3 अगस्त 2026 के दिन कौन-से शुभ संयोग बन रहे हैं& 3 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से क्यों खास & 3 अगस्त 2026, सोमवार के दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। यह दिन श्रावण सोमवार व्रत के कारण शिवभक्ति के लिए विशेष महत्व रखता है, वहीं आदि पेरुक्कू जैसे दक्षिण भारत के पर्व भी इसी समय मनाए जाते हैं। यह दिन वर्षा ऋतु और धार्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है, जब शिव आराधना से मनोकामनाओं की पूर्ति का विशेष योग बनता है। संध्या समय शिव आरती कर व्रत का समापन करें। पंचामृत अभिषेक के बाद दोबारा साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें। महादेव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी & कुंडली में शनि, राहु या केतु का दोष चल रहा है या काम में बाधाएं आ रही हैं, तो तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़े से काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR : HIMALAYAUK NEWS & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030
- भोलेनाथ को चंदन, अक्षत, तिल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते और फल चढ़ाएं।
- माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
- घी का दीया जलाएं और फिर शिव चालीसा का पाठ करें।
- अंत में शिवजी की आरती करें और शिवजी से भूलचूक की माफी मांगें।
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:07 AM से 04:55 AM
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 PM से 12:54 PM
- अमृत काल: सायं 05:27 PM से 07:03 PM
3 अगस्त 2026 का पंचांग विक्रम संवत 2083 के अनुसार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग है। इस दिन सावन का पहला सोमवार व्रत रखा जाएगा & श्रावण मास का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से शिव कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्त जल, बेलपत्र और दूध से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। शुभ मुहूर्त: 11:39 AM से 12:31 PM राहुकाल: 7:06 AM से 8:46 AM

नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रात्रि 10:00 बजे तक, उपरांत रेवती नक्षत्र। 3 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर
सावन में आने वाले हर सोमवार को शिव पूजन के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन शिव जी की पूजा करने से पारिवारिक जीवन में खुशियां आती हैं। इसके साथ ही दांपत्य जीवन के लिए भी इस दिन व्रत रखा शुभ माना जाता है। जो लोग आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति करना चाहते हैं उनके लिए भी सावन का हर सोमवार अहम होता है। इस दिन शिव जी की पूजा और ध्यान करने से आनंद की प्राप्ति भक्तों को हो सकती है।
सावन के पहले सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए ये 4 मुहूर्त सबसे उत्तम रहेगा। इन सभी मुहूर्त में भोलेनाथ की आराधना करने से जातक की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 19 मिनट से सुबह 5 बजकर 1 मिनट तक
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक
- प्रदोष काल- शाम 6 बजकर 26 मिनट से शाम 7 बजकर 56 मिनट तक
- निशिता काल- रात 11 बजकर 33 मिनट से रात 12 बजकर 21 मिनट तक
शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का तांबे के लोटे में शुद्ध जल, गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें. जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें. इसके बाद पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं
शिवलिंग पर चंदन, भस्म, अक्षत (बिना टूटे चावल), बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और सफेद आंकड़े के फूल अर्पित करें.
भगवान शिव को मौसमी फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं. इसके बाद धूप-दीप जलाकर सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ें और ऊं नमः शिवाय’ का जाप करते हुए आरती
सावन के पहले सोमवार पर 21 या 108 बेलपत्र लें और उन पर चंदन से ऊं या राम लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें. इससे आर्थिक तंगी दूर होती है और मनोकामनाएं पूरी
स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिए प्रदोष काल या सुबह पूजा के दौरान शिवजी के समक्ष बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें.
केसर मिला हुआ कच्चा दूध अर्पित करें और माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं. & शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और गुप्त शत्रुओं पर विजय