3 अक्टूबर 2026 जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया व्रत) महालक्ष्मी व्रत पूर्ण कालाष्टमी एवं अष्टमी श्राद्ध & बगलामुखी पीठ के संस्थापक साधक प्रेस क्लब हरिद्वार में उपलब्ध & शुक्र ग्रह वक्री, विशेष अचूक ज्योतिषीय उपाय

3 अक्टूबर 2026 & आश्विन कृष्ण पक्ष सप्तमी (प्रातः 07:59 AM तक), इसके पश्चात अष्टमी तिथि। & आर्द्रा (अगली सुबह 01:29 AM तक), इसके पश्चात पुनर्वसु। & योग: वरियान (दोपहर 03:20 PM तक), इसके पश्चात परिघ योग & सूर्योदय: सुबह 06:15 AM सूर्यास्त: शाम 06:05 PM & अशुभ समय (राहुकाल): सुबह 09:12 AM से 10:41 AM तक व्रत और त्यौहार जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया व्रत) महालक्ष्मी व्रत पूर्ण कालाष्टमी एवं अष्टमी श्राद्ध & बगला मुखी पीठ के संस्थापक साधक प्रेस क्लब हरिद्वार में उपलब्ध & पितरों की मुक्ति और शांति के लिए जरूर सुनें इंदिरा एकादशी की व्रत कथा

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अचूक उपाय: प्रतिदिन श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और गणेश जी को दूर्वा (घास) अर्पित करें, जिससे विघ्न-बाधाएं दूर &  3 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट शुक्र देव अपनी स्वराशि तुला में उल्टी चाल यानी वक्री शुक्र लगभग 42 दिनों तक (14 नवंबर 2026 तक) इसी अवस्था में   & 4 राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस 42 दिनों की अवधि में बेहद सावधान रहने की आवश्यकता

3 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि और शनिवार का दिन है। सप्तमी तिथि शनिवार को सुबह 8 बजे तक रहेगी, उसके बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी। 3 अक्टूबर  को अष्टमी तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा। साथ ही 3 अक्टूबर को जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत भी किया जाएगा। शनिवार को दोपहर बाद 3 बजकर 22 मिनट तक वरियान योग रहेगा। साथ ही 3 अक्टूबर को देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक आर्द्रा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा शनिवार सोलह दिवसीय माता महालक्ष्मी व्रत संपूर्ण होगा।  सूर्योदय- सुबह 06:14 बजे  सूर्यास्त- शाम 06:04 बजे

  • आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि – 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 8 बजे तक रहेगी, उसके बाद आष्टमी तिथि लग जाएगी
  •  वरियान योग- 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर बाद 3 बजकर 22 मिनट तक
  • आर्द्रा नक्षत्र- 3 अक्टूबर को  देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक 
  • 3 अक्टूबर 2026 विशेष- अष्टमी तिथि श्राद्ध,  16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत समापन, जितिया  (जीवित्पुत्रिका)  व्रत 
  • कुतुप मुहूर्त- 12:04 पी एम से 12:51 पी एम
  • रौहिण मूहूर्त- 12:51 पी एम से 01:39 पी एम
  • अपराह्न काल- 01:39 पी एम से 04:02 पी एम
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:53 ए एम से 05:41 ए एम
  • प्रातः संध्या-05:17 ए एम से 06:29 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:04 पी एम से 12:51 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:27 पी एम से 03:14 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:25 पी एम से 06:49 पी एम
  • सायाह्न संध्या- 06:25 पी एम से 07:38 पी एम
  • अमृत काल- 04:05 पी एम से 05:35 पी एम

शनिवार को जितिया का व्रत किया जाएगा। इसे जीवित्पुत्रिका या जीउतिया के नाम से भी जाना जाता है।  महिलाएं अपनी संतान की रक्षा और उनकी मंगलकामना के लिए जितिया का व्रत करती हैं। साथ ही संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं।

शुक्र की वक्री चाल के दौरान आपके भाई-बहनों या सहकर्मियों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आ सकता है. बिना सोचे-समझे किसी भी प्रकार की फिजूलखर्ची या लग्जर वस्तुओं की खरीदारी से बचें. कार्यक्षेत्र में अपनी भाषा पर संयम रखें, क्योंकि आपकी बातें दूसरों को चुभ सकती हैं. सफेद मिष्ठान का भोग लगाएं. प्रतिदिन ‘ऊं शुं शुक्राय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें. शुक्रवार के दिन चावल, दूध, दही, मिश्री या सफेद वस्त्रों का दान

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