9 अगस्त 2026 रविवार कामदा एकादशी का व्रत & सावन के महीने में रामायण पढ़ने का महत्व 

9 अगस्त 2026 को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (कामिका एकादशी व्रत) तिथि, वार रविवार, मृगशिरा नक्षत्र (दोपहर 02:43 PM तक), और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 PM से 12:53 PM तक रहेगाव्रत/त्यौहार: कामिका एकादशी व्रत मास एवं पक्ष: श्रावण मास, कृष्ण पक्ष तिथि: एकादशी (सुबह 11:04 AM तक, इसके बाद द्वादशी)
नक्षत्र: मृगशिरा (दोपहर 02:43 PM तक, इसके बाद आर्द्रा) सूर्योदय: सुबह 05:47 AM
सूर्यास्त: शाम 07:06 PM अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 PM से 12:53 PM तक
राहुकाल: शाम 05:26 PM से 07:06 PM तक ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:25 AM से 05:06 AM तक

BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030

9 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि और रविवार का दिन है। एकादशी तिथि रविवार को दोपहर पहले 11 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। 9 अगस्त को देर रात 2 बजकर 5 मिनट तक हर्षण योग रहेगा। साथ ही रविवार को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक मृगशिरा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 9 अगस्त को कामदा एकादशी व्रत है। 

  • श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि- 9 अगस्त 2026 को दोपहर पहले 11 बजकर 6 मिनट तक
  • हर्षण योग- 9 अगस्त 2026 को देर रात 2 बजकर 5 मिनट तक 
  •  मृगशिरा नक्षत्र- 9 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक
  • 9 अगस्त 2026 विशेष-  कामदा एकादशी व्रत
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:49 ए एम से 05:33 ए एम
  • प्रातः संध्या- 05:11 ए एम से 06:18 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:18 पी एम से 01:10 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:53 पी एम से 03:44 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:10 पी एम से 07:32 पी एम
  • सायाह्न संध्या- 07:10 पी एम से 08:17 पी एम
  • अमृत काल- 06:42 ए एम से 08:09 ए एम
  • निशिता मुहूर्त- 12:22 ए एम, अगस्त 10 से 01:06 ए एम, अगस्त 10  
  • द्विपुष्कर योग 11:04 ए एम से 02:43 पी एम

सावन के महीने में महादेव की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस महीने में शिव की उपासना करके उन्हें जल्दी प्रसन्न किया जा सकता है। लेकिन एक बात ज्यादातर लोग नहीं जानते होंगे कि सावन में जितना शिव उपासना का महत्व है, उतनी ही मायने रखती है सावन में भगवान राम की पूजा। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां शिव की पूजा होती है वहां राम प्रसन्न होते हैं, जहां राम पूजे जाते हैं वहां शिव भी प्रसन्न हो जाते हैं। 

एक श्लोक में समाई है श्रीराम की पूरी कथा : श्लोक इस प्रकार है- आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्।

वैदेहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।

एक श्लोकी रामायण का अर्थ

  • आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्।

अर्थ: सबसे पहले भगवान श्रीराम वनवास के लिए गए और वहां स्वर्ण मृग का वध किया।

  • वैदेहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।।

अर्थ: इसके बाद माता सीता का रावण ने हरण किया। सीता की रक्षा के लिए जटायु ने रावण से युद्ध किया और अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान श्रीराम की सुग्रीव से भेंट हुई और दोनों में मित्रता हुई।

  • बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।

अर्थ: मित्रता निभाते हुए भगवान श्रीराम ने सुग्रीव के भाई बाली का वध किया। इसके बाद समुद्र पार करके लंका पहुंचने और हनुमान जी द्वारा लंकापुरी में आग लगाए जाने का प्रसंग आता है।

  • पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।

अर्थ: अंत में भगवान श्रीराम ने युद्ध में रावण और उसके भाई कुंभकर्ण का वध किया। 

ऐसे करें इस श्लोक का जाप

एक श्लोकी रामायण का पाठ सुबह स्नान करने के बाद मंदिर में दीपक जलाएं। जाप के लिए कुश के आसन का इस्तेमाल करें, रुद्राक्ष की माला से इसका जाप करें। नियमित रूप से और 108 बार इस श्लोक का पाठ करना शुभ माना है। अगर 108 बार पाठ करना संभव न हो तो इसे 7, 14 या 21 बार भी पढ़ सकते हैं। वहीं, नियमित जाप करने वाले साधक 108 मंत्रों की 5 माला जाप और इस प्रक्रिया को लगातार 21 दिनों तक जारी रख सकते हैं।

इस श्लोक के जाप से मिलते हैं ये लाभ

मान्यता है कि इस श्लोक के जाप से रुके हुए काम पूरे होते हैं। इसके साथ ही जीवन से परेशानियां दूर होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति में मदद मिलती है। इसके जाप से व्यक्ति को प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त होने की भी मान्यता है।

कामदा एकादशी का व्रत रखने जातक की सभी पूरी होती हैं। कुछ पुराणों के अनुसार कामदा एकादशी को उपवास करने से श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है।  कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी जरूर करें। ऐसा करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है और परिवार में खुशहाली सदैव बनी रहती है।

कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार हर वर्ष सावन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने वालों को वाजपेय यज्ञ (शक्ति और समृद्धि प्रदान करने वाला अनुष्ठान) का फल मिलता है। हालांकि, कई लोग ऐसे भी होते हैं जो एकादशी के दिन व्रत लेने में समर्थ नहीं होते। ऐसे लोगों को कामिका एकादशी के शुभ दिन पर नीचे दिए गए मंत्रों का जप करना चाहिए। इन मंत्रों का जप करने से भी आपको विष्णु भगवान की कृपा प्राप्त होती है और आपके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं। 

द्वादशाक्षर मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

भगवान विष्णु के इस मंत्र का जप करने से शुभ फल आपको प्राप्त हो सकते हैं। यह मंत्र आपको जीवन में प्रगति दिलाने वाला माना जाता है। इसके साथ ही मानसिक शांति और नकारात्मकता से मुक्ति भी इस मंत्र का जप करने से आपको प्राप्त हो सकती है। कामिका एकादशी के दिन कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप आपको करना चाहिए। 

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।

कामिका एकादशी के दिन विष्णु गायत्री मंत्र का जप करने से आपको करियर के क्षेत्र में उन्नति मिलती है क्योंकि यह मंत्र आपकी मानसिक शक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है। इसके साथ ही समाज में प्रतिष्ठा भी इस मंत्र का जप करने से आपको प्राप्त हो सकती है। 

धन-समृद्धि के लिए मंत्र

शांताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्। 

इस मंत्र का जप करने से आपको आर्थिक उन्नति की प्राप्ति हो सकती है। जीवन में आ रही बाधाएं भी इस मंत्र का जप करने से दूर होने लगती हैं। इस मंत्र का जप भगवान विष्णु के शांत स्वरूप का ध्यान करते हुए आपको करना चाहिए। 

बाधा निवारण मंत्र 

ॐ ह्रीं कार्तवीर्यार्जुनो नाम राजा बाहुसहस्रवान। यस्य स्मरणमात्रेण हृतं नष्टं च लभ्यते।

अगर आपके बनते काम बिगड़ते हैं, धन कहीं अटका हुआ है या कोई अन्य बाधा जीवन में आ रही है तो ऊपर दिए गए मंत्र का जप आपको कामिका एकादशी व्रत के दिन करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने से हर प्रकार की बाधा से आपको मुक्ति मिल सकती है। 

मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए मंत्र 

श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव।

इस मंत्र का जप या कीर्तन करना एकादशी के दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस मंत्र का जप करने से घर में सकारात्मकता आती है और सुख-समृद्धि की आपको प्राप्त हो सकती है। 

सनाधन धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान राम की पूजा बिना शिव पूजा के अधूरी रहती है, जबकि शिव जी के स्मरण के बिना श्री राम पूजा भी पूरा फल नहीं देती। यही कारण है कि दक्षिण भारत में स्थित रामेश्वरम को 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वोपरि माना गया है। इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं प्रभु राम द्वारा की गई है। ऐसे में सावन माह में सच्चे मन से राम नाम का सुमिरन करता है उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूरे माह में प्रतिदिन 1 से 2 घंटे रामायण पाठ करना शुभ माना गया है। इससे सावन में भगवान शिव के साथ श्रीराम को भी प्रसन्न किया जा सकता है।

देवों के देव महादेव ने खुद को राम जी के प्रति समर्पित करते हुए कहा है, “रामेश्वर तु राम यस्य ईश्वरः”, यानी कि भगवान राम जिसके ईश्वर हैं।

वहीं श्रीराम कहते हैं ,“रामेश्वर तु रामस्य यः ईश्वरः” यानि कि जो राम के ईश्वर हैं।

लिंग थापि करि बिधिवत पूजा।
शिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
शिव द्रोही मम दास कहावा।
सो नर सपनेहु मोहि न भावा।।
(लंकाकांड, दोहा 1, चौपाई 3)

अर्थात भगवान श्रीराम कहते हैं कि भगवान शिव के समान मुझे कोई दूसरा प्रिय नहीं है, इसलिए शिव मेरे आराध्य हैं। जो व्यक्ति शिव का अनादर करके मुझे प्राप्त करना चाहता है, वह मुझे सपने में भी प्रिय नहीं होता। 

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी लिखा है:

शंकर प्रिय मम द्रोही, शिव द्रोही मम दास।
ते नर करहिं कल्प भरि, घोर नरक महुँ वास।।

अर्थ: जो व्यक्ति राम जी से बैर रखकर शिव की उपासना करता है या फिर भगवान शिव का विरोध करके स्वयं को राम का भक्त मानता है, वह पुण्य नहीं, बल्कि पाप का भागी बनता है।

सावन में रामायण पढ़ने के फायदे

  • सावन शिव को समर्पित है और शिवजी स्वयं श्रीराम के नाम का जाप करते हैं। इसलिए इस मास में रामायण पाठ करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • सावन के 30 दिनों तक रामायण का नियमित पाठ करने वाले घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • सावन में सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से रामायण का पाठ करने कि परंपरा है, जिससे घर-परिवार में सुख और शांति बनी रहता है।
  • रामायण के आदर्श चरित्र और प्रेरणादायक प्रसंग व्यक्ति को धर्म, धैर्य और मर्यादा का मार्ग दिखाते हैं, जिससे मन शांत और एकाग्र रहता है।

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