6 जून 2026 शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव और संकटमोचन हनुमान जी की कृपा पाने के लिए परम फलदायी, 6 जून को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी है ..

6 जून 2026 (शनिवार) मास एवं पक्ष: ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष तिथि: षष्ठी (रात 02:40 तक, फिर सप्तमी) नक्षत्र: श्रवण (सुबह 06:03 तक, फिर धनिष्ठा) अभिजीत मुहूर्त: 11:52 AM से 12:48 PM तक राहुकाल: 08:51 AM से 10:36 AM तक & सूर्योदय: 05:23 AM सूर्यास्त: 07:17 PM & 6 जून को ज्येष्ठ माह (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN

6 जून 2026 (शनिवार)  शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव और संकटमोचन हनुमान जी की कृपा पाने के लिए परम फलदायी माना जाता है।  महीना: ज्येष्ठ अधिकमास (मलमास / पुरुषोत्तम मास) तिथि: षष्ठी तिथि- सुबह 05:43 तक (इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ, जो अगले दिन सूर्योदय से पहले समाप्त होगी)

यह ज्येष्ठ अधिकमास का शनिवार है, इसलिए आज शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं और पीपल की सात परिक्रमा करें। इसके साथ ही हनुमान जी के मंदिर जाकर हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। इस उपाय से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के सभी कष्ट दूर होते हैं।

क्यों बढ़ रही हैं आग की घटनाएं ? वर्तमान में विक्रम संवत 2083 जारी है और यह ‘रौद्र संवत्सर’ है। ‘रौद्र’ शब्द भगवान शिव के उग्र रुद्र स्वरूप का प्रतीक माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस संवत्सर में अग्नि तत्व और उग्र ऊर्जा का प्रभाव अधिक सक्रिय रहता है। आग लगने, शॉर्ट सर्किट, विस्फोट और भीषण गर्मी जैसी घटनाओं की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं के पीछे व्यक्ति की भूल से लेकर कई बड़ी तकनीकी खामियां शामिल हैं। लेकिन यह समय ग्रह-नक्षत्रों के दृष्टिकोण से भी बेहद प्रभावशाली है और इससे कुछ संकेत मिल रहे हैं। आपको बता दें, वर्तमान में विक्रम संवत 2083 जारी है और यह ‘रौद्र संवत्सर’ है। ज्योतिष शास्त्र में ‘रौद्र’ शब्द भगवान शिव के उग्र रुद्र स्वरूप का प्रतीक माना गया है। माना जाता है कि, इस संवत्सर में अग्नि तत्व और उग्र ऊर्जा का प्रभाव अधिक सक्रिय रहता है। ऐसे में बार-बार अग्निकांड, गर्मी, विस्फोट जैसी कई घटनाओं का एक कारण यह भी हो सकता है। 

ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को रात 7 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत का पालन त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल में किया जाता है, इसलिए 12 जून को ही यह व्रत रखा जाएगा। भगवान शिव की पूजा का सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल में माना जाता है। पंचांग के अनुसार, शाम 7:36 बजे से लेकर 9:20 बजे तक का समय पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। इस अवधि में श्रद्धा और विधि से की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बना देता है। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही अपने जीवन में सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला होता है। इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है, जिससे दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और मानसिक तनाव में कमी आती है।

जून की शुरुआत कुछ राशियों के लिए खास संदेश लेकर आई है। 4 जून की सुबह चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इसी के साथ गुरू और चंद्रमा के बीच समसप्तक योग का निर्माण हो गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से ठीक सातवें भाव में स्थित होते हैं, तब यह विशेष योग बनता है। इस समय गुरु कर्क राशि में विराजमान हैं और मकर में स्थित चंद्रमा से सातवें स्थान पर हैं। यानी दोनों ग्रह एक-दूसरे के आमने-सामने होकर प्रभाव डाल रहे हैं। दो शुभ ग्रहों के इस संतुलित संबंध का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, खासतौर पर आर्थिक मामलों में। 4 जून से 7 जून तक का समय इन राशियों के लिए अवसरों से भरा रह सकता है।

6 जून को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी है जिससे शुभाशुभ योग दोनों ही प्रभावी होंगे। शनिवार के दिन कल शनि की राशि मकर से चंद्रमा का गोचर कुंभ राशि में होगा। इस गोचर में चंद्रमा श्रवण नक्षत्र से धनिष्ठा नक्षत्र पर संचार करेंगे। और साथ ही राहु के साथ चंद्रमा की युति होने से ग्रहण योग बनेगा। जबकि इस ग्रहण योग के प्रतिकूल प्रभाव को कम करेंगे तीन राजयोग जो मंगल, बुध और गुरु बना रहे हैं। कल मेष राशि में मंगल संचार करते हुए रूचक राजयोग बनाएंगे तो मिथुन राशि में बुध भद्र राजयोग बनाएंगे। और सबसे बड़ी बात है कर्क राशि में गुरु का होना जिसकी वजह से कल कर्क राशि में हंस राजयोग भी प्रभावी होगा।

उपाय : आपको उपाय के तौर पर खिचड़ी खाना चाहिए, घर पर काम करने वालों को भी खिचड़ी खिलाना शुभ रहेगा। % उपाय : तेल और काले वस्त्र घर न लाएं, हनुमान चालीसा का पाठ करें। & उपाय : पीपल के वृक्ष में जल देना शुभ रहेगा। 7 बार परिक्रमा भी करें। & उपाय : बुजुर्ग व्यक्ति से आशीर्वाद लें और चंदन का इत्र प्रयोग करें। उपाय : कांच की गोली अपने पास रखें और सुरमा लगाएं। & कन्या राशि  राहु के मंत्र ओम रां राहवे नमः का जप करें, शिवजी का अभिषेक करना शुभ रहेगा। & उपाय : आपको शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। तामसिक भोजन के प्रयोग से बचें। & वृश्चिक राशि उपाय : पीपल को जल देना और हनुमान चालीसा का पाठ करना आपके लिए शुभ होगा। धनु राशि, शनि स्तोत्र का पाठ आपको ढैय्या के प्रतिकूल प्रभाव से बचाएगा। मकर राशि पीपल को तिल मिले जल से अर्घ्य दें। & कुंभ राशि  काले तिल में घी मिलाकर भगवान विष्णु को ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र के साथ अर्पित करें।

मीन राशि  : आपको उपाय के तौर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न दान देना चाहिए।

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