24 अक्तूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इस तिथि पर अनुराधा नक्षत्र और सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है। शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त 11:39 − 12:24 हैं। ज्योतिष दृष्टि से 24 अक्टूबर का दिन खास है क्योंकि इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य और ग्रहों के राजकुमार बुध का गोचर हो रहा है. इन दोनों ग्रहों के गोचर का शुक्रवार को 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा By Chandra Shekhar Joshi Mob. 9412932030 & छठ पूजा जो भगवान सूर्य को समर्पित & यह एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसमें सूर्य देव की पूजा कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। सनातन धर्म में सूर्य की आराधना का अत्यंत महत्व है, क्योंकि सूर्य देव ही ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। & छठ पूजा पर सूर्य देव तथा छठी माता की पूजा से व्यक्ति को संतान, सुख और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

वैदिक ज्योतिष में पंचांग को समय का प्रतिनिधि माना जाता है। जहाँ आधुनिक युग में लोग समय जानने के लिए कैलेंडर और घड़ी का सहारा लेते हैं, वहीं हिंदू धर्म के अनुयायी समय की गणना और शुभ-अशुभ मुहूर्त जानने के लिए पंचांग का प्रयोग करते हैं। पंचांग के माध्यम से केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि दिनभर के सभी शुभ और अशुभ मुहूर्तों का भी विवरण प्राप्त होता है।
24 अक्तूबर 2025, शुक्रवार कार्तिक शुक्ल तिथि तृतीया (24-25 मध्य रात 1.20 तक) तथा तदोपरांत तिथि चतुर्थी & 24 अक्टूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि & अनुराधा नक्षत्र, सौभाग्य योग, शोभन योग, तैतिल करण, गर करण और वणिज करण का निर्माण & सूर्य ग्रह का स्वाति नक्षत्र और बुध ग्रह का वृश्चिक राशि में गोचर होगा & सूर्योदय – 06:28 ए एम सूर्यास्त – 05:43 पी एम & ब्रह्म मुहूर्त – 04:46 ए एम से 05:37 ए एम
विक्रमी सम्वत् : 2082, कार्तिक प्रविष्टे 8, राष्ट्रीय शक सम्वत्: 1947, दिनांक : 2 (कार्तिक), हिजरी साल 1447, महीना जमादि-उल-अव्वल, तारीख 1, सूर्योदय : प्रात: 6.41 बजे, सूर्यास्त: सायं 5.42 बजे (जालंधर टाइम), नक्षत्र: अनुराधा (पूरा दिन-रात)। योग: सौभाग्य (24 अक्तूबर दिन-रात तथा 25 को प्रात: 5.55 तक) तथा तदोपरांत योग शोभन, चंद्रमा: वृश्चिक राशि पर (पूरा दिन-रात)। दिशा शूल : पश्चिम एवं नैर्ऋत्य दिशा के लिए, राहूकाल: प्रात: साढ़े दस से दोपहर बारह बजे तक। पर्व, दिवस तथा त्यौहार : जमादि-उल-अव्वल (मुस्लिम) महीना शुरू, संयुक्त राष्ट्र दिवस।
ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रहों का उल्लेख मिलता है, जिसके चंद्र ग्रह और देवगुरु बृहस्पति ग्रह महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. चंद्र देव को मन, माता, मानसिक स्थिति, स्वभाव और वाणी का दाता माना जाता है, जबकि देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धन, बुद्धि, वैवाहिक सुख और संतान का प्रतिनिधित्व करते हैं. जब भी ये दोनों ग्रह गोचर करते हैं, तब-तब राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव आता है. हालांकि, चंद्र-देवगुरु बृहस्पति की युति का भी राशियों पर अच्छा-खासा प्रभाव पड़ता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, बीते दिनों मिथुन राशि में देवगुरु बृहस्पति का चंद्र ग्रह से मिलन हुआ है, जिससे युति का निर्माण हुआ है. चंद्र-देवगुरु बृहस्पति की युति से कुछ राशियों को विशेष लाभ होने की संभावना है,
24 अक्टूबर 2025 से कार्तिक मास का 18वां दिन है। साथ ही आज पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है, जो कि 01:19 ए एम, अक्टूबर 25 तक जारी रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। बता दें कि आज शुक्रवार का दिन है। इस दिन सूर्य देव तुला राशि में रहेंगे। वहीं चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेंगे। शुक्रवार के दिन अभिजीत मुहूर्त 11:43 ए एम से 12:28 पी एम तक है। इस दिन राहुकाल 10:41 ए एम से 12:05 पी एम तक रहेगा। आज कोई विशेष त्योहार नहीं है, लेकिन वार के हिसाब से आप शुक्रवार का व्रत रख सकते हैं, जो माता लक्ष्मी को समर्पित होता है।
शुक्रवार के उपाय – मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सफेद और लाल रंग के फूल जैसे कमल या गुलाब अर्पित करना लाभदायक होता है। कुंडली में शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार को श्वेत वस्त्र धारण करना। साथ ही चावल, आटा, दूध जैसी सफेद चीजों का दान करना मददगार होता है। आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए मां लक्ष्मी की पूजा में चावल की खीर और श्रीफल अर्पित करना। साथ ही कमलगट्टे की माला से उनके नामों का जप करना भी लाभकारी होता है। लक्ष्मी वैभव व्रत करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सभी दुख दूर हो जाते हैं।
सूर्योदय समय ग्रहों की स्थिति :- सूर्य तुला में चन्द्रमा वृश्चिक में मंगल तुला में बुध तुला में
गुरु कर्क में शुक्र कन्या में शनि मीन में राहू कुंभ में केतु सिंह में
आज के विशेष उपाय:
आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:। आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में इत्र चढ़ाएं। वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
आपकी किस्मत के तारे ;
शिवमहिम्नस्तोत्र का पाठ , शिव चालीसा का पाठ , बजरंग बाण का पाठ ,विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ , हनुमान चालीसा का पाठ & शिव चालीसा का पाठ & गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ & आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ & रुद्राष्टकं का पाठ & गणपति को दूर्वा चढ़ाकर गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ & दुर्गा चालीसा का पाठ & शिव चालीसा का पाठ
साल 2025 में छठ पूजा का त्योहार कब मनाया जाएगा? साथ ही जानेंगे इस त्योहार के महत्व और पूजा के शुभ मुहूर्त को भी। छठ पूजा जो भगवान सूर्य को समर्पित
छठ पूजा जो भगवान सूर्य को समर्पित है। पहले यह त्यौहार मुख्य रूप से बिहार और उसके आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाता था, लेकिन अब इसकी धूम पूरे देश में रहती है। छठ पूजा का त्यौहार अपनी शुद्धता और सूर्य देवता के प्रति भक्ति को दर्शाता है। यह त्यौहार माताएं पुत्र प्राप्ति और पुत्र की लंबी आयु के लिए रखती हैं। छठ पूजा का त्यौहार चार दिनों तक चलता है, जिसमें भगवान सूर्य की पूजा की जाती है।
छठ पूजा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है, जो भगवान सूर्य को समर्पित है। यह त्यौहार वर्ष में दो बार मनाया जाता है। एक बार ग्रीष्म ऋतु में और दूसरी बार शरद ऋतु के दौरान। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार वासियों द्वारा मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली के उत्सव के बाद आता है और अब यह एक महापर्व का रूप ले चुका है। छठ पूजा की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह अब उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, झारखंड और नेपाल के कई हिस्सों में भी मनाया जाता है। इसके परिणाम स्वरूप छठ पूजा की रौनक अब बिहार-झारखंड के अलावा देश के अन्य भागों में भी दिखाई देती है।
छठ पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि तक की जाती है। ऐसे में साल 2025 में यह पर्व 25 अक्टूबर को नहाय खाय से शुरू होगा और 28 अक्टूबर सुबह के अर्घ्य के साथ समाप्त होगा। वेदों में सूर्य देव को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य के शुभ प्रभाव से मनुष्य को तेज, आरोग्यता और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। सूर्य के प्रकाश में अनेक रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह को आत्मा, पिता, पूर्वज, सम्मान और उच्च सरकारी सेवा का कारक कहा गया है।
- पहला दिन: नहाय-खाय (25 अक्टूबर 2025) – पहले दिन, माताएं नदी या तालाब किनारे जाकर स्नान करती हैं और छठ पूजा के लिए वेदी बनाती हैं।
- दूसरा दिन: खरना (26 अक्टूबर 2025) – दूसरे दिन, शाम के समय खीर पूरी खाकर 36 घंटे के कठोर व्रत की शुरुआत होती है।
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य (27 अक्टूबर 2025) – तीसरे दिन, उपवास धारण करने वाली माताएं किसी पवित्र जल स्रोत जैसे नदी तालाब आदि के पास जाकर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं।
- चौथा दिन: सुबह अर्घ्य (28 अक्टूबर 2025) – चौथे दिन, शाम की तरह सुबह भी महिलाएं जल सरोवर के किनारे जाती हैं और सूर्य देवता को अर्घ्य देकर पूजा समपन्न करती हैं। इस पूजा के उपरांत व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं, जिसे पारण या परना कहते हैं।
- छठ पूजा के दिन सूर्याोदय का समय- प्रात: 6 बजकर 29 मिनट
- छठ पूजा के दिन सूर्यास्त का समय- शाम 5 बजकर 52 मिनट