16 सितंबर 2026 (बुधवार) ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:52 AM से 05:39 AM तक विजय मुहूर्त: दोपहर 02:36 PM से 03:24 PM तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 AM से 12:40 PM तक & सूर्योदय- सुबह 06:06 बजे सूर्यास्त- शाम 06:24 बजे & ज्योतिष में शुक्र और चंद्रमा की युति अत्यंत शुभ मानी जाती है। कहते हैं जब भी ये दोनों ग्रह किसी राशि में साथ आते हैं तो जातकों का झुकाव कला, संगीत और रचनात्मक कार्यों की तरफ बढ़ता है। पंचांग अनुसार शुक्र-चंद्रमा की युति तुला राशि में 16 सितंबर तक बनी रहेगी। ज्योतिष की मानें तो इस युति से 4 राशियों को लाभ

16 सितंबर बुधवार है। पंचमी तिथि 08:59 बजे तक, फिर षष्ठी 10:48 (कल) बजे तक रहेगी। विशाखा नक्षत्र 17:21 बजे तक, उसके बाद अनुराधा 19:53 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग वैधृति 12:21 बजे तक, फिर विष्कुम्भ योग 12:48 (कल) बजे तक। बालव करण 08:59 बजे तक, उसके बाद कौलव 21:50 बजे तक, फिर तैतिल 10:48 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (12:15 से 13:48) के दौरान टालें। चन्द्रमा तुला राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।
16 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और बुधवार का दिन है। पंचमी तिथि बुधवार को सुबह 9 बजे तक रहेगी , उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी। 16 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक वैधृति योग रहेगा। वैधृति योग स्थिर कार्यों हेतु ठीक है लेकिन अगर कोई भाग-दौड़ वाला कार्य अथवा यात्रा आदि करनी हो तो इस योग में नहीं करनी चाहिए। साथ ही बुधवार को शाम 5 बजकर 23 मिनट तक विशाखा नक्षत्र
गणेश जी को 21 दुर्वा घास अर्पित & “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- भाद्रप भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि- 16 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे तक रहेगी , उसके बाद षष्ठी तिथि लग जाएगी
- वैधृति योग- 16 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक
- विशाखा नक्षत्र- 16 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 23 मिनट तक
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:52 ए एम से 05:39 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:16 ए एम से 06:26 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं
- विजय मुहूर्त- 02:36 पी एम से 03:24 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:40 पी एम से 07:04 पी एम
- सायाह्न संध्या- 06:40 पी एम से 07:51 पी एम
- अमृत काल- 07:50 ए एम से 09:34 ए एम
- सर्वार्थ सिद्धि योग- 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
- अमृत सिद्धि योग – 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर 17
- रवि योग- 05:22 पी एम से 06:26 ए एम, सितंबर
आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से विशाखा 16वां नक्षत्र है। विशाखा का अर्थ होता है- विभाजित या एक से अधिक शाखाओं वाला। विवाह आदि के समय सजाये गए घर के द्वार को विशाखा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। इसके तीन चरण तुला राशि में आते हैं और इसका चौथा चरण वृश्चिक राशि में आता है। लिहाजा तुला और वृश्चिक राशि के जातकों पर विशाखा नक्षत्र का प्रभाव रहता है। विशाखा नक्षत्र को शक्ति, समृद्धि, सुंदरता, उपलब्धियों और खुशियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। इस नक्षत्र में कारीगरी, चित्रकारी और औषधी से सबंधित कार्य आरंभ करना शुभ माना जाता है।
विश्वकर्मा पूजा हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो हर साल सूर्य के कन्या राशि में गोचर करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन धरती के प्रथम शिल्पकार और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। यह त्योहार विशेष रूप से कारीगर, फर्नीचर बनाने वाले, मशीनरी और कारखानों से जुड़े काम करने वाले लोगों के लिए खास होता है। इस दिन लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ अपनी मशीनों और उपकरणों की भी पूजा करते हैं।

- by ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI ;
- Award : Sanatan Dharma Journalist of The Year 2026 अवॉर्ड: सनातन धर्म जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर , नई दिल्ली में सम्मानित
- Awardy : Aadi Guru shankaracharya Sanatani Sewa Puruskar आदि गुरु शंकराचार्य सनातनी सेवा पुरस्कार, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक जी द्वारा सम्मानित &
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