8 अप्रैल: वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार, धार्मिक रूप से क्यों खास? छोटे पुण्य कर्म भी बड़ा फल देते हैं, भगवान गणेश को दूर्वा (21 गांठ) और मोदक, हरी मूंग की दाल का दान, गाय को हरा चारा खिलाना, इलायची या थोड़ी सी सौंफ खाकर निकलें

8 अप्रैल 2026 एक खास दिन है, जिसमें बनने वाले शुभ योग और संयोग इसे सामान्य दिनों से अलग बनाते हैं। इस दिन के व्रत, त्योहार और शुभ समय आपके जीवन में सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।  भगवान विष्णु, शिव या अपने इष्ट देव का ध्यान करें और दिन की शुरुआत करें। वैशाख मास में जल दान, अन्न दान और गरीबों की सहायता करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है। मंदिर में दीप जलाकर पूजा-अर्चना करें। 8 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार ^  षष्ठी तिथि बुधवार शाम 7 बजकर 02 मिनट तक & आज के दिन हरी मूंग की दाल का दान करना या गाय को हरा चारा खिलाना अत्यंत शुभ फलदायी & इलायची या थोड़ी सी सौंफ खाकर निकलें

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI Mob. 9412932030

भगवान गणेश को दूर्वा (21 गांठ) और मोदक & आज दोपहर 02:51 पीएम तक मूल नक्षत्र रहेगा। यह गण्डमूल नक्षत्रों में से एक है, इसलिए इस समय में सावधानी बरतें। इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा जो शुभ कार्यों के लिए बेहतर है।

8 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। यह षष्ठी तिथि शाम 07 बजकर 01 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद नवमी तिथि & अभिजीत मुहूर्त-आज उपलब्ध नहीं है (बुधवार को यह मुहूर्त मान्य नहीं होता) विजय मुहूर्त 02:17 पीएम से 03:07 पीएम अमृत काल- 08:35 एएम से 10:10 एएम ब्रह्म मुहूर्त-04:24 एएम से 05:11 एएम राहुकाल (अशुभ समय)-12:21 पीएम से 01:56 पीएम यमगण्ड- 07:39 एएम से 09:13 एएम गुलिक काल-10:47 एएम से 12:21 पीएम

 8 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार का दिन है। षष्ठी तिथि बुधवार को शाम 7 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। 8 अप्रैल को शाम 5 बजकर 11 मिनट तक वरीयान योग रहेगा। साथ ही बुधवार को पूरा दिन पूरी रात पार करके गुरुवार सुबह 8 बजकर 49 मिनट तक मूल नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 8 अप्रैल को शाम 7 बजकर 2 मिनट से गुरुवार सुबह 8 बजकर 11 मिनट तक पाताल लोक की भद्रा 

बुधवार, 8 अप्रैल 2026 का पंचांग &  वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है, जिसमें मूल नक्षत्र और वरियान योग का संयोग बन रहा है & विक्रम संवत् – 2083
संवत्सर नाम – रौद्र
शक संवत् – 1948
हिजरी सन् – 1447
मु. मास – 19 सव्वाल
अयन – उत्तरायण
ऋतु – बसंत ऋतु
मास – वैशाख
पक्ष – कृष्ण

 8 अप्रैल 2026 को कौन-कौन से व्रत और पर्व हैं और यह दिन धार्मिक रूप से क्यों खास है? 8 अप्रैल 2026, बुधवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है (शाम 7:02 PM तक)। भले ही इस दिन कोई बड़ा त्योहार नहीं है, लेकिन वैशाख मास का हर दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन स्नान, दान और भगवान की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस दिन कोई प्रमुख व्रत या त्योहार नहीं है, लेकिन वैशाख मास में किए गए हर धार्मिक कार्य का विशेष महत्व होता है। इस महीने को धर्म, तप और पुण्य का महीना माना जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, गंगा स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।

  • शुभ मुहूर्त: 11:36 AM से 12:26 PM
  • राहुकाल: 12:01 PM से 1:35 PM
  • गुलिक काल: 10:27 AM से 12:01 PM
  • यमघण्ट काल: 7:18 AM से 8:52 AM
  • सूर्योदय: 5:43 AM
  • सूर्यास्त: 6:18 PM

8 अप्रैल 2026 का दिन भले ही किसी बड़े त्योहार से जुड़ा न हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। वैशाख मास के प्रभाव से इस दिन किए गए छोटे-छोटे पुण्य कर्म भी बड़ा फल देते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा, दान और अच्छे कर्म करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

  • वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि- 8 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजकर 02 मिनट तक
  • वरीयान योग- 8 अप्रैल को शाम 5 बजकर 11 मिनट तक
  • मूल नक्षत्र- 8 अप्रैल को पूरा दिन पूरी रात पार करके कल सुबह 8 बजकर 49 मिनट तक
  • पाताल लोक की भद्रा-  8 अप्रैल को शाम 7 बजकर 2 मिनट से गुरुवार सुबह 8 बजकर 11 मिनट तक

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार भद्रा अलग-अलग बारह चंद्र राशियों के अनुसार तीनों लोक- स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में घूमती रहती है। जिस दिन चन्द्रमा मेष, वृषभ, मिथुन और वृश्चिक राशि में होता है तब भद्रा का वास स्वर्ग लोक पर माना जाता है और जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में होता है तब भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर माना जाता है वही जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में होता है तब भद्रा का वास पाताल लोक में माना जाता। आज चन्द्रमा का वास धनु राशि में है तो इसलिए आज पाताल लोक की भद्रा रहेगी। पाताल लोक की भद्रा का वैसे तो कोई असर पृथ्वी पर नहीं पड़ता और अगर भद्रा सोमवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन पड़े, तो उसका कोई दोष नहीं लगता। लेकिन पाताल लोक की भद्रा के दौरान इस बात का ख्याल जरूर रखना चाहिए कि भद्रा के मुख काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।

वैशाख मास की मासिक शिवरात्रि वर्ष 2026 में 15 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 10 बजकर 31 मिनट पर प्रारंभ होगी और अगले दिन यानी 16 अप्रैल को शाम 8 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए निशिता काल के अनुसार व्रत और पूजा 15 अप्रैल की रात को ही करना अधिक शुभ माना जाता है।

  • एक तांबे के लोटे में जल लें, उसमें काले तिल मिलाएं और उससे शिवलिंग का अभिषेक करें। इस समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
  • यदि आप अपने घर में पारद शिवलिंग स्थापित करते हैं और इस दिन पूरी श्रद्धा से उसकी पूजा करते हैं, तो आपकी आय में वृद्धि होगी।
  • आटे से 11 शिवलिंग बनाना और उनका जल से अभिषेक करना भी एक विशेष उपाय है। कहा जाता है कि इस दिन मंत्रों का जाप करने से आपको संतान प्राप्ति में सहायता मिलती है।\
  • यदि किसी के विवाह में बाधाएं आ रही हैं, तो शिवलिंग का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करना और देवी पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग पर शुद्ध घी अर्पित करने के बाद उस पर जल चढ़ाने से संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
  • मासिक शिवरात्रि की शाम को, भगवान शिव को जल अर्पित करना चाहिए और”ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। 

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