16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार माता दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा- षष्ठी के दिन देवी का बोधन और आमंत्रण & बंगाल की परंपरा में षष्ठी के दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है। इसी दिन से दुर्गा पूजा का मुख्य चरण आरंभ होता है। बता दें कि दुर्गा पूजा में मुख्य रूप से महिषासुरमर्दिनी रूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिक, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती भी विराजमान होते हैं। नवरात्रि का छठा दिन पड़ रहा है, जब मां कात्यायनी की आराधना की जाएगी। शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 5:55 AM तक
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उपाय पान के पत्ते पर पाँच इलायची रखें। दो गोमती चक्र और दो कमल गट्टे रखें। शुक्रवार को महालक्ष्मी को अर्पित करें।
16 अक्टूबर को एक बेहद प्रभावशाली नवपंचम दृष्टि योग का निर्माण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह योग तब बनता है जब कुंडली में दो ग्रह एक-दूसरे से पांचवें और नौवें भाव में स्थित होते हैं या उनके बीच 120 डिग्री का कोण बनता है। पंचांग के अनुसार, 16 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 58 मिनट पर ऊर्जा और साहस के कारक ग्रह मंगल और कर्म, न्याय व अनुशासन के प्रतीक शनि के बीच नवपंचम दृष्टि योग स्थापित होगा। इन दोनों शक्तिशाली ग्रहों के इस शुभ संयोग से कई राशि के जातकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
सूर्य और शनि के बीच भले ही पिता-पुत्र का संबंध हो लेकिन वैदिक ज्योतिष में इन्हें एक दूसरे का शत्रु माना जाता है। ये दोनों ग्रह 17 अक्टूबर को षडाष्टक योग का निर्माण करेंगे। ऐसे इसलिए कि सूर्य का गोचर कन्या से तुला राशि में होगा। इस स्थिति में सूर्य ग्रह तुला में बैठकर शनि से अष्टम भाव में होंगे वहीं शनि, सूर्य से छठे भाव में होंगे और षडाष्टक योग बनेगा। इस योग को वैदिक ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता।

सूर्योदय: सुबह 06:22 AM सूर्यास्त: शाम 05:51 PM राहुकाल: सुबह 10:40 AM से दोपहर 12:06 PM तक & 16 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और शुक्रवार का दिन है। षष्ठी तिथि शुक्रवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। 16 अक्टूबर को नवरात्रि का छठवां दिन है। शुक्रवार रात 10 बजकर 6 मिनट तक शोभन योग रहेगा। साथ ही 16 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा।
शुक्रवार का संबंध परंपरागत रूप से माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है। 16 अक्टूबर को शरद ऋतु है और सूर्य की वार्षिक गति से संबंधित पारंपरिक गणना के अनुसार दक्षिणायन चल रहा है।
- तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष षष्ठी (सुबह 05:54 AM, 17 अक्टूबर तक / संपूर्ण रात्रि प्रभावी)
- नक्षत्र: ज्येष्ठा (सुबह 06:47 AM तक, उपरांत मूल)
- करण: कौलव (दोपहर 04:38 PM तक), उपरांत तैतिल
- योग: शोभन (रात 10:05 PM तक, उपरांत अतिगण्ड)
- वार: शुक्रवार
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
- शक संवत: 1948 (पराभव)
- आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि- 16अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के शनिवार सुबह 5 बजकर 55 मिनट तक
- शोभन योग- 16 अक्टूबर को रात 10 बजकर 6 मिनट तक
- मूल नक्षत्र- 16 अक्टूबर को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक
- 16 अक्टूबर विशेष- नवरात्रि का छठवां दिन (षष्ठी पूजा)
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:55 ए एम से 05:44 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:19 ए एम से 06:33 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:47 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:15 पी एम से 06:40 पी एम
शुक्रवार को शारदीय नवरात्रि का छठवां दिन रहेगा, जिसे षष्ठी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण देवी मां को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। मां कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति को किसी प्रकार का भय या डर नहीं रहता और उसे किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता है।