भाई दूज पर ग्रहों और नक्षत्रों का उत्तम योग, 23 अक्टूबर, गुरुवार ; ग्रहों की अनोखी चाल 

 23 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर विशाखा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 11:42-12:27 हैं।  भाई दूज पर ग्रहों और नक्षत्रों का उत्तम योग *  भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या है अंतर? BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR; Mob. 9412932030 : HIMALAYAUK NEWS (Leading Newsportal & youtube Channel & Daily Newspaper)

रक्षा बंधन को “रक्षिका” या “रक्षा सूत्र बंधन” कहा जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी सुरक्षा और भलाई की कामना करती है। यह बंधन भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है। वहीं भाई दूज को “भागिनी हस्ता भोजना” कहा जाता है। इस दिन बहन अपने भाई को घर बुलाकर तिलक करती है, गोला और मिश्री देती हैं, आरती उतारती है और अपने हाथों से भोजन कराकर प्रेम और स्नेह व्यक्त करती है।

 23 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर विशाखा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 11:42-12:27 हैं

भाई दूज आया, खुशियों का दिन लाया,
भाई-बहन का प्यार और भी गहरा बनाया।
साथ हो हमेशा, हर मोड़ पर साथ निभाएं,
हँसी-खुशी से हर दिन अपने दिल सजाएं।

 23 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस तिथि पर विशाखा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 11:42-12:27 हैं

भाई दूज के दिन 23 अक्टूबर चंद्रमा ग्रह की चाल में बदलाव होगा. गुरुवार को चंद्र का राशि परिवर्तन वृश्चिक राशि में होगा, जिसके स्वामी मंगल हैं. 23 अक्टूबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश कर ढाई दिनों तक रहेंगे और 3 राशियों को विभिन्न क्षेत्रों में लाभ पहुंचाएंगे.

भाई दूज पर प्रमुख उपाय

स्नान और शुद्धि
भाई-दूज के दिन बहन और भाई दोनों सुबह स्नान करें. घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें.

भाई के लिए तिलक और अक्षत
बहन को भाई के माथे पर रोली या चंदन से तिलक लगाना चाहिए और उसके ऊपर अक्षत (चावल) चढ़ाना चाहिए. यह भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए शुभ माना जाता है.

दीपक और आरती
तिलक के बाद दीपक जलाकर भाई की आरती करें. इससे घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है.

भाई को मिठाई खिलाना
भाई को मिठाई खिलाना और छोटा सा उपहार देना शुभ माना जाता है. यह भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है.

यमराज का स्मरण
कुछ क्षेत्रों में भाई दूज पर बहन यमराज की पूजा और मंत्र भी पढ़ती है. इससे भाई की दीर्घायु होती है और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है.

सफेद या लाल वस्त्र पहनना
बहन को शुभ वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए. लाल या पीला रंग शुभ माना जाता है, वहीं भाई के लिए हल्का रंग या सफेद वस्त्र लाभकारी रहता है.

दान और दया
भाई दूज पर जरूरतमंद को दान करना और गरीबों को भोजन देना भी शुभ फल देता है.

23 अक्टूबर को चित्रगुप्त पूजा व भाई दूज है। ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्र देव के तुला राशि में गोचर से कई राशियों को लाभ मिलेगा, खासकर मेष और धनु राशि के जातकों को। मेष राशि वालों को उदारता, मानसिक शांति और धन लाभ होगा, जबकि धनु राशि वालों को शुभ समाचार, पारिवारिक सुख और कारोबार में सफलता मिलेगी। 23 अक्टूबर को चित्रगुप्त पूजा और भाई दूज है। गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाई जाती है। इसके अगले दिन यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा मनाई जाती है।

ज्योतिषियों की मानें तो मन के कारक चंद्र देव के तुला राशि में गोचर करने से कई राशि के जातकों को फायदा होगा। इनमें मेष और कन्या राशि के जातकों को सर्वाधिक लाभ होगा।  भाई दूज, जो दीपावली के ठीक बाद आता है, भाई-बहन के रिश्ते को नए सिरे से जोड़ने और उनके प्रेम को मान देने वाला एक विशेष अवसर है। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। वहीं भाई भी अपने प्रेम और आशीर्वाद के साथ बहन को उपहार देते हैं। यह पर्व भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते की मिठास और सुरक्षा का प्रतीक है।

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुरक्षा और भलाई की कामना करती है। इसके विपरीत, भाई दूज कार्तिक मास की कृष्ण द्वितीया को मनाया जाता है, जो दीपावली के कुछ दिन बाद पड़ता है। इस दिन बहन भाई का स्वागत करती है, तिलक करती है और उसे अपने हाथों से भोजन कराकर स्नेह जताती है।

रक्षाबंधन पर बहन अपनी भावना और स्नेह के माध्यम से भाई की कलाई पर राखी बांधती है, जिससे भाई उसे अपने जीवन में सुरक्षा और संरक्षण का वचन देता है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है। वहींं, भाई दूज पर बहन अपने भाई का स्वागत करती है, तिलक करके उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती है, और अपने हाथों से भोजन कराकर अपने प्रेम और सेवा का भाव व्यक्त करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *