योगी सरकार पर कई तरह के गंभीर आरोप & शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर काफी गंभीर आरोप लगाए. शंकराचार्य ने कहा कि अगर वर्तमान बीजेपी सरकार गाय और सनातन की बात करती तो विपक्ष को मौका नहीं मिलता. वहीं गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव जब तक पार्टी स्तर गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की घोषणा नहीं कर देते तब वे उनके साथ भी नहीं हैं.

HIMALAYAUK NEWS BUREAU MOB 9412932030

योगी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी &  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है. इतना ही नहीं इस मंच से योगी आदित्यनाथ के धुर विरोधी पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने खुलेमंच से आह्वाहन किया कि ब्राह्मण अब एकजुट हो जाए और अहंकारी व अधर्मी सनातन विरोधी सरकार के खिलाफ फरसा उठा कर सत्ता से इस बार उखाड़ फेंके. +

पीसीएस अधिकारी रहे अलंकार अग्निहोत्री ने भी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि ब्राह्मण जरूरत पड़ने पर फरसा भी उठा सकता है और अब ब्राह्मण सुदामा नहीं परशुराम है, अलंकार ने हर घर फरसा घर घर फरसा का नारा देकर ब्राह्मणों में जोश भरने का भी काम किया.+

अविमुक्तेश्वनंद ने कहा अगर आने वाले 2027 के चुनाव में कोई भी राजनैतिक दल गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की बात नहीं करेगी तो वे खुद अपना कोई आदमी चुनाव मैदान में उतार देंगे. शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ पशुओं को मारकर खा लिया गया, और यूपी सरकार इस पर रोक नहीं लगा सकी. कहा कि पहले के मुख्यमंत्री अगर गायों के मांस की बिक्री पर रोक नहीं लगाए तो इस बार योगी सरकार ने भी उस पर क्यों रोक नहीं लगाया, इसका मतलब इनकी इच्छा ही नहीं है कि गाय को कटने से रोका जाए.

वहीं, योगी आदित्यनाथ पर सवाल खड़ा करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक व्यक्ति दो पद कैसे संभाल सकता है, जब योगी आदित्यनाथ संत है वेतन लेकर कैसे उत्तर प्रदेश सरकार से वेतन लेकर इस पद का गलत तरीके से निर्वहन कर रहे है. उन्हें चाहिए दोनों में से एक पद को छोड़ दे मगर वे ऐसा नहीं कर रहे और खुद को योगी सन्यासी कहकर दोनों पद लेकर चल रहे जो मर्यादा के अनुकूल नहीं है.

उन्होंने कहा कि कोई भी शंकराचार्य पीएम सीएम या राष्ट्रपति का पद भी नहीं लेना चाहता क्यों कि उसका पद इन सबसे बड़ा होता है, कहा कोई भी संत सरकारी नहीं असरकारी होना चाहिए.

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