11 अगस्त26 मंगलवार :संकटमोचन हनुमान जी और मंगला गौरी की उपासना साहस, ऊर्जा और मनोवांछित फल की प्राप्ति

पंचांग अनुसार इस साल शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा और इसके बाद पुष्य नक्षत्र लग जाएगा। इसके अलावा शाम 6 बजकर 51 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा।  सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के अगले दिन यानी श्रावण अमावस्या पर लगने जा रहा है। इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह एक कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा। जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण के नाम से भी जाना जाता है। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को इस तरह से ढकता है जिससे सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशित रहता है और अंदर का हिस्सा पूरी तरह से ढक जाता है। जिससे सूर्य के चारों ओर एक चमकती हुई अंगूठी या छल्ले जैसी आकृति बन जाती है।

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030

11 अगस्त 2026 को पवित्र सावन (श्रावण) महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और दिन मंगलवार (Tuesday) है। श्रावण मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को सावन भौम प्रदोष व्रत का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। प्रदोष व्रत देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित होता है और मंगलवार का दिन होने के कारण इसे ‘भौम प्रदोष’ कहा जाता है।

इस दिन शाम के समय (प्रदोष काल) में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से कर्ज (ऋण) से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही मंगलवार का दिन होने से संकटमोचन हनुमान जी और मंगला गौरी की उपासना करने से साहस, ऊर्जा और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

समय का हमारे जीवन पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। 11 अगस्त 2026 (मंगलवार / Tuesday) को श्रावण (सावन) महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। दिन (Day): मंगलवार (11 अगस्त 2026 / Tuesday)

आज का सबसे शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त): दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक (यह समय किसी भी नए या महत्वपूर्ण काम को शुरू करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है)

आज का अशुभ समय (राहुकाल): दोपहर 03:45 बजे से शाम 05:25 बजे तक (मंगलवार के दिन राहुकाल दोपहर/शाम के समय रहता है, इस दौरान कोई नया काम, खरीदारी या बड़ा लेन-देन करने से बचें) सुबह की पूजा/ध्यान का समय (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 04:27 बजे से 05:08 बजे तक

भारत में ये ग्रहण नहीं दिखेगा।12 अगस्त के सूर्य ग्रहण का सूतक मान्य नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये ग्रहण भारत से दिखाई नहीं दे रहा है। यह केवल वहां मान्य होता है जहां ग्रहण प्रत्यक्ष दिखाई देता है।

:10 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण द्वादशी तिथि प्रातः 08:00 बजे तक रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल और वर्षा ऋतु में रहेंगे। इस दिन आर्द्रा नक्षत्र दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा, फिर पुनर्वसु नक्षत्र लगेगा। पूजा और शुभ कार्यों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 03:55 से 04:41 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:53 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 07:30 से सुबह 09:00 बजे तक रहेगा।

अगस्त में एक नहीं बल्कि दो ग्रहण लगने जा रहा है। पहले सूर्य ग्रहण लगेगा, फिर चंद्र ग्रहण। सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन लगता है और अमावस्या तिथि की शुरुआत 11 अगस्त की देर रात 1 बजकर 52 मिनट पर हो रही है और समापन 12 अगस्त की रात 11 बजकर 6 मिनट पर 

11 अगस्त मंगलवार को विक्रम संवत 2083 के श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (सावन शिवरात्रि) है, जो अगले दिन मध्यरात्रि 01:52 बजे तक रहेगी। आज पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10:09 बजे तक रहेगा, फिर पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। सिद्धि योग शाम 06:51 बजे तक है। राहुकाल दोपहर 03:45 बजे से शाम 05:25 बजे तक रहेगा

11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सावन शिवरात्रि का पर्व है। इस दिन के मुख्य शुभ और विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:49 से 05:33 तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 से 01:09 तक रहेगा

11 अगस्त 2026 (सावन शिवरात्रि) के दिन किसी भी नए या शुभ कार्य को करने के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे के आसपास सबसे उत्तम रहेगा। हालांकि आज सुबह 5:48 बजे से दोपहर 3:22 बजे तक भद्र काल भी रहेगा, जिसमें कुछ शुभ कार्य वर्जित 

सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट से शुरू हो जाएगा और श्रद्धालु देर रात तक शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकेंगे। आगे जानते हैं जल चढ़ाने के सबसे शुभ मुहूर्तों के बारे में…

  • पहला शुभ मुहूर्त सुबह 04:22 से 05:48 बजे तक
  • दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजे से 10 बजे तक
  • तीसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:53 बजे तक
  • चौथा शुभ मुहूर्त शाम 07:04 से रात 9:00 बजे तक
  • पांचवां सबसे शुभ मुहूर्त रात 12:05 से 12:48 बजे तक

11 अगस्त 2026 शुभ मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त – 04:22 AM से 05:05 AM
  • प्रातः सन्ध्या – 04:44 AM से 05:48 AM
  • अभिजित मुहूर्त – 12:00 PM से 12:53 PM
  • विजय मुहूर्त – 02:39 PM से 03:32 PM
  • गोधूलि मुहूर्त – 07:04 PM से 07:26 PM
  • सायाह्न सन्ध्या – 07:04 PM से 08:09 PM
  • अमृत काल – 07:59 AM से 09:25 AM
  • निशिता मुहूर्त – 12:05 AM, अगस्त 12 से 12:48 AM, अगस्त 12

11 अगस्त 2026 राहुकाल समय

11 अगस्त 2026 को राहुकाल समय दोपहर 03:45 से शाम 05:25 बजे तक रहेगा।

सावन शिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2026 (Sawan Shivratri Puja Muhurat 2026)

सावन शिवरात्रि पर शिव पूजा का पहला शुभ मुहूर्त सुबह 5 से 10 बजे तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त शाम 7 से 9 बजे तक और तीसरा शुभ मुहूर्त रात 12:05 से देर रात 12:48 बजे तक रहेगा। 

समय का महत्व: साधना का ब्रह्मांडीय संरेखण

आध्यात्मिक साधनाओं में समय पर इतना ज़ोर क्यों दिया जाता है? क्या केवल भक्ति ही पर्याप्त नहीं है? कल्पना कीजिए कि आप बंजर मिट्टी में, गलत मौसम में, एक नाज़ुक बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं। बीज में जीवन तो होता है, लेकिन सही पर्यावरणीय परिस्थितियों के बिना उसकी क्षमता सुप्त रहती है। इसी प्रकार, हमारी आध्यात्मिक साधनाओं, विशेष रूप से बगलामुखी मंत्र जाप जैसी शक्तिशाली तांत्रिक साधनाओं को फलने-फूलने के लिए विशिष्ट ब्रह्मांडीय संरेखण की आवश्यकता होती है। प्राचीन ऋषियों ने सहस्राब्दियों के अवलोकन और गहन ध्यान के माध्यम से ग्रहों, चंद्र चरणों ( तिथियों ) और ज्योतिषीय संयोगों ( मुहूर्तों ) के जटिल नृत्य को समझा था। ये ब्रह्मांडीय लय हमारे सूक्ष्म ऊर्जा शरीरों को प्रभावित करती हैं, जिससे कुछ समय दिव्य ऊर्जाओं को ग्रहण करने और प्रकट करने के लिए असाधारण रूप से अनुकूल होते हैं। इष्टतम समय पर जाप करने से मंत्र की शक्ति बढ़ जाती है, परिणाम शीघ्र मिलते हैं और यह सुनिश्चित होता है कि आपका संकल्प (पवित्र आशय) सार्वभौमिक चेतना के साथ सशक्त रूप से प्रतिध्वनित हो।

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