29 अप्रैल 2026, बुधवार को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि (शाम 7:51 बजे तक) है। इस दिन प्रदोष व्रत, हस्त नक्षत्र, हर्षण योग और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे। मुख्य शुभ समय सुबह 10:47 से 12:24 (शुभ चौघड़िया) और राहुकाल दोपहर 12:19 से 1:57 बजे तक है। सूर्योदय सुबह 5:42 और सूर्यास्त शाम 6:54 पर हो & बुधवार है, इसलिए गणेश जी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR 9412932030
देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जहां एक ओर कई राज्यों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू होने वाला है, वहीं कुछ इलाकों में अभी भी लू और गर्म रातों का असर बना रहेगा। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को रखा जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू हो रही है और 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। प्रदोष व्रत हमेशा प्रदोष काल में किया जाता है, इसलिए जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि पड़ती है, उसी दिन व्रत रखा जाता है। इसी आधार पर अप्रैल माह का अंतिम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026, मंगलवार
भौम प्रदोष व्रत पर एक बेहद शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन त्रिपुष्कर योग सुबह 5 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों का तीन गुना फल मिलता है।
इसके साथ ही दिन में व्याघात योग भी रहेगा, जो रात 9 बजकर 4 मिनट तक प्रभावी रहेगा और उसके बाद हर्षण योग शुरू होगा। नक्षत्र की बात करें तो उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, फिर हस्त नक्षत्र का आरंभ होगा।
इस दिन सुबह से लेकर शाम 6 बजकर 51 मिनट तक शिववास कैलाश पर माना जाएगा। इसके बाद शिववास नंदी पर होगा। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है, क्योंकि यह समय शिव-शक्ति के मिलन का माना जाता है।

29 अप्रैल 2026, बुधवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि & यह दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित & यह दिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि (शाम 19:51 बजे तक) और बुधवार है। 27 अप्रैल 2026 को सूर्य देव भरणी नक्षत्र (शुक्र के आधिपत्य वाला नक्षत्र) में प्रवेश कर चुके हैं, जिसका प्रभाव 29 अप्रैल को भी रहेगा।
5 ग्रहों की बड़ी हलचल: ब्रह्मांड में इस समय एक बड़ी हलचल मची है। मीन राशि (गुरु की शरण और जल तत्व) में बुध, मंगल, शनि, चंद्र और नेपच्यून की जुगलबंदी चल रही है। हालांकि मंगल-शनि की भिड़ंत थोड़ी मानसिक खींचतान दे सकती है, लेकिन यह ‘कॉस्मिक रीयूनियन’ आध्यात्मिक और आर्थिक तरक्की के नए रास्ते खोल रहा है।
29 अप्रैल 2026 (बुधवार) को मुख्य रूप से प्रदोष व्रत (वैशाख शुक्ल त्रयोदशी) रहेगा। यह भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन त्रयोदशी तिथि शाम 07:51 बजे तक रहेगी। इसके अलावा, इस दिन को पंचांग के अनुसार व्रत और पूजा के लिए शुभ माना जाता है, जिसमें शाम को शिव पूजा की जाती है।
- तिथि: वैशाख शुक्ल त्रयोदशी (शाम 07:51 बजे तक)।
- दिन: बुधवार।
- नक्षत्र: हस्त (रात 12:16 बजे तक)।
- पक्ष: शुक्ल पक्ष।
- योग: हर्षण (रात 08:52 बजे तक)।
- दिशा शूल: उत्तर दिशा।
- सूर्योदय: सुबह 05:42।
- सूर्यास्त: शाम 06:54।
- चंद्रोदय: शाम 04:55।
- चंद्र राशि: कन्या।
- अमृत काल: सुबह 05:42 से सुबह 07:15 तक।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 07:51 से अगले दिन 05:42 तक।
- शुभ चौघड़िया: सुबह 10:47 से 12:24।
सुबह 09:21 के बाद चित्रा नक्षत्र शुरू होगा। इसके स्वामी ‘विश्वकर्मा’ हैं। यह नक्षत्र निर्माण कार्यों और नई कला सीखने के लिए बहुत अच्छा
श्री दुर्गा चालीसा : नमो नमो दुर्गे सुख करनी… दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्त पर प्रसन्न होती हैं और वे हर तरह के संकट दूर करती हैं।
दुर्गा चालीसा; प्रतिदिन अवश्य पढ़ें श्री दुर्गा चालीसा.
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥