीफ हुई. 16 दिसंबर 2017 को राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल का अच्छा प्रदर्शन जारी है, 
चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी. कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सत्ता की चाबी कांग्रेस के ‘हाथ’ लगी. लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं को ऊर्जा मिली. खासकर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जीत ने राहुल गांधी की छवि को मजबूत किया. विपक्ष के अन्य दलों ने इसके लिए राहुल गांधी की तारीफ भी की.

लोकसभा चुनाव में टिकट कटने से नाराज भाजपा सांसद उदित राज बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए और दावा किया कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ‘दलित विरोधी’ है। उदित राज ने बुधवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की जिन्होंने पार्टी में उनका स्वागत किया। पार्टी में शामिल होने के बाद उदित राज ने संवाददाताओं से कहा, “मैं कांग्रेस में शामिल होकर बहुत खुश हूं।” उन्होंने कहा, “पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण में मेरी जीत तय बताई गई थी। दूसरे चैनलों के सर्वेक्षण में भी मैं जीत रहा था। इसके बावजूद मेरा टिकट काटा गया।”

राजनीति में आखिरकार हार और जीत का फैसला ही सबकुछ तय करता है, तमाम चर्चा बाद में आती हैं. तीन राज्यों की जीत कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम थी क्योंकि यहां उसका सीधा मुकाबला बीजेपी से था. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मिली इस जीत का महत्व को कांग्रेस ने समझा. अब देश में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं. राहुल गांधी का मुकाबला नरेंद्र मोदी जैसे दमदार छवि वाले नेता से है.

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी का यह पहला लोकसभा चुनाव है. उनके लिए ये बड़ी जिम्मेदारी और बड़ी चुनौती भी है. कांग्रेस के समर्थक राहुल गांधी को पीएम मैटेरियल बताते हैं. राहुल गांधी भी केंद्र सरकार का नेतृत्व करने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं. 23 मई के नतीजों के बाद कांग्रेस के प्रदर्शन के हिसाब से उनका विश्लेषण होगा. इस बार राहुल अपनी पारंपरिक सीट अमेठी के अलावा दक्षिण भारत के वायनाड लोकसभा सीट से मैदान में हैं. वायनाड सीट पर तीसरे चरण के तहत वोटिंग हुई और अमेठी में चौथे चरण में चुनाव होना है. दो सीटों से चुनाव लड़ने के फैसले पर राहुल गांधी कहते हैं कि वे संदेश देना चाहते हैं कि पूरब से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक भारत एक है. वे उत्तर भारत के साथ हैं तो दक्षिण भारत के साथ भी हैं.

दरअसल कांग्रेस हिंदी पट्टी के अलावा दक्षिण भारत में भी अपने पक्ष में माहौल बनाना चाहती है. इसके लिए खुद राहुल वायनाड से मैदान में उतरे हैं. वायनाड केरल का एकमात्र जिला है जिसकी सीमाएं दक्षिण के तीन राज्यों को छूती हैं. केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमाओं को छूने वाले इस जिले में होने वाली हर राजनीतिक हलचल का इन तीनों राज्यों पर असर से इनकार नहीं किया जा सकता है. केरल में 20, तमिलनाडु में 39 और कर्नाटक में लोकसभा की कुल 28 सीटें हैं.

एक तरफ जहां राहुल गांधी खुद कांग्रेस के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं वहीं अपने नए-पुराने दोस्तों को भी इस बार साथ लेकर चल रहे हैं. बिहार में आरजेडी, कर्नाटक में जेडीएस, तमिलनाडू में डीएमके तो महाराष्ट्र में एनसीपी साथ में है. 40 सीटों वाले राज्य बिहार में कांग्रेस को नौ सीटें दी गई हैं और एक राज्यसभा की सीट देने की बात है. लालू यादव से कांग्रेस के पुराने संबंध हैं. वैसे लालू जेल में हैं, ऐसे में तेजस्वी यादव के साथ मिलकर कांग्रेस मैदान में है. वहीं कर्नाटक में जेडीएस के साथ कांग्रेस सरकार में है.

बिहार और कर्नाटक में भले ही कांग्रेस गठबंधन बनाने में कामयाब रही लेकिन सीटों के मामले में देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में वह अपने दम पर चुनाव लड़ रही है. इसके अलावा दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ भी गठबंधन नहीं हो सका. वैसे यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव में राहुल और अखिलेश दोस्त थे लेकिन 2019 तक ये दोस्ती टिक नहीं सकी. हालांकि गठबंधन नहीं होने के बावजूद भी अखिलेश और मायावती के गठबंधन ने सोनिया गांधी की रायबरेली और राहुल गांधी की अमेठी सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे. सपा और बीएसपी ने एक तरह से कांग्रेस को अकेला छोड़ दिया. ऐसे वक्त में प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में एंट्री हुई. वैसे इससे पहले भी प्रियंका गांधी कांग्रेस के लिए प्रचार कर चुकी हैं लेकिन सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई. प्रियंका को पार्टी का महासचिव बनाया गया. इसके साथ ही उन्हें पूर्वी यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई. प्रियंका को 41 सीटों की जिम्मेदारी दी गई है.

आक्रामक दिखे राहुल 
बीते दिनों में राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमले किए. खासकर राफेल मुद्दे पर उन्होंने सरकार और यहां तक की सीधे पीएम मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. अपनी रैलियों में राहुल गांधी ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगवाते दिखे. पार्टी ने अपने घोषणापत्र में भी इस बात का एलान किया कि अगर सरकार बनती है तो राफेल मामले की जांच करवाई जाएगी. इसके अलावा नोटबंदी और जीएसटी के फैसले पर पर भी राहुल ने जमकर हमला किया. जीएसटी को उन्होंने ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बताया था. रोजगार के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी सरकार को खूब घेरा है.

‘न्याय’ का वादा
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसान से लेकर युवाओं तक को साधने की कोशिश की. इसमें ‘न्याय’ योजना की काफी चर्चा है. NYAY यानी न्यूतम आय योजना के तहत सबसे गरीब 20 फीसदी परिवार को 72000 रुपये सालाना देने का वादा किया गया है. इसके अलावा युवाओं को रोजगार देने की बात कही है. पार्टी के मेनिफेस्टो में कहा गया है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो 10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायत में रोजगार दिया जाएगा. वहीं कारोबार शुरु करने वालों के लिए शुरुआती तीन साल तक अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा कांग्रेस ने कहा कि जैसे रेलवे का बजट होता है वैसे ही किसान बजट भी अलग होना चाहिए. किसान अगर बैंकों का पैसा नहीं दे पाते तो उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जाएगा बल्कि सिविल मामला दर्ज किया जाएगा. इसके साथ ही किसानों को राहत पैकेज दिये जाएंगे.

ऐसे में कांग्रेस अपनी तरफ से जो कुछ कर सकती थी उसने किया है. 23 मई को नतीजे आएंगे. कई सीटों पर चुनाव होने बाकी हैं. पार्टी की कमान राहुल गांधी के हाथों में हैं. आगे क्या कुछ होता है, ये जल्द सामने होगा लेकिन इतना तो तय है कि राहुल गांधी 2019 के बड़े खिलाड़ियों में से एक हैं.

भाजपा छोड़ कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए उदित राज

लोकसभा चुनाव में टिकट कटने से नाराज भाजपा सांसद उदित राज बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए और दावा किया कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ‘दलित विरोधी’ है। उदित राज ने बुधवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की जिन्होंने पार्टी में उनका स्वागत किया।

पार्टी में शामिल होने के बाद उदित राज ने संवाददाताओं से कहा, “मैं कांग्रेस में शामिल होकर बहुत खुश हूं।” उन्होंने कहा, “पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण में मेरी जीत तय बताई गई थी। दूसरे चैनलों के सर्वेक्षण में भी मैं जीत रहा था। इसके बावजूद मेरा टिकट काटा गया।”

उदित राज ने कहा कि पार्टी में रहते हुए उन्होंने दलित मुद्दों पर हमेशा आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि दो अप्रैल (2018) के भारत बंद पर उन्होंने अपनी स्पष्ट राय रखी थी। सबरीमला मंदिर पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का भी उन्होंने समर्थन किया था और सवाल किया था कि आखिर महिलाएं मंदिर में क्यों नहीं जा सकतीं? उन्होंने कहा, “भाजपा दलित विरोधी पार्टी है। इसके बारे में मैं पूरा विवरण सामने रखूंगा।”

 पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद बने उदित राज को इस बार टिकट नहीं मिला। इसके बाद से वह खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे थे। उदित राज की जगह भाजपा ने उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट से पंजाबी गायक हंसराज हंस को उम्मीदवार बनाया है।

 बीजेपी सांसद उदित राज ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है. उन्‍होंने बुधवार को कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्‍यता ग्रहण की. उत्‍तर-पश्चिमी दिल्‍ली (सुरक्षित) सीट से बीजेपी सांसद को इस बार बीजेपी ने टिकट नहीं दिया था. उनकी जगह बीजेपी ने मशहूर सिंगर हंसराज हंस को टिकट दे दिया. लोकसभा टिकट नहीं मिलने पर उदित राज ने नाराजगी जाहिर की थी. उसी की अगली कड़ी में उन्‍होंने आज कांग्रेस ज्‍वाइन करने का फैसला किया.

इससे पहले भाजपा सांसद उदित राज ने मंगलवार सुबह कहा था कि यदि उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया गया तो वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे. राज ने ट्वीट किया था, ‘‘मैं टिकट का इंतजार कर रहा हूं. यदि मुझे टिकट नहीं मिला, तो मैं पार्टी को अलविदा कह दूंगा.’’ इससे पहले सोमवार आधी रात को अपने दर्जनों समर्थकों के साथ पंत मार्ग पर दिल्ली भाजपा कार्यालय में पहुंचे थे और उन्होंने वहां हंगामा किया था. राज ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने भाजपा प्रमुख अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टिकट के विषय में बात करने की कोशिश की लेकिन उन्हें उनका कोई जवाब नहीं मिला.

दिल्ली की उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी का टिकट न मिलने के बाद से नाराज उदित राज अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद पार्टी में उनका स्वागत किया. हालांकि, जिस कारण उदित राज ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में जाने का फैसला किया है, अपना वो मकसद उदित राज चाहकर भी पूरा नहीं कर पाएंगे.

इसकी वजह ये है कि दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर 12 मई को मतदान होना है. प्रत्याशियों के नामांकन की आखिरी तारीख 23 अप्रैल थी, जो अब निकल चुकी है और बीजेपी व आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस पार्टी के सभी प्रत्याशी 7 सीटों पर नामांकन दाखिल कर चुके हैं.

कांग्रेस के टिकट पर चांदनी चौक से जेपी अग्रवाल, उत्तर पूर्व दिल्ली से शीला दीक्षित, पूर्वी दिल्ली से अरविंदर सिंह लवली, नई दिल्ली से अजय माकन, उत्तर पश्चिम दिल्ली से राजेश लिलौठिया, पश्चिम दिल्ली से महाबल मिश्रा और दक्षिण दिल्ली से विजेंदर सिंह ने नामांकन किया है.

यानी जिस उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट से 2014 में उदित राज बीजेपी के टिकट पर जीते थे, उस सीट से कांग्रेस के टिकट पर राजेश लिलौठिया चुनाव लड़ रहे हैं. ये सीट दिल्ली की एकमात्र आरक्षित सीट है और राजेश लिलौठिया प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्षों में एक हैं.

इस तरह अब ऐसी कोई सूरत नजर नहीं आती है, जिसमें उदित राज अपनी पुरानी सीट उत्तर पश्चिम से चुनाव लड़ सकें. ऐसे में अब ये देखना होगा कि क्या कांग्रेस उदित राज को दिल्ली के बाहर किसी राज्य से चुनाव लड़ाती है या फिर उनके लिए पार्टी के पास कोई और प्लान है.  भाजपा ने मंगलवार को उत्तर पश्चिम दिल्ली से गायक हंस राज हंस को पार्टी उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा की. यह घोषणा नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा से कुछ घंटों पहले की गई. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया उदित राज की नाराजगी की वजह से हंस राज को उम्मीदवार बनाने की घोषणा में देरी के पीछे एक कारण यह था. हंस राज के सामने आम आदमी पार्टी के गुग्गन सिंह और कांग्रेस के राजेश लिलोठिया की चुनौती होगी.

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