13 मई 2026, बुधवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी (अपरा/अचला एकादशी व्रत) सुबह 08:54 तक रहेगी, उसके बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (रात 08:36 तक) और विषुंभ योग रहेगा। सूर्योदय 05:32 AM और सूर्यास्त 07:04 PM पर होगा। 13 मई 2026 को अपरा (अचला) एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सुबह 08:54 बजे के बाद द्वादशी तिथि के देवता भगवान विष्णु की पूजा का विधान & एकादशी तिथि दिन 1.30 तक होगी तदुपरान्त द्वादशी तिथि होगी & अपरा एकादशी व्रत, भद्रकाली एकादशी (पंजाब), जलक्रीड़ा एकादशी (उड़ीसा), पंचक, गंडमूल प्रारंभ रात्रि 12-18 से, भगवान त्रिविक्रम विष्णुजी के वामन अवतार का विराट रूप है, जिन्होंने तीन पगों में स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक मापकर राजा बलि से तीनों लोकों को मुक्त कराया था। ज्येष्ठ माह (शुक्ल पक्ष) में त्रिविक्रम रूप की पूजा का विशेष विधान है, जिससे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य, पापों से मुक्ति और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR 9412932030
अपरा एकादशी को ‘भद्रकाली एकादशी’ के रूप में मनाया जाता है और इस दिन देवी भद्रा काली की पूजा करना शुभ & ज्येष्ठ महीने में भगवान विष्णु के त्रिविक्रम रूप की पूजा की जाती है। इस महीने भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। भगवान त्रिविक्रम की पूजा करने से दुश्मनों पर जीत मिलती है और दोष भी खत्म होते हैं।

निजी ज्योतिषी को मुख्यमंत्री OSD नियुक्त; तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय के निजी ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को राज्य सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। तमिलनाडु सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के पद पर तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया है। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति से जुड़ी शर्तें और नियम बाद में अलग से जारी किए जाएंगे। सरकारी आदेश में कहा गया, ‘थिरु रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी (राजनीतिक) के रूप में उनके कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से नियुक्त किया जाता है।’ राधन पंडित वेट्रिवेल वही ज्योतिषी हैं, जिन्होंने पहले ही विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी कि TVK की जीत की भविष्यवाणी की थी। चुनावी जीत के बाद अब उन्हें तमिलनाडु सरकार में अहम पद दिया गया है। राज्य की राजनीति में कई बड़े नेताओं से उनके करीबी संबंध और महत्वपूर्ण फैसलों पर उनके प्रभाव को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा कई बार सरकार बनाने का दावा खारिज किए जाने के बाद आखिरकार विजय को सरकार बनाने की मंजूरी मिली थी। शुरुआत में विजय ने 10 मई को दोपहर 3:45 बजे शपथ ग्रहण समारोह का समय तय किया था, लेकिन बाद में राधन पंडित की सलाह पर इसे बदलकर सुबह 10 बजे कर दिया गया। कहा जा रहा है कि विजय के राजनीतिक सफर के दौरान वेट्रिवेल लगातार उन्हें सलाह देते रहे हैं। अब विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद वेट्रिवेल की राजनीतिक और प्रशासनिक हैसियत भी बढ़ गई है। तमिलनाडु में राधन पंडित को एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषी माना जाता है। उन्होंने चुनाव से काफी पहले विजय की जीत का दावा किया था। सिर्फ विजय ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु की कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां भी राधन पंडित से सलाह लेती रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के बारे में भी कहा जाता है कि वह कई बड़े फैसले राधन पंडित से सलाह लेने के बाद ही करती थीं। राधन पंडित सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को ज्योतिषीय सलाह देते हैं। हालांकि, 4 दशक से ज्योतिष के क्षेत्र में सक्रिय राधन पंडित ने कभी खुद राजनीति में आने की कल्पना की थी या नहीं, यह साफ नहीं है।

13 मई को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और बुधवार का दिन है। एकादशी तिथि बुधवार को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। 13 मई को रात 8 बजकर 55 मिनट तक विष्कुम्भ योग रहेगा। साथ ही बुधवार रात 12 बजकर 18 मिनट तक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 13 मई को अपरा एकादशी का व्रत किया जाएगा।
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:37 ए एम से 05:21 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:37 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:04 पी एम से 07:26 पी एम
- अमृत काल- 07:41 पी एम से 09:13 पी एम
- सूर्योदय- सुबह 5:30 बजे
- सूर्यास्त- शाम 7: 03 बजे
सनातन धर्म में अपरा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो भी मनुष्य सच्चे मन से इस एकादशी का व्रत रखता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इतना ही नहीं ये एकादशी व्रत अपार धन और संसार में प्रसिद्धि भी दिलाता है। इस दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा की जाती है। कहते हैं जो फल गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने से प्राप्त होता है, वही अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।

अपरा एकादशी की कथा अनुसार प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था, जिसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा ही क्रूर था। वह अपने बड़े भाई से काफी चिड़ता था। द्वेष के कारण उसने एक रात्रि अपने भाई की हत्या कर दी और उसके शरीर को किसी पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ आया। अकाल मृत्यु होने के कारण राजा प्रेतात्मा के रूप में उसी पीपल पर रहने लगा और अनेक उत्पात मचाने लगा।
एक दिन धौम्य नामक ॠषि जब उधर से गुजरे रहे हैं तो उन्होंने प्रेत को देखा और अपने तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। ॠषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारा और उसे परलोक विद्या का उपदेश दिया। ॠषि बहुत दयालु थे, ऐसे में उन्होंने राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए स्वयं अपरा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा को अर्पित कर दिया। इस पुण्य के प्रभाव से राजा को प्रेत योनि से मुक्ति मिल गई। इसके बाद राजा ॠषि को धन्यवाद देता हुआ पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग को चला गया।
भगवान विष्णु की विशेष आराधना के लिए समर्पित अपरा एकादशी का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि जो भी यह व्रत रखता है उसको जीवन में अपार तरक्की मिलती है साथ ही मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। हिंदी में ‘अपार’ शब्द का अर्थ ‘असीमित’ है, क्योंकि इस व्रत को करने से व्यक्ति को असीमित धन की भी प्राप्ति होती है, इस कारण से ही इस एकादशी को ‘अपरा एकादशी’ कहा जाता है।
अपरा एकादशी का महत्व ब्रह्म पुराण में बताया गया है। अपरा एकादशी पूरे देश में पूरी प्रतिबद्धता के साथ मनाई जाती है। इसे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। पंजाब, जम्मू और कश्मीर और हरियाणा राज्य में, अपरा एकादशी को ‘भद्रकाली एकादशी’ के रूप में मनाया जाता है और इस दिन देवी भद्रा काली की पूजा करना शुभ माना जाता है। उड़ीसा में इसे ‘जलक्रीड़ा एकादशी’ के रूप में जाना जाता है और भगवान जगन्नाथ के सम्मान में मनाया जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन यदि आप व्रत रखते हैं तो प्रातः उठकर, स्नान से मुक्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर श्रीहरि विष्णु को केला, आम, पीले फूल, पीला चंदन, पीले वस्त्र चढ़ाएं और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। श्रीहरि को केसर का तिलक लगाएं और फिर स्वंय भी टीका करें। फिर विष्णु सहस्रनाम का पाठ जरूर करें और एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। यदि आप कथा करते या सुनते हैं तो आपको भगवान विष्णु को पंचामृत और आटे की पंजीरी का भोग जरूर लगाएं। साथ ही विष्णु जी को लगने वाले भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।+
ज्येष्ठ महीने में खासतौर से दोनों पक्ष की एकादशी और द्वादशियों पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से गोमेध यज्ञ का पुण्य मिलता है। पूरे महीने पूजा और जलदान करने से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है।
जलदान का महत्व जरूरतमंद लोगों को जल के साथ ही कपड़े, छाते, अन्न और धन का दान करना चाहिए। गौशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। मटके में पानी भरकर दान करें। सार्वजनिक जगह पर प्याऊ भी लगवा सकते हैं।

ज्येष्ठ महीने में भगवान विष्णु की पूजा 1. ज्येष्ठ मास में नहाने के बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते वक्त ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। 2. सूर्य पूजा के बाद घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें। 3. पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से भगवान का अभिषेक करें। इसके लिए शंख में केसर मिश्रित जल भरें और भगवान को चढ़ाएं। 4. इस महीने में ठंडे पानी से बाल गोपाल का अभिषेक करना चाहिए। 5. भगवान को चंदन लेप भी करना चाहिए। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप 108 बार करें। 6. भगवान विष्णु को माखन-मिश्री, मिठाई और केले का भोग लगाएं। नैवेद्य तुलसी के पत्तों के साथ लगाएं। 7. जो लोग इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें पूजा करने से पहले अन्न नहीं खाना चाहिए। 8. किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन करवाएं और धन दान करें। 9. सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। ध्यान रखें शाम के समय तुलसी को छूना नहीं चाहिए।