06 अगस्त 2026 श्रावण अष्टमी : शीतला अष्टमी और कालाष्टमी & ग्रहों का एक अनोखा संयोग

06 अगस्त 2026, दिन गुरुवार है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का दिन ग्रह-नक्षत्रों की एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थिति लेकर आया है. श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आज दोपहर 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगी, जिसके उपरांत नवमी तिथि का शुभारंभ हो जाएगा.

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH 9412932030

आकाशीय मंडल में आज ग्रहों का एक अनोखा संयोग देखने को मिल रहा है. सूर्योदय कालीन ग्रह स्थिति पर नजर डालें तो शनि मीन राशि में और राहु कुंभ राशि में विराजमान हैं. मंगल देव मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि देवगुरु बृहस्पति, भगवान सूर्य और बुध ग्रह एक साथ कर्क राशि में स्थित हैं. केतु सिंह राशि में, शुक्र कन्या राशि में और चंद्रमा मेष राशि में संचरण कर रहे हैं.

वार गुरुवार, श्रावण मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शाम 06:53 तक, उपरांत नवमी। भरणी नक्षत्र रात 08:14 तक, उपरांत कृत्तिका नक्षत्र। विशेष पर्व: शीतला अष्टमी व्रत एवं कालाष्टमी। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:54 तक तथा राहुकाल दोपहर 02:07 से 03:48 तक रहेगासूर्योदय: सुबह 05:45 सूर्यास्त: शाम 07:08 ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:20 से 05:03 & अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 से 03:34 अमृत काल: दोपहर 03:38 से शाम 05:10
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:08 से 07:30 राहुकाल: दोपहर 02:07 से 03:48

6 अगस्त 2026 गुरुवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और गुरु ग्रह, सूर्य तथा बुध का कर्क राशि में त्रिग्रही योग है। इस दिन कार्यों में सफलता और बाधा निवारण के लिए भगवान विष्णु, देवगुरु बृहस्पति और हनुमान जी की पूजा करना तथा पीली वस्तु या गुड़ का दान करना उत्तम उपाय

भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। मंदिर में चने की दाल, पीले वस्त्र, हल्दी या जरूरतमंद को गुड़ और लाल फल दान & नकारात्मकता दूर करने के लिए स्नान के पानी में थोड़ा सा केसर या हल्दी डालकर स्नान करें। & संकटों से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को चोला या सिंदूर अर्पित

 श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और गुरुवार का दिन है। अष्टमी तिथि 06 अगस्त को शाम 6 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। वहीं, कल रात 8 बजकर 14 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतलाष्टमी और कालाष्टमी मनाई जाती है। लिहाजा 06 अगस्त को शीतलाष्टमी व्रत रखा जाएगा,

आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से दूसरा भरणी नक्षत्र है, जिसका अर्थ होता है भरण-पोषण करना।इस नक्षत्र के स्वामी शुक्राचार्य हैं और राशि मेष है। भरणी नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह त्रिकोण आकृति है। इसके प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक सच बोलने वाले और धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि रखने वाले होते हैं। ये जातक साहसी, प्रेरणादायक, रचनात्मक क्षेत्रों में सफल, चित्रकारी और फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले होते हैं। ये लोग कठिन से कठिन कार्य करने से भी नहीं घबराते हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण भरणी नक्षत्र के जातक जीवन में कई बार विफल होने के बाद भी हार नहीं मानते और अंततः अपना लक्ष्य पाने में सफल होते हैं।

 6 अगस्त दिन है गुरुवार और कल चंद्रमा का गोचर होने जा रहा है भरणी नक्षत्र से मेष राशि में। इस नक्षत्र के स्वामी ग्रह रहेंगे शक्र जो सुख साधनों और मनोरंजन की ओर आकर्षण बढ़ाने वाला है साथ ही यह कला विषय की ओर भी रुझान बढाने वाला है। जबकि कल के दिन कर्क राशि में बुध का गोचर सूर्य और गुरु के साथ होने जा रहा है जिससे कल बुधादित्य योग के साथ त्रिग्रह योग का भी संयोग बनने जा रहा है। ऐसे में कल 6 अगस्त का दिन मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के लिए दिन शुभ लाभदायक 

6 अगस्त का ज्योतिषीय आकलन करने से मालूम होता है कि, ग्रहों की स्थिति कई राशियों के लिए बहुत ही शुभ है। दरअसल कल बुधवार के दिन चंद्रमा का गोचर भरणी नक्षत्र से मेष राशि में होगा। इस नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं जो कई राशियों के लिए सुख साधनों का संयोग बना रहे हैं। साथ ही कल बुध सूर्य और गुरु की युति कर्क राशि में बन रही है जिससे त्रिग्रह योग के साथ बुधादित्य योग का भी संयोग बना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *