31 अगस्त 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया-चतुर्थी तिथि और सोमवार & तिथि: भाद्रपद कृष्ण तृतीया (सुबह 08:52 AM तक, उसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ) नक्षत्र: रेवती (देर रात 03:24 AM तक) सूर्योदय: सुबह 05:58 AM सूर्यास्त: शाम 06:43 PM राहुकाल: सुबह 07:34 AM से 09:10 AM तक & सोमवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक तृतीया रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। सोमवार के दिन कजरी तीज के व्रत के साथ ही संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा। & बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & BAGLA MUKHI PEETH

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच फंसे कैलाश तीर्थयात्रियों ने सुरक्षित बचने के बाद एक अनोखा दावा किया है। पानी के भयानक बहाव और जानलेवा खतरे से सुरक्षित निकलने के बाद, इन यात्रियों ने पास की एक पहाड़ी पर एक खास आकृति देखी। यात्रियों के अनुसार, यह आकृति बिल्कुल भगवान शिव के चेहरे जैसी लग रही थी। उनका मानना है कि इस भयानक प्राकृतिक आपदा के बीच स्वयं भगवान शिव ने आकर उनकी जान बचाई है। मौत के मुंह से वापस लौटे इन श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य केवल एक संयोग नहीं, बल्कि संकट की इस भयानक घड़ी में उनके गहरे विश्वास और अटूट आस्था का प्रतीक बन गया है।

गणेश जी के मंत्रों का जप करके भी शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं। आध्यात्मिक ऊर्जा को रिचार्ज ; आध्यात्मिक ऊर्जा – Spiritual Energy हमारे अंदर ही होती है लेकिन जब तक इसे रिचार्ज ना करो यह एक्टिवेट नहीं होती। कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप इस आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर सकते हैं। बगला मुखी पीठ बंजारा वाला देहरादून में इसको अनुभव कर सकते हैं,, प्रस्तुत वीडियो इसका साक्षात उदाहरण है,, जहाँ शिवलिंग जाग्रत है: चन्द्रशेखर जोशी
सोमवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक तृतीया रहेगी और उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। आज संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी & ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम विजय मुहूर्त- 02:44 पी एम से 03:34 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 06:54 पी एम से 07:17 पी एम सायाह्न सन्ध्या- 06:54 पी एम से 08:03 पी एम
- भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि- 31 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी
- पूर्वा रेवती नक्षत्र- 31 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 24 मिनट तक
- 29 अगस्त 2026 विशेष- आज पंचक है। इसके साथ ही संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी और कजरी तीज का व्रत भी आज रखा जाएगा।
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। इसीलिए सोमवार को यह व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से और गणेश जी की पूजा करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं। तृतीया तिथि सोमवार को सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक ही रहेगी, उसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जायेगी, जो कि मंगलवार सुबह 7 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। यानि कि- चतुर्थी तिथि में चन्द्रोदय सोमवार को ही होगा इस व्रत का पारण चन्द्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है, लिहाजा संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत सोमवार को ही किया जायेगा। चन्द्रोदय सोमवार की रात 8 बजकर 25 मिनट पर होगा।
आध्यात्मिक ऊर्जा – बहुत जरूरी : Spiritual Energy हमारे अंदर ही होती है लेकिन जब तक इसे रिचार्ज ना करो यह एक्टिवेट नहीं होती। कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप इस आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर सकते हैं। By Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & संस्थापक अध्यक्ष बगला मुखी पीठ: आध्यात्मिक ऊर्जा आपके शरीर से निकलती है और आपके औरा यानि आभामंडल को मजबूत बनाती है। आपने कई बार अपने अंदर या किसी दूसरे के अंदर इस आभामंडल को देखा होगा। कई बार आपने सोचा ..
पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से : पूर्वजों का श्राद्ध जिस भी तिथि को हुआ है उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए। यानि प्रतिपदा को मृत्यु हुई है तो प्रतिपदा के दिन, द्वितीया को हुई है तो द्वितीया के दिन और इसी तरह तिथि के अनुसार ही श्राद्ध किया जाना सही माना जाता है। वहीं मातृ पितरों को प्रसन्न करने के लिए नवमी का श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। इसलिए नवमी तिथि को मातृ नवमी के नाम से भी जाना जााता है। जिन लोगों की मृत्यु की तारीख ज्ञात न हो उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है। माना जाता है कि सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध करने से आपके सभी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा आपको बता दें कि साल 2026 में चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 30 सितंबर को है। इसलिए जिन लोगों के पितृ की मृत्यु चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुई है उन्हें 30 सितंबर को ही श्राद्ध करना चाहिए।
सितंबर 2 तारीख को शनि-शुक्र का षडाष्टक योग बनेगा। इस योग के चलते कुछ राशियों को करियर और सेहत से जुड़े मामलों में सतर्कता

शुक्र ग्रह 2 सितंबर को कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में मीन राशि में बैठे शनि के साथ शुक्र षडाष्टक योग बनाएंगे जिसे ज्योतिष में शुभ योग नहीं माना जाता। षडाष्टक योग के चलते मेष और वृश्चिक सहित 3 राशियों को जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। सेहत को लेकर भी इन राशियों को सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी। आपको बता दें कि षडाष्टक योग में शनि ग्रह की स्थिति शुक्र के छठे भाव में होगी जबकि शुक्र ग्रर शनि से अष्टम भाव में रहेंगे।