4 अगस्त 2026, मंगला गौरी व्रत, विवाह में हो रहे विलंब समाप्त;  पावन महीना सावन;आरती जरूर, आरती करने से  भूल-चूक की क्षमा मिल जाती है & बाधाएं आ रही हैं तो मंगलवार के खास उपाय

4 अगस्त 2026 का पंचांग: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि, रेवती नक्षत्र और धृति योग है। इस दिन मंगला गौरी व्रत & सूर्योदय: प्रातः 05:44 सूर्यास्त: सायं 07:11 (लगभग) अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 तक राहुकाल: दोपहर 03:48 से सायं 05:28 तक & भगवान शिव का पावन महीना सावन शुरू हो चुका है। इस महीने में शिव जी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो ओम जय शिव ओंकारा आरती जरूर & इस महीने में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने के साथ-साथ व्रत रखने का भी विशेष महत्व

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030

 भगवान शिव की आरती जरूर करें। मान्यताओं अनुसार सावन सोमवार व्रत की पूजा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब आप इस दिन की पूजा में ओम जय शिव ओंकारा आरती करें। 

धार्मिक मान्यताओं अनुसार भगवान शिव की आरती करने से पूजा-पाठ में रह गई किसी भी प्रकार की भूल-चूक की क्षमा मिल जाती है। साथ ही सावन सोमवार को सुबह-शाम इस आरती को करने से जीवन की सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। भगवान शिव की आरती कपूर से करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 

बाधाएं आ रही हैं तो मंगलवार के दिन इन खास उपायों  :गलवार का दिन रामभक्त हनुमान को समर्पित है। इस दिन बजरंगबली की उपासना करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक मंगलवार के दिन पूर्ण भक्ति भाव से बजरंगबली की पूजा-अर्चना करते हैं उनके जीवन से भय, रोग, दोष और आर्थिक तंगी जैसी तमाम परेशानियां दूर हो जाती हैं। यदि आपके बनते काम बिगड़ रहे हैं या जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं तो मंगलवार के दिन इन खास उपायों को जरूर करें। हनुमान जी की कृपा से आपकी हर परेशानी शीघ्र दूर हो जाएंगी।

4 अगस्त को श्रवण कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और मंगलवार का दिन है। षष्ठी तिथि मंगलावर को रात 10 बजकर 4 मिनट तक रहेगी। 4 अगस्त को शाम 7 बजकर 34 मिनट तक धृति योग रहेगा। साथ ही मंगलवार को रात 9 बजकर 54 मिनट तक रेवती नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 4 अगस्त को मंगला गौरी व्रत किया जायेगा। 

श्रावण महीने में जितने भी मंगलवार पड़ते हैं उन सभी को मंगला गौरी व्रत करने का विधान है। इस व्रत में माता गौरी अर्थात् पार्वती जी की पूजा की जाती है, जिसके कारण इस व्रत को मंगला गौरी व्रत कहते हैं।  पुराणों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती को सावन महीना अति प्रिय है। इसीलिए सावन महीने के सोमवार को शिव जी और मंगलवार को माता गौरी की पूजा को शास्त्रों में बहुत ही शुभ व मंगलकारी बताया गया है। मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से विवाह में हो रहे विलंब समाप्त हो जाते हैं  और जातक को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती हैं। इसके साथ ही सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

हनुमानजी 11वें रुद्र अवतार माने जाते हैं, ज्योतषशास्त्र में इनका संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। हनुमानजी को मंगलवार के देवता के रूप में भी जाना जाता है। और कहा जाता है कि मंगलवार के दिन हनुमानजी की पूजा करने से मंगल जहां मजबूत होता है वहीं शनि का प्रतिकूल प्रभाव दूर होता है। मंगल ग्रह से हनुमानजी का संबंध होने से मंगल की दोनों राशियों मेष और वृश्चिक समेत पांच राशियों के ऊपर हनुमाजी की विशेष कृपा रहती है। अबकी बार सावन में मंगल ग्रह का गोचर मिथुन राशि में होगा। ऐसे में मंगल ग्रह से अनुकूलता रखने वाले इन 5 राशियों पर हनुमानजी की विशेष कृपा रहेगी।

  • श्रवण कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि- 4 अगस्त 2026 को रात 10 बजकर 4 मिनट तक
  • धृति योग- 4 अगस्त 2026 को शाम 7 बजकर 34 मिनट
  •  रेवती नक्षत्र- 4 अगस्त 2026 को  रात 9 बजकर 54 मिनट तक
  • 4 अगस्त 2026 व्रत-त्यौहार- मंगला गौरी व्रत
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:48 ए एम से 05:32 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:10 ए एम से 06:16 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:19 पी एम से 01:10 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:54 पी एम से 03:46 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:13 पी एम से 07:35 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 07:13 पी एम से 08:19 पी एम
  • अमृत काल- 07:30 पी एम से 09:06 पी एम नि
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 09:54 पी एम से 06:17 ए एम, अगस्त 05
  • अमृत सिद्धि योग-  09:54 पी एम से 06:17 ए एम, अगस्त 05
  • रवि योग- 09:54 पी एम से 06:17 ए एम, अगस्त 05  

सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन तांबे की कोई वस्तु लेकर या तांबे का एक छोटा-सा टुकड़ा लेकर हनुमान जी के मंदिर में चढ़ाएं।

बच्चा अचानक से रात को सोते समय डर जाता है, तो रेवती नक्षत्र में हनुमानजी को प्रणाम करके, उनके पैर से सिंदूर लेकर अपने बच्चे को तिलक करें। इसके बाद अपने बच्चे के पास बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपका बच्चा बड़ा है तो उससे हनुमान चालीसा पढ़ने को कहें।

मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए और पाठ करने के बाद हनुमान जी के आगे हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए।

बिजनेस मजबूत करना चाहते हैं तो मंगलवार के दिन आप मिट्टी का एक खाली घड़ा पर काजल का टीका लगाइए। अब उस खाली घड़े पर ढक्कन लगाकर किसी बहते जल के स्त्रोत में प्रवाहित कर दें।

महुआ का पेड़ लगाएं।

 हनुमान जी के मंदिर में जाकर भगवान को चमेली के फूलों की माला अर्पित करें।  इस मंत्र का 21 बार जप करना चाहिए। मंत्र इस प्रकार है- ऊं हं हनुमते नमः।

एक कटोरी में सिंदूर लेकर, उसमें थोड़ा-सा चमेली का तेल मिलाकर हनुमान जी को चढ़ाना चाहिए।

भगवान शिव की आरती

  • ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।
  • ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।
  • हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।
  • त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।
  • त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।
  • सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।
  • सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।
  • प्रणवाक्षर मध्येये तीनों एका॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।
  • पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।
  • भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • जटा में गंगा बहत है,गल मुण्डन माला।
  • शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।
  • नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥
  • त्रिगुणस्वामी जी की आरतीजो कोइ नर गावे।
  • कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥
  • ॐ जय शिव ओंकारा॥

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