19 मई को (अधिक) ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और मंगलवार का दिन है। तृतीया तिथि मंगलवार को दोपहर 2 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। 19 मई को शाम 5 बजकर 49 मिनट तक धृति योग रहेगा। साथ ही मंगलवार को सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र लग जाएगा। 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल (बुढ़वा मंगल) मनाया जाएगा।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & SADHAK BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030
गजकेसरी योग ज्योतिष के शुभ योगों में से एक है। यह योग तब बनता है जब गुरु और चंद्रमा किसी राशि में एक साथ आ जाते हैं यानि युति बनाते हैं। 18 मई की रात को मिथुन राशि में चंद्रमा के गोचर के साथ ही गजलक्ष्मी योग बनेगा क्योंकि मिथुन राशि में गुरु पहले से ही विराजमान हैं। चंद्रमा का गोचर 18 मई की रात 10 बजकर 6 मिनट पर वृषभ से मिथुन राशि में होगा। मिथुन राशि & सिंह राशि & मीन राशि ; गजकेसरी योग का निर्माण आपकी राशि से चौथे भाव में होगा। इस भाव को सुख का भाव कहा जाता है। इसलिए गजकेसरी योग आपके जीवन में भी खुशियां लेकर आएगा। धन से जुड़ी आपकी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं। इसके साथ ही उधार दिया धन वापस मिलने से भी आपकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी। जो लोग जॉब में परिवर्तन करना चाहते हैं उनकी ख्वाहिश भी पूरी हो सकती है। कुछ लोगों को उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी अच्छे बदलाव आएंगे।

ज्योतिषीय दृष्टि से 18 मई का दिन बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन तीन शुभ ग्रह शुक्र, गुरु और चंद्रमा की युति मिथुन राशि में होगी। यह युति 18 मई की रात चंद्रमा के मिथुन राशि में गोचर के साथ बनेगी। इस युति के प्रभाव से कुछ राशियों को जीवन में बेहद शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

- आज (अधिक) ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि- 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 19 मिनट तक
- धृति योग- 19 मई 2026 को शाम 5 बजकर 49 मिनट तक
- मृगशिरा नक्षत्र-सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र लग जाएगा
- 19 मई 2026 विशेष- तीसरा बड़ा मंगल, बुढ़वा मंगल
- सूर्योदय- सुबह 5:26 बजे
- सूर्यास्त- शाम 7: 06 बजे
19 मई 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:35 ए एम से 05:19 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:09 पी एम से 01:01 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:46 पी एम से 03:38 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:06 पी एम से 07:28 पी एम
- अमृत काल- 09:14 पी एम से 10:40 पी एम

आकाशमंडल में 27 नक्षत्र स्थित हैं। इन्हीं 27 नक्षत्रों में से आर्द्रा छठा नक्षत्र माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भगवान शिव के रुद्र रूप को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति देवता माना जाता है। इसके अलावा आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और इसकी राशि मिथुन है। आर्द्रा नक्षत्र में जन्मे लोग बड़े ही कर्तव्यनिष्ठ, मेहनत करने वाले, सौंपे गए काम को पूरी ज़िम्मेदारी से निभाने वाले और जिज्ञासु होते हैं । इन्हें चीज़ों की खोज-बीन करना, जासूसी करना, दूर स्थान पर यात्रा करना पसंद होता है। ये लोग जन्म से ही जीनियस होते हैं।