10 सितंबर 2026 भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और गुरुवार का दिन है। चतुर्दशी तिथि 10 सितंबर को सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगी, उसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। अमावस्या तिथि 11 सितंबर को सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। वहीं, कल शाम 7 बजकर 18 मिनट तक सिद्ध योग रहेगा। इसके साथ ही कल 10 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 5 मिनट तक मघा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल श्राद्ध आदि की अमावस्या है। भगवान विष्णु या अपने इष्टदेव का स्मरण कर यात्रा आरंभ करें।

भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपका जीवन सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत से परिपूर्ण हो! कल्याण हो! BY CHANDRA SHEKAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030
अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 को शुरू होगी और इसका समापन 11 सितंबर को होगा। जब अमावस्या तिथि शाम के समय (प्रदोष काल) में होती है, तो वह दिन व्रत और पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। 2026 में यह स्थिति 10 सितंबर, गुरुवार को बन रही है। इसलिए, पिठोरी अमावस्या का व्रत (Pithori Amavasya 2026) और शाम की पूजा 10 सितंबर को ही की जाएगी।
भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। भाद्रपद अमावस्या के दिन इन कामों करने से पितृ अति प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों पर कृपा बरसाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल पेड़ में त्रिदेव और पितरों का वास होता है। ऐसे में भाद्रपद अमावस्या के दिन पीपल पेड़ के पास सरसों तेल का दीया जलाएं और परिक्रमा करें।

वार: गुरुवार
तिथि: भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (सुबह 10:34 बजे तक, इसके बाद अमावस्या तिथि शुरू)
नक्षत्र: मघा नक्षत्र (दोपहर 2:05 बजे तक) ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:31 से 5:17 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:53 से 12:43 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:23 से 3:13 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:32 से 6:55 बजे तक
योग: सिद्ध योग (शाम 7:18 बजे तक)
सूर्योदय: सुबह 6:03 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:32 बजे
- भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि – 10 सितंबर को सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक, उसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी।
- सिद्ध योग- 10 सितंबर को शाम 7 बजकर 18 मिनट तक
- मघा नक्षत्र- 10 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 5 मिनट तक
- 10 सितंबर 2026 विशेष- श्राद्ध आदि की अमावस्या
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:31 ए एम से 05:17 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 04:54 ए एम से 06:03 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:53 ए एम से 12:43 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:23 पी एम से 03:13 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:32 पी एम से 06:55 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 06:32 पी एम से 07:42 पी एम
- अमृत काल- 11:47 ए एम से 01:18 पी एम

भाद्रपद महीने की अमावस्या इस बार 2 दिनों की पड़ रही है। अमावस्या तिथि जब दो दिनों की होती है, तो पहले दिन श्राद्ध आदि की अमावस्या मनायी जाती है और अगले दिन स्नान-दान की अमावस्या मनायी जाती है। पितृ दोष से मुक्ति के लिये और अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिये आज के दिन दूध, चावल की खीर बनाकर, गोबर के उपले या कंडे की कोर जलाकर, उस पर पितरों के निमित्त खीर का भोग लगाना चाहिए।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि अगर पितृ नाराज होते हैं तो व्यक्ति को कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष रहता है उसे आर्थिक, स्वास्थ्य से लेकर अन्य दूसरी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पितृ दोष दूर करने के लिए अमावस्या का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं अगर पितृ प्रसन्न रहते हैं तो घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है। परिवार के सदस्य खूब तरक्की करते हैं।
हिंदू धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) का बहुत महत्व है। चूंकि 11 सितंबर, शुक्रवार को सूर्योदय के समय अमावस्या मौजूद रहेगी, इसलिए सुबह स्नान-दान और पितरों के निमित्त भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को मानी जाएगी।
यह व्रत खास तौर पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए रखती हैं। ‘पिठोरी’ का अर्थ है आटे (पीठ) से बनी आकृतियां। इस दिन आटे से 64 योगिनियों और सप्तमातृकाओं की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है।