23 अगस्त 2025; भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या की खौफनाक रात; नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होगी

23 August Ka Panchang: 23 अगस्त 2025 को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। अगस्त 23 शनिवार को राहु 09:19 AM से 10:54 AM तक  भाद्रपद कृष्ण पक्ष अमावस्या, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), श्रावण | अमावस्या तिथि 11:36 AM तक उपरांत प्रतिपदा | नक्षत्र मघा 12:54 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी |  चन्द्रोदय नहीं & अमावस्या – 11:35 ए एम तक & सूर्योदय का समय : 05: 55 ए एम

भाद्रपद अमावस्या, जानें किन उपायों को करने से दूर होंगी आपके जीवन की मुश्किलें 

अमावस्या की रात खौफनाक रात : 23 अगस्त, चंद्रमा लुप्त और नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होगी, सुनसान जगह पर ना जाएं. भाद्रपद अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार पितरों के नाम से अन्न-धन और वस्त्र निकाल कर दान करना चाहिए. पितरों के निमित्त किया जाना वाला यह दान किसी मंदिर के पुजारी को दान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. पितरों के निमित्त दान करते समय भूलकर भी अभिमान न करें

भाद्रपद अमावस्या तिथि 22 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 23 अगस्त, शनिवार को सुबह 11 बजकर 35 मिनट समाप्‍त होगी.

जब भाद्रपद मास में पड़ती है तो भाद्रपद अमावस्या या फिर पिठोरी अमावस्या कहलाती है. धर्म शास्त्र में भाद्रपद अमावस्या को पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध आदि से लेकर तमाम तरह के ज्योतिष और धार्मिक उपायों के लिए भी अत्यधिक फलदायी बताया गया है. 

सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाना भी लाभकारी होता है।

शिवलिंग का दूध के साथ अभिषेक भी अवश्य करें। ऐसा करने से जातक के जीवन से दुर्भाग्य दूर हो सकता है
काले वस्त्र, कंबल, काली उड़द, लोहे के बर्तन, काले तिल और सरसों का तेल दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। गरीब और जरूरतमंद को दान करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।

ऋषियों, देवताओं और पितरों के नाम से तीन-तीन अंजुली जल देना चाहिए। अगर ऐसा करना संभव न हो तो घर के अंदर खुले आसमान में पीतल के लोटे में जल भरकर इस उपाय को कर सकते हैं। ऐसा करने से पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है
अन्न और वस्त्र दान करने चाहिए

शनि अमावस्या के दिन शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से पीड़ित राशियों को अपनी सामर्थ्यनुसार उड़द की दाल, काले तिल, काला कंबल व काले वस्त्र दान करने चाहिए।

आज है भाद्रपद अमावस्या, जानें किन उपायों को करने से दूर होंगी आपके जीवन की मुश्किलें 

आज है भाद्रपद अमावस्या, जानें किन उपायों को करने से दूर होंगी आपके जीवन की मुश्किलें 

भाद्रपद अमावस्या (Pithori amavasya 2025) के सरल सनातनी उपाय

Bhadrapad Amavasya 2025 ke upay: हिंदू धर्म में प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली अमावस्या का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. यह जब भाद्रपद मास में पड़ती है तो भाद्रपद अमावस्या या फिर पिठोरी अमावस्या कहलाती है. धर्म शास्त्र में भाद्रपद अमावस्या को पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध आदि से लेकर तमाम तरह के ज्योतिष और धार्मिक उपायों के लिए भी अत्यधिक फलदायी बताया गया है. आइए जानते हैं कि भाद्रपद अमावस्या के दिन आखिर किन उपायों को करके आप पितरों का आशीर्वाद और अपनी मनोकामनाओं को पूरा कर सकते हैं. 

नदी और समुद्र तीर्थ पर करें स्नान 

भाद्रपद अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी, सरोवर या समुद्र आदि में जाकर स्नान करने को अत्यधिक शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन नदी तीर्थ या समुद्र तीर्थ आदि पर जाकर स्नान करने और दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. 

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घर पर कुछ इस विधि से करें स्नान

यदि आप ​किसी कारण से नदी या समुद्र तीर्थ आदि स्थान पर न जा सकें तो आप अपने घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाएं और अमृतवाहिनी गंगा जी का ध्यान करते हुए स्नान करें. मन में ऐसा भाव लिए हुए स्नान करने पर आपको गंगा स्नान का पुण्यफल प्राप्त होगा. 

भाद्रपद अमावस्या का दान

भाद्रपद अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार पितरों के नाम से अन्न-धन और वस्त्र निकाल कर दान करना चाहिए. पितरों के निमित्त किया जाना वाला यह दान किसी मंदिर के पुजारी को दान करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. पितरों के निमित्त दान करते समय भूलकर भी अभिमान न करें. 

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पीपल की पूजा से पूरी होगी मनोकामना

हिंदू धर्म में वृक्षों को देवी-देवताओं के समान पवित्र और पूजनीय माना गया है. शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करने पर विशेष पुण्य प्राप्त होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ों में मीठा जल अर्पित करना चाहिए तथा सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए. मान्यता है कि इस उपाय को करने से त्रिदेव के साथ धन की देवी माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

शनि अमावस्या के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोषों का प्रभाव कम होता है।

पीपल का वृक्ष शनि देव का प्रिय माना जाता है। अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसकी पूजा करें। इससे शनि दोष का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।

इस दिन शनि मंदिर में जाकर काले तिल चढ़ाएं या घर पर शनि यंत्र पर अर्पित करें। सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाना भी लाभकारी होता है। इस दिन काले वस्त्र, कंबल, काली उड़द, लोहे के बर्तन, काले तिल और सरसों का तेल दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। गरीब और जरूरतमंद को दान करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।

 सामर्थ्य के अनुसार भोजन, वस्त्र, दवा, आदि का दान करना चाहिए. मान्यता है कि इस उपाय को करने से भविष्य में होने वाले तमाम तरह के कष्टों से बचाव होता है.

भाद्रपद अमावस्या का दिन किसी भी प्रकार के मंत्र जप, व्रत और साधना आदि के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन व्यक्ति को मंत्र सिद्धि के लिए विधि-विधान से पूजा एवं जप-तप करना चाहिए और इस दिन भूलकर भी शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए. 

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