8 अक्टूबर 2026 आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी/चतुर्दशी तिथि और गुरुवार & मासिक शिवरात्रि & विक्रम संवत: 2083 मास: आश्विन पक्ष: कृष्ण पक्ष दिन: गुरुवार तिथि: त्रयोदशी (तदनंतर चतुर्दशी & सूर्योदय: सुबह 06:17 बजे सूर्यास्त: शाम 05:59 बजे & ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:53 AM से 05:42 AM प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:18 AM से 06:31 AM अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 PM से 12:50 PM & राहुकाल दोपहर के समय रहेगा (सामान्यतः 1:30 PM से 3:00 PM

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त्रयोदशी तिथि के श्राद्ध से घर में सुख-समृद्धि आती है और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की और किसी भी पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुई हो। बात करें मासिक शिवरात्रि व्रत की तो इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति का पारिवारिक और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। इसके साथ ही इस व्रत का पालन करने वाले लोगों को योग्य जीवनसाथी की भी प्राप्ति होती है। इस दिन जो लोग व्रत न ले पाएं उन्हें भगवान शिव की मंत्रों का जप करना चाहिए। ऐसा करने से भी शिव कृपा भक्तों को प्राप्त होती है।

दिल्ली के सरोजनी नगर में स्थिति श्री विनायक मंदिर से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यह मंदिर केवल दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि अन्य भक्तों के लिए खास है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है और गणपति जी के शरण में आने से व्यक्ति के जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए यह मंदिर लंबे समय से आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र रहा है। श्री विनायक मंदिर में सिद्धि-बुद्धि समेत कर्पगा विनायकर की उपासना दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार होती है।
गुरुवार के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा और साथ ही त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध & गुरुवार के दिन आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। गुरुवार के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी किया जाएगा और साथ ही त्रयोदशी तिथि को जो लोग दिवंगत हुए हैं उनका श्राद्ध भी होगा। इसके साथ ही गुरुवार के दिन शुक्ल योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र भी रहेगा। सूर्योदय- सुबह 06:17 बजे सूर्यास्त- शाम 05:59 बजे

सूर्य ग्रह 11 अक्टूबर को अपने मित्र मंगल के नक्षत्र चित्रा में गोचर कर जाएंगे। 24 अक्टूबर तक सूर्य इस नक्षत्र में संचार करते रहेंगे। सूर्य के चित्रा में प्रवेश करते ही कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव
- आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि- 8 अक्टूबर 2026 को रात 10 बजकर 17 मिनट तक
- शुक्ल योग- 8 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजकर 59 मिनट तक
- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र- 8 अक्टूबर को रात 9 बजकर 21 मिनट तक
- 8 अक्टूबर 2026 विशेष- त्रयोदशी तिथि श्राद्ध और मासिक शिवरात्रि व्रत
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:53 ए एम से 05:42 ए एम तक
- प्रातः सन्ध्या- 05:18 ए एम से 06:31 ए एम तक
- अभिजीत मुहूर्त- 12:02 पी एम से 12:50 पी एम तक
- विजय मुहूर्त- 02:24 पी एम से 03:12 पी एम तक
- गोधूलि मुहूर्त- 06:21 पी एम से 06:45 पी एम तक
- कुतुप मुहूर्त – 11:45 ए एम से 12:32 पी एम तक
दिल्ली श्रीविनायक मंदिर का इतिहास
दिल्ली में रहने वाले दक्षिण भारतीय समुदाय ने 1950 के दशक में महसूस किया कि राजधानी में भी एक मंदिर होना चाहिए, जिससे यहां रहने वाले भक्त अपने पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। इसके लिए दिल्ली के कुछ समाज-सेवियों और नागरिकों ने मिलकर ‘श्री विनायक मंदिर समिति’ बनाई। बाद में, 16 अप्रैल 1953 को इसे ‘रजिस्ट्रार ऑफ़ सोसाइटीज़, दिल्ली’ के पास रजिस्टर कराया गया। समिति का मुख्य काम दिल्ली में भगवान विनायक का मंदिर स्थापना करना था।
चंदे के पैसे से भगवान विनायक के लिए एक छोटा मंदिर बनाया गया, जिसमें ‘गर्भ-गृह’और उसके चारों ओर ‘प्राकारम’ (परिक्रमा पथ) था। कांची कामकोटि पीठम के जगद्गुरु पूज्य श्री परमाचार्य जी और श्रृंगेरी शारदा पीठम के जगद्गुरु श्री शंकराचार्य स्वामी जी के आशीर्वाद से, दक्षिण भारत के शिल्पकारों (स्थपतियों) द्वारा गढ़ी गई श्री सिद्धि बुद्धि समेत कर्पक विनायक की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा 24 अगस्त 1961 को तत्कालीन विनय नगर (जिसे अब सरोजिनी नगर के नाम से जाना जाता है) में की गई।
देश के विभिन्न भागों से आए अनेक भक्तों की उपस्थिति में पारंपरिक दक्षिण भारतीय शैली में कुंभाभिषेकम संपन्न किया गया। इस विनम्र शुरुआत के बाद से श्रद्धालु की अटूट भक्ति और सहयोग से यह मंदिर लगातार बढ़ता गया। बाद में मंदिर परिसर में उचित स्थानों पर भगवान हनुमान और नवग्रहों की मूर्तियां स्थापित की गईं। दैनिक पारंपरिक अभिषेकम और पूजा के अलावा महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष अभिषेक, होमम (हवन) और प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं जो दिल्ली के श्रद्धालु वर्ग को आकर्षित करती हैं।
स्थानीय भक्तों की इच्छा को पूरा करने के लिए जून 1983 में भगवान शिव के एक मंदिर की भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यहां नर्मदा नदी से लाए गए स्वयंभू शिवलिंग — ओंकारेश्वर को पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की नक्काशीदार मूर्तियों और नंदीकेश्वर के साथ स्थापित किया गया है।
बता दें किप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सार्वजनिक जीवन में अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर उन्होंने दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर पीएम मोदी ने देश की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा की और देश की समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
मिथुन राशि
सूर्य ग्रह वर्तमान में आपके चतुर्थ भाव में हैं और 17 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र में रहते हुए ही आपके पंचम भाव में भी गोचर करेंगे। इसलिए सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए काफी खास रह सकता है। आपको पारिवारिक जीवन में सुख, करियर में उन्नति और आर्थिक लाभ मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर इस राशि के कुछ लोग सरकारी नौकरी पा सकते हैं। जो लोग लंबे समय से नौकरी बदलने का विचार बना रहे थे उन्हें भी सफलता मिलने के योग हैं। निवेश किए गए धन से अच्छा रिटर्न इस राशि वालों को मिलने के योग हैं। छोटे भाई-बहनों के साथ अच्छा समय आप बिता सकते हैं।
सिंह राशि
सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन आपके लिए बेहद शुभ रहेगा क्योंकि सूर्य मित्र ग्रह मंगल के नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और सूर्य आपकी ही राशि के स्वामी हैं। सूर्य के नक्षत्र बदलने से आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि देखने को मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में इस राशि वालों को उन्नति मिलने के योग हैं। बेरोजगार लोगों को भी रोजगार मिल सकता है। जो लोग मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करते हैं उनको विदेश जाने का मौका मिल सकता है। आर्थिक रूप से भी आप संपन्न होंगे। सूर्य का गोचर आपकी सेहत में भी अच्छे बदलाव लेकर आ सकता है।
धनु राशि
धनु राशि के लोगों आपके लिए सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन बेहतरीन साबित हो सकता है। सूर्य आपके करियर क्षेत्र में चार चांद लगा सकते हैं। इस राशि के कुछ लोगों को उच्च पद प्राप्त हो सकता है वहीं कुछ लोग आमदनी में वृद्धि भी देख सकते हैं। मनचाही जगह पर तबादला मिलने के भी योग हैं। आपकी आर्थिक स्थिति भी सूर्य गोचर के बाद सुधर सकती है। कारोबारियों को मनचाही डील मिलने के योग हैं। सूर्य का यह गोचर स्वास्थ्य में भी अच्छे बदलाव लेकर आ सकता है।
पितृपक्ष की समाप्ति आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को होती है। इस दिन को पितृ अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन को बेहद खास माना गया है क्योंकि इस दिन श्राद्ध-तर्पण आदि करने से आप अपने सभी पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं। साल 2026 में 10 अक्टूबर के दिन सर्व पितृ अमावस्या है। इस दिन श्राद्ध-पिंडदान के साथ ही किन कार्यों को करने से आपको पितरों का आशीर्वाद मिल सकता है,