15 अक्टूबर 2026, गुरुवार & तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी (प्रातः 03:25 AM तक, उपरांत षष्ठी) वार: गुरुवार नक्षत्र: ज्येष्ठा योग: सौभाग्य (रात 09:14 PM तक, उपरांत शोभन) & सूर्योदय: प्रातः 06:27 AM सूर्यास्त: सायं 05:57 PM & राहुकाल: दोपहर 01:38 PM से 03:05 PM तक BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR 9412932030

15 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और गुरुवार का दिन है। पंचमी तिथि देर रात 1 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। कल नवरात्र का पांचवां दिन है। वहीं, कल रात 9 बजकर 15 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा। साथ ही कल 15 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा। ललिता पंचमी का व्रत भी किया जायेगा।
स्कंदमाता की पूजा नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है। स्कंदमाता को मां दुर्गा का पांचवां रूप माना गया है। कार्तिकेय यानि स्कंद की माता होने के कारण मां को स्कंदमाता नाम मिला है। माता की सवारी वाहन है और इनकी 4 भुजाएं हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता की साधना करने से विशुद्ध चक्र जाग्रत होता है। नवरात्रि के पांचवें दिन नीचे दिए गए मंत्रों का जप करके आप माता को प्रसन्न कर सकते हैं। इन मंत्रों जप करने से आपको पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।
- आश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि – 15 अक्टूबर को देर रात 1 बजकर 26 मिनट तक
- सौभाग्य योग- 15 अक्टूबर को रात 9 बजकर 15 मिनट तक
- ज्येष्ठा नक्षत्र- 15 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक
- 15 अक्टूबर विशेष- ललिता पंचमी व्रत, नवरात्र का पांचवां दिन
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:46 ए एम से 05:36 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 05:11 ए एम से 06:27 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:43 ए एम से 12:28 पी एम
- विजय मुहूर्त- 01:58 पी एम से 02:43 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:43 पी एम से 06:08 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 05:43 पी एम से 06:59 पी एम
- अमृत काल- 03:50 पी एम से 05:24 पी एम
शारदीय नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद कुमार भी कहा जाता है। उनकी माता होने के कारण देवी दुर्गा के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। माता की प्रतिमा में बालरूप में स्कंद उनकी गोद में विराजमान रहते हैं। देवी स्कंदमाता का रंग पूरी तरह सफेद बताया गया है। मां स्कंदमाता अपने भक्तों पर उसी तरह ममता और कृपा बरसाती हैं, जैसे एक मां अपने बच्चों का ध्यान रखती है।
स्कंदमाता को भोग अवश्य लगाना चाहिए। या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः।
ॐ ह्रीं सहा स्कंदमात्र्यै नमः।
ॐ देवी स्कंदमातायै नम:
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी।