5 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, विघ्न-बाधा होगा दूर गुरुवार, 5 फरवरी 2026 धार्मिक, ज्योतिषीय और मुहूर्त की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण

गुरुवार, 5 फरवरी 2026 धार्मिक, ज्योतिषीय और मुहूर्त की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण & व्रत / दिवस विशेष – चतुर्थी व्रत, चंद्रोदय जयपुर में रात्रि 9-41, CALL US; CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 94129320230

5 February 2026 Ka Panchang5 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और गुरुवार का दिन है। चतुर्थी तिथि गुरुवार रात 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। 5 फरवरी को रात 12 बजकर 4 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। साथ ही गुरुवार रात 10 बजकर 58 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।  मंदिर की सफाई कर लें। चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा का पूजन करें और उन्हें अर्घ्य एवं नैवेद्य आदि अर्पित करें।

5 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और गुरुवार का दिन है। चतुर्थी तिथि गुरुवार रात 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। 5 फरवरी को रात 12 बजकर 4 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। साथ ही गुरुवार रात 10 बजकर 58 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 5 फरवरी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत है।

 5 जनवरी 2026 को पुष्य नक्षत्र के कारण यह दिन खरीदारी और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। इस दिन विशेष रूप से सिद्ध योग भी बन रहा है।  फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि- 5 फरवरी 2026 को चतुर्थी तिथि आज रात 12 बजकर 23 मिनट तक

 सुकर्मा योग-  5 फरवरी 2026 को  रात 12 बजकर 4 मिनट तक & उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र- 5 फरवरी 2026 को  रात 10 बजकर 58 मिनट तक & 5 फरवरी 2026 व्रत-त्यौहार-  संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत

चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश के निम्मित व्रत रख रात को चंद्रोदय के समय व्रत का पारण किया जाता है।  प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा का विधान है। बस फर्क केवल इतना है कि कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत करता है, उसके जीवन में चल रही सभी समस्याओं का समाधान निकलता है और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। रात चंद्रोदय रात 9 बजकर 35 मिनट पर होगा।

महाशिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है और इस बार ये तिथि 15 फरवरी 2026 को पड़ रही है। इस महाशिवरात्रि पर कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं  & साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग, बुधादित्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग रहेगा जो विशेष रूप से मेष, कन्या और कुंभ राशि वालों के लिए लाभकारी साबित 

कन्या राशि वालों के लिए भी महाशिवरात्रि पर बनने वाले दुर्लभ संयोग शुभ साबित होंगे। करियर में सुनहरी सफलता मिलेगी। आमदनी में बढ़ोतरी होगी। नए काम की शुरुआत करेंगे। अचानक से धन की प्राप्ति के योग बन रहे हैं। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होगी। बिजनेस में आपको बढ़िया डील मिल सकती है।

पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए गणेश रुद्राक्ष रामबाण माना जाता है। इसे बुधवार के दिन धारण करना चाहिए।

मां सरस्वती की आरती के नियमित करने से विद्यार्थियों, शिक्षकों, गायन, कला और साहित्य से जुड़े लोगों को खास लाभ मिलता है।  मां सरस्वती की आरती न केवल मन को शांति देती है, बल्कि जीवन की अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का प्रकाश भरती है। खासकर विद्यार्थियों, गायकों, लेखन, कला और साहित्य से जुड़े लोगों को इसका विशेष लाभ मिलता है।  सद्गुणों और वैभव की प्राप्ति: आरती बताती है कि मां सरस्वती ‘सद्गुण वैभव शालिनी’ हैं। इसके नियमित गान से व्यक्ति के चरित्र में सद्गुणों का विकास होता है और जीवन में ऐश्वर्य (Opulence) मिलता है।

अज्ञानता के अंधकार का नाश: ‘मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो’ पंक्ति बताती है कि माता मन के भीतर बसे अज्ञान और मोह रूपी अंधकार को दूर कर विवेक और ज्ञान की रोशनी देती है।

विद्या और बुद्धि का वरदान: मां सरस्वती विद्या की देवी हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, नियमित आरती करने से स्मरण शक्ति (Memomry Power) बढ़ती है और विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

एकाग्रता और मानसिक शांति: ‘चंद्रवदनि’ मां की आरती करने से मन को शीतलता मिलती है, जिससे छात्रों, गायकों और साधकों की एकाग्रता (Focus) में बढ़ती है।

कल्याण और मंगलकारी प्रभाव: मां शारदे को ‘ध्रुति मंगलकारी’ कहा गया है। उनकी स्तुति से जीवन में मंगल का आगमन होता है और अमंगलकारी शक्तियां खत्म हो जाती हैं।

मोक्ष और उद्धार की प्राप्ति: आरती में साफ कहा गया है, जो भी मां की शरण में आता है, उसका उद्धार सुनिश्चित है। यह आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

सुख और भक्ति का संचार: जो जन यह आरती गाते हैं, वे ‘हितकारी, सुखकारी ज्ञान भक्ती’ पाते हैं, जिससे जीवन आनंदमय और चिंतामुक्त बनता है।

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

जय…चंद्रवदनि पद्मासिनी, ध्रुति मंगलकारी।
सोहें शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥ जय…

बाएं कर में वीणा, दाएं कर में माला।
शीश मुकुट मणी सोहें, गल मोतियन माला ॥ जय…..

देवी शरण जो आएं, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥ जय…..

विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह, अज्ञान, तिमिर का जग से नाश करो ॥ जय…..

धूप, दीप, फल, मेवा मां स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥ जय…..

मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावें।
हितकारी, सुखकारी, ज्ञान भक्ती पावें ॥ जय…..

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्‍गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय…

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