7  सितंबर 26 सोमवार  भाद्रपद कृष्ण पक्ष अन्नदा एकादशी तिथि; राजा हरिश्चंद्र की कथा जरूर सुनें. खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त & ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ सबसे प्रमुख और शक्तिशाली मंत्र &  पूजा बैठ,आरती खड़े होकर &भौम प्रदोष 8 सितंबर 

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH BANJARAWALA DEHRADUN Mob. 9412932030

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 08 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 9 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी। ऐसे में प्रदोष काल 8 सितंबर को पड़ेगा और इस दिन व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष काल 8 सितंबर है।  अजा एकादशी को अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है।

एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास : एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी आती है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अजा एकादशी के दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान का विशेष महत्व 

मान्यता है कि एकादशी के दिन तुलसी माता व्रत रखती हैं, इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। & अपने मन को शांत रखने, भगवान विष्णु का नाम जपने और धार्मिक कार्यों में समय बिताने का प्रयास  & भगवान विष्णु का ध्यान, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भजन-कीर्तन करना शुभ 

मान्यता है कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने इसी व्रत के प्रभाव से अपना खोया हुआ वैभव और राज्य पुनः प्राप्त किया था & समस्त ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि

अजा एकादशी के दिन भद्रा और पंचक का साया नहीं रहेगा. हालांकि, इस दिन राहुकाल के समय पूजा या किसी शुभ कार्य को करने से बचने की सलाह दी जाती है.

  • भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि- 7 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक
  • वरियान योग- 7 सितंबर 2026 को  देर रात 3 बजकर 38 मिनट तक
  • पुनर्वसु नक्षत्र-  7  सितंबर 2026 को शाम 6 बजकर 14 मिनट तक
  • बुध गोचर- 7 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 34 मिनट पर
  • 7  सितंबर 2026 विशेष- अजा एकादशी व्रत
  • एकादशी तिथि प्रारंभ – सितंबर 06, 2026 को 07:29 पी एम बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – सितंबर 07, 2026 को 05:03 पी एम बजे
  • अजा एकादशी पारण तारीख- 8 सितंबर 2026
  • अजा एकादशी पारण(व्रत तोड़ने का) समय – 06:25 ए एम से 08:53 ए एम
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 02:42 पी एम

सोमवार को दोपहर 1 बजकर 34 मिनट पर बुध कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और 26 सितंबर की दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक यहीं पर गोचर करते रहेंगे, उसके बाद तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे। भारतीय ज्योतिष के अनुसार बुध, मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। लिहाजा बुध अपनी स्वयं की राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जिसका सीधा असर बाकी राशियों पर भी पड़ेगा। आपको बता दें कि बुध ज्योतिष विद्या, शिल्प, कम्प्यूटर, वाणिज्य और चतुर्थ और दशम स्थान के कारक है। ये बुद्धि और वाणी के देवता हैं। इनका सीधा प्रभाव दिमाग से मेहनत वाले कार्यों पर पड़ता है और शरीर में मुख्य रूप से गले और कन्धों पर इसका प्रभाव रहता है।

 पूजा करते समय बैठना क्यों जरूरी माना जाता है और आरती खड़े होकर क्यों  Vसिर ढंकना भगवान के प्रति सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित पूजा-पाठ करते समय व्यक्ति को आसन पर बैठकर ही भगवान का ध्यान और आराधना करनी चाहिए। इससे शरीर स्थिर रहता है और मन को एकाग्र करने में आसानी होती है। इसके विपरीत, खड़े रहने की स्थिति में शरीर में अस्थिरता बनी रह सकती है, जिससे पूजा के दौरान ध्यान भटकने की संभावना रहती है। इसलिए विधिपूर्वक पूजा करते समय बैठने की परंपरा है।

आरती हमेशा खड़े होकर

पूजा और आरती के नियमों में अंतर है। भगवान की आरती के समय भक्त अपने स्थान पर खड़े होकर श्रद्धा के साथ भगवान की आराधना करते हैं। वहीं पूजा के अन्य मंत्र, ध्यान और साधना से जुड़े कर्म आसन पर बैठकर करने की परंपरा है।

भौम प्रदोष व्रत  8 सितंबर को भगवान शिव की पूजा का समय 6 बजकर 35 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसमें भवगान शिव का गंगाजल, दूध, बेलपत्र, फल-फूल और बेलपत्र से अभिषेक करें ऊं नम: शिवाय मंत्रों का जाप करें। इस दिन ब्रह्रामुहूर्त सुबह 4 बजकर 31 मिनट से लेकर 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा और निशिता काल रात 11 बजकर 56 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा

अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के समय आप राजा हरिश्चंद्र की कथा जरूर सुनें. इससे आपके कष्ट और दुख दूर होंगे, जीवन के अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होगी. इस व्रत का पारण 8 सितंबर को होगा.

युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण जी से भाद्रपद कृष्ण एकादशी व्रत की विधि अैर महत्व के बारे में बताने का निवेदन किया. इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण एकादशी अजा एकादशी नाम से प्रसिद्ध है. इसकी कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है.

एक समय धरती पर च​क्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र का शासन था. किसी वजह से उनका राजपाट चला गया. ऐसी स्थिति बन गई कि पत्नी, बेटे और स्वयं को भी बेचना पड़ गया. राजा हरिश्चंद्र को एक चांडाल ने खरीदा. वे उसके यहां काम करते थे. राजा हरिश्चंद्र उसके सभी आदेश का पालन करते थे. मृतकों के वस्त्र लेते थे. राजा हरिश्चंद्र हमेशा सत्य के मार्ग पर चलते रहे. जब वे एकांत में होते, तो अपनी पत्नी और पुत्र के दुखों के बारे में सोचते. उनसे मुक्ति का मार्ग सोचते रह​ते थे. वे वह उपाय जानना चाहते थे, जिससे उनके कष्ट दूर हो जाएं और उनका उद्धार हो जाए.

राजा हरिश्चंद्र ने काफी समय तक ऐसे ही समय व्यतीत किया. एक दिन वह उदास और चिंतित बैठे थे, तभी वहां गौतम ऋषि आए. राजा हरिश्चंद्र ने उनको प्रणाम किया. फिर अपने दुखों से मुक्ति का मार्ग पूछा.

गौतम ऋषि ने कहा कि हे राजन! तुम बहुत ही भाग्यशाली हो. ठीक आज से 7 दिन बाद भाद्रपद कृष्ण एकादशी है. उस दिन तुम विधि विधान से व्रत रखो और भगवान विष्णु की पूजा करो. हरि कृपा से ही तुम्हारा कल्याण होगा , सभी दुख दूर होंगे. यह उपाय बताने के बाद गौतम ऋषि वहां से चले गए.

जिस दिन अजा एकादशी का व्रत था, उस दिन राजा हरिश्चंद्र ने ​विधि विधान से व्रत रखा. गौतम ऋषि की बताई विधि के अनुसार ही भगवान विष्णु की पूजा की, रात के समय जागरण किया. फिर अगली सुबह पारण करके व्रत को पूरा किया.

राजा हरिश्चंद्र पर भगवान विष्णु की कृपा हुई. उनके सारे पाप और कष्ट नष्ट हो गए. स्वर्ग से फूलों की वर्षा होने लगी. उनका मरा हुआ पुत्र दोबारा जीवित हो गया, उनकी पत्नी रानी के समान हो गई थीं. अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से ही राजा हरिश्चंद्र को खोया हुआ राजपाट और परिवार वापस मिल गया. मृत्यु के बाद राजा हरिश्चंद्र को स्वर्ग की प्राप्ति हुई.

जो व्यक्ति विधि विधान से अजा एकादशी का व्रत करता है, राजा हरिश्चंद्र की तरह ही उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाता है.

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