8 जून 2026 (सोमवार) ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और शतभिषा नक्षत्र रहेगा。धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष है, क्योंकि इस दिन कालाष्टमी मनाई जाएगी & 8 जून, सोमवार को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर शतभिषा नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा। अभिजीत मुहूर्त- 11:56-12:44 & सूर्योदय का समय- 05:24 सूर्यास्त का समय- 19:16 BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR HIMALAYAUK & BAGLA MUKHI PEETH SADHK DEHRADUN Mob. 9412932030

लगभग 5000 साल पहले महाभारत युद्ध के समय भी गुरु 7 वर्षों तक अतिचारी रहे थे। यही स्थिति प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी देखी गई थी। हाल ही में 2018 से 2022 के बीच जब गुरु अतिचारी हुए, तो पूरी दुनिया ने ‘कोरोना’ जैसी वैश्विक विभीषिका और आर्थिक मंदी का सामना किया। अब वैसी ही स्थिति फिर से दस्तक दे रही है।

8 जून को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार का दिन है। अष्टमी तिथि सोमवार देर रात 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। इसके अलावा 8 जून को श्री शीतलाष्टमी व्रत है। 8 जून को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक विष्कुंभ योग रहेगा, उसके बाद प्रीति योग लग जायेगा। साथ ही सोमवार को सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा 8 जून को शाम 5 बजकर 42 मिनट पर शुक्र कर्क राशि में गोचर करेगा।
8 जून सितारों की चाल और ग्रहों की स्थिति को देखें तो आज का दिन रणनीति और काम के बीच सही तालमेल बिठाने का एक बड़ा अवसर लेकर आया है।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार देवगुरु बृहस्पति की उत्पत्ति महर्षि अंगिरा और उनकी पत्नी स्मृति (या सुरूपा) के यहां पुत्र के रूप में हुई थी। वे परमपिता ब्रह्मा के मानस पुत्र महर्षि अंगिरा के वंशज और देवताओं के सर्वोच्च ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं। महर्षि अंगिरा को जब काफी समय तक कोई संतान नहीं हुई, तब उन्होंने और उनकी पत्नी ने मिलकर ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उन्हें ‘पुंसवन’ व्रत करने का आशीर्वाद दिया, जिसके फलस्वरूप उन्हें तीन तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुए – संवर्त, उतथ्य और जीव (जिन्हें आगे चलकर देवगुरु बृहस्पति कहा गया) बचपन से ही मेधावी और शांत स्वभाव वाले ‘जीव’ ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी इस कठिन परीक्षा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ज्ञान, बुद्धि और देवताओं के सर्वोच्च गुरु (देवगुरु) का पद प्रदान किया। सामान्य गोचर ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार बृहस्पति एक राशि में लगभग 12 महीने यानी लगभग एक वर्ष रहते हैं, परंतु अतिचारी गति के कारण कर्क राशि में 2 जून के प्रवेश के बाद बृहस्पति 31 अक्तूबर 2026 को कर्क राशि को छोड़कर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

2026 में बृहस्पति का मिथुन, कर्क और सिंह, तीन राशियों में गोचर बहुत लोगों का भाग्य बदल देगा, 12 राशियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। गोचर में बृहस्पति देवता जब किसी की जन्म राशि से चतुर्थ, अष्टम एवं द्वादश भाव में गोचर करते हैं, तो वह समय उसे व्यक्ति के लिए कष्टप्रद होता है। वैदिक ज्योतिष में अतिचारी चाल का अर्थ है कि बहुत तेज चलना और गुरु आने वाले 8 वर्षों का यानी 2032 तक अतिचारी चाल चलने वाले हैं।
गुरु एक साल में तीन बार राशि बदलने वाले हैं। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, और अर्थव्यवस्था का कारक माना जाता है। जब बृहस्पति अतिचारी (सामान्य से तेज गति) होते हैं, तो वे अपनी शुभता खोकर देश-दुनिया में तेजी से बड़े, अप्रत्याशित और उथल-पुथल भरे बदलाव लाते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, मौसम और शासन-व्यवस्था पर पड़ता है। विश्व स्तर पर सत्तातंत्र (राजाओं और राजनेताओं) पर दबाव बढ़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति का संतुलन बदलता है और आंतरिक कलह या जन-विद्रोह की स्थिति बन सकती है। चिकित्सा क्षेत्र में कुछ अजीबोगरीब बीमारियों का प्रकोप देखने को मिल सकता है, हालांकि इसके समाधान और नई दवाओं के आविष्कार भी तेज़ी से होंगे। गुरु चूंकि जीवन और शीतलता के कारक हैं, उनकी बिगड़ी चाल बड़े पैमाने पर जलवायु परिवर्तन लाएगी। कर्क राशि (जल तत्व) में उनकी स्थिति विनाशकारी बाढ़, समुद्री तूफान और जल संकट का कारण बन सकती है।

हर विनाश अपने साथ सृजन भी लाता है। जैसे महाभारत के बीच ‘गीता’ का जन्म हुआ, वैसे ही इस कठिन समय में आध्यात्मिक जागृति और विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोजें भी होंगी।
जून महीने का दूसरा सोमवार है और पूरे दिन द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी. कल सुबह 09:10 तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा और इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी. चंद्रमा कल पूरे दिन कुंभ राशि में संचार करेंगे, जहां राहु के साथ उनकी युति होने से चंद्रमा-राहु का ग्रहण दोष भी लगा रहेगा. इसके अलावा, कल शाम 05:43 पर सुख और ऐश्वर्य के दाता शुक्र देव कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जिसका बड़ा असर सभी राशियों पर पड़ेगा.
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कल आकाश मंडल में वाशि योग, आनन्दादि योग, सुनफा योग और शंख योग के साथ विष्कुम्भ योग का प्रभाव रहेगा. वहीं, यदि आपकी राशि मेष, कर्क, तुला या मकर है, तो आपको रूचक व हंस योग का सपोर्ट मिलेगा, जबकि मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए भद्र राजयोग का सीधा असर दिखाई देगा.