16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो शाम 6:53 (या 8:11 PM) तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या शुरू होगी। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, इंद्र योग और विष्टि (भद्रा) करण का संयोग है। सूर्योदय 05:54 AM और सूर्यास्त 06:47 PM के बीच होगा। शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त 11:55 AM – 12:46 PM है। वैशाख अमावस्या पर पितर पृथ्वी के निकट होते हैं। इस दिन किया गया तर्पण उन्हें जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में राहु-केतु के कारण दोष है, उनके लिए इस दिन पूजा करना अत्यंत फलदायी है।
16 अप्रैल का दिन है और वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि & धर्म और विवाह के कारक ग्रह & 16 अप्रैल को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी & वैशाख अमावस्या का आरंभ: आज शाम 07:44 पीएम से अमावस्या तिथि लग रही है। पितृ तर्पण और दान के लिए यह समय अत्यंत शुभ है। 16 अप्रैल 2026, गुरुवार का आज का पंचांग आपके दिन की सही शुरुआत और योजना बनाने में सहायक है। आज वैशाख मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि है, जो रात्रि 8:12 तक रहेगी, इसके बाद अमावस्या प्रारंभ होगी। उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के प्रभाव में यह दिन विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है।

6 अप्रैल को वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और गुरुवार का दिन है। चतुर्दशी तिथि गुरुवार रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। 16 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक इंद्र योग रहेगा, उसके बाद वैधृति योग लग जाएगा। साथ ही गुरुवार दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र
रेवती नक्षत्र होने के कारण आज पूरा दिन गण्डमूल का प्रभाव रहेगा। इस नक्षत्र में जन्मे बच्चों की शांति पूजा भविष्य में आवश्यक होती है। गुरुवार का दिन लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। गुरुवार होने के कारण श्री हरि विष्णु-लक्ष्मी का पूजन करें और संभव हो तो पीले वस्त्रों का दान करें। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
वर्ष 2026 में यह अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। वैशाख अमावस्या को सतुआ अमावस्या या सातुवाई/ सातुवाई अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस दिन को पितरों की तृप्ति, कालसर्प दोष से मुक्ति और दान-पुण्य के लिए अक्षय फलदायी माना गया है।
पीपल में त्रिदेवों और पितरों का वास माना गया है। इस दिन सुबह पीपल के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध और काले तिल अर्पित करें। शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों से क्षमा प्रार्थना करें।
आने वाले समय की भविष्यवाणियां:
1. आसमान से लाल वर्षा होगी और समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कई तटीय शहर डूब जाएंगे।
2. धरती का तापमान बढ़ने से पहाड़ों से आग निकलेगी और आसमान में ‘दो सूरज’ जैसा दृश्य दिखाई देगा।
3. दिन में तारे नजर आएंगे, जिससे कुछ क्षेत्रों की जनसंख्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
4. उत्तर दिशा में कार्तिक द्वादशी के दिन चार चेहरों वाला तारा कई दिनों तक दिखाई देगा।
5, छह धर्म मिलकर एक हो जाएंगे और वेंकटेश्वर स्वामी का खजाना चोरी हो जाएगा।
6. तिरुपति बालाजी मंदिर की महिमा वैश्विक होगी और हर धर्म के लोग वहां दर्शन के लिए आएंगे।
7. ग्रंथ में ऐसी बीमारी का उल्लेख है, जिसमें मनुष्य के सिर से रक्त निकलेगा और उसकी तत्काल मृत्यु हो जाएगी।
8. कलियुग के 5 हजार वर्ष बीतने के बाद, अधर्म के अंत से पहले दुनिया को लगभग 108 वर्षों के लंबे संघर्ष और उथल-पुथल से गुजरना होगा।
9. जब शनि मीन और मेष राशि में गोचर करेगा, तब एक भीषण और निर्णायक युद्ध होगा।
10. ‘विश्ववसु’ नामक संवत्सर में भगवान कल्कि का अवतार होगा, जो दुष्टों का नाश करेंगे।
ब्रह्मेंद्र स्वामी के अनुयायी इन घटनाओं का समय मुख्य रूप से 2026 से 2030 के बीच मान रहे हैं, हालांकि समय का सटीक अनुमान लगाना कठिन है। कुछ लोग मानते हैं कि संवत्सर के अगले चक्र में यह घटित होगा।