14 सितंबर 2026; हरतालिका तीज और गणेशोत्सव: माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाकर उसी सिंदूर से अपनी मांग भरी जाती & विसर्जन कर दोगे तो दीपावली में कैसे पूजेंगे श्री गणेश

14 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया/चतुर्थी तिथि और सोमवार & हरतालिका तीज और गणेशोत्सव की शुरुआत & राहुकाल: सुबह 07:38 बजे से सुबह 09:11 बजे तक & सूर्योदय- सुबह 06:05 बजे  सूर्यास्त- शाम 06:28 बजे & 14 सितंबर का दिन कुछ राशियों के लिए खास 

विसर्जन कर दोगे तो दीपावली में कैसे पूजेंगे श्री गणेश

लोक मान्यताओं के अनुसार, उत्तर भारत में गणेश विसर्जन न करने के पीछे यह धारणा है कि भगवान गणेश का मूल निवास स्थान उत्तर भारत (कैलाश/शिव परिवार का क्षेत्र) माना जाता है। उत्तर भारत में दीपावली की रात माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश का स्थायी पूजन किया जाता है। मान्यता है कि जिन देवता का नित्य पूजन घर के स्वामी के रूप में सदा के लिए किया जाता है, उनका विसर्जन नहीं किया जाता। प्रचलित कथाओं के अनुसार, गणेश जी माता गौरी के साथ अपने भाई कार्तिकेय से मिलने एक सप्ताह के लिए दक्षिण भारत गए थे और दोनों भाइयों की भेंट महाराष्ट्र या दक्षिण क्षेत्र में हुई थी। दक्षिण भारत में उनके इस अस्थायी आगमन की खुशी में उत्सव मनाकर विसर्जन (अगले साल आने के निमंत्रण के साथ) किया जाता है, जबकि उत्तर भारत में उन्हें सदा विराजमान माना जाता है

सोमवार की दिन बेहद ही खास है। महादेव को समर्पित इस दिन दो शुभ तिथियों का संयोग देखने को मिलेगा। इस दिन हरितालिका तीज व्रत रखा जाएगा। वहीं, गणेश चतुर्थी के साथ 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 14 सितंबर 2026 का दिन कुछ राशियों के लिए खास साबित हो सकता है। इस दिन 4 राशि के जातकों पर शिव परिवार की विशेष कृपा बरस सकती है। 

हरतालिका तीज व्रत और गणेश चतुर्थी (गणेशोत्सव प्रारंभ) & 14 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया और सोमवार का दिन है। कल तृतीया तिथि सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। इसके अलावा सोमवार को हरितालिका तीज का व्रत किया जायेगा। वहीं, कल दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा। साथ ही कल 14 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा कल दस दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत है।

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का त्यौहार प्रमुख पर्वों में एक माना गया है। धार्मिक दृष्टि ये यह अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान गणेश के जन्मोत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भक्तगण अपने घर में बप्पा की प्रतिमा को स्थापित कर के पूरे 10 दिनों तक विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। 

  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि – 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर समाप्त, फिर चतुर्थी तिथि लग जाएगी
  • ब्रह्म योग- 14 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक 
  • चित्रा नक्षत्र- 14 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक
  • 14 सितंबर 2026 विशेष- सावन का चौथा और आखिरी सोमवार
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:32 ए एम से 05:19 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 04:56 ए एम से 06:05 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:52 ए एम से 12:41 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:20 पी एम से 03:10 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:28 पी एम से 06:51 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:28 पी एम से 07:37 पी एम
  • अमृत काल- 07:18 ए एम से 08:57 ए एम

गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर चतुर्दशी तक मनाया जाता है। ये उत्सव 14 सितम्बर, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर 25 सितंबर, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अनंत चतुर्दशी तक मनाया जायेगा। गणेश उत्सव के पहले दिन घर में श्री गणेश जी की स्थापना की जाती है और पूरे दस दिनों तक उनकी विधि-विधान से पूजा करके आखिरी दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। हालांकि, कई लोग डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिनों के लिये भी गणपति जी की स्थापना करते हैं।

हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा व्रत माना जाता है। कहते हैं इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पंचांग अनुसार यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की बालू से निर्मित प्रतिमाओं की पूजा करती हैं और साथ ही हरतालिका तीज की कथा भी सुनती हैं। 

हरतालिका तीज के दिन सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:05 से शुरू होकर 07:06 बजे तक रहेगा। वहीं तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 07:08 से प्रारंभ होकर 14 सितंबर की सुबह 07:06 बजे तक रहेगी।

हरतालिका तीज 2026: प्रदोष काल पूजा शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज पर प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से रात 8:22 बजे तक रहेगा। ज्यादातर व्रती महिलाएं इसी मुहूर्त में पूजा करके हरतालिका तीज की कथा सुनती हैं।

हरतालिका तीज पूजा विधि

  • हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं।
  • फिर शुभ मुहूर्त में इन्हीं प्रतिमाओं की विधि विधान पूजा की जाती हैं।
  • पूजा के समय माता पार्वती को सुहाग पिटारी चढ़ाई जाती है। जिसमें सुहाग का सभी सामान होता है।
  • वहीं शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है।
  • इसके बाद हरतालिका तीज की कथा सुनी जाती है।
  • फिर भगवान को भोग लगाकर उनकी आरती की जाती है।
  • पूजा के बाद सुहाग सामग्री ब्राह्मणी को दान कर दी जाती है।
  • इस व्रत वाले दिन रात्रि जागरण करने की परंपरा है क्योंकि यह व्रत अगले दिन सुबह पूजा के बाद खोला जाता है।
  • फिर सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाकर उसी सिंदूर से अपनी मांग भरी जाती है।
  • इसके बाद व्रती महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं।

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगा। चतुर्थी तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, गणेश चतुर्थी का त्यौहार 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। 14 सितंबर को मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल के दौरान हुआ था इसीलिए मध्याह्न के समय को गणेश पूजा के लिए अति उत्तम माना जाता है। मध्याह्न मुहूर्त में भक्तगण पूरे विधि-विधान से गणेश पूजा करते हैं जिसे षोडशोपचार गणपति पूजा के नाम से जाना जाता है।

हरतालिका तीज मंत्र 

माता पार्वती के मंत्र

ऊं उमायै नम:, पार्वत्यै नम:, जगद्धात्रयै नम:, ब्रह्मरूपिण्यै नम: 

भगवान शिव के मंत्र

ऊं हराय नम:, ऊं महेश्वराय नम:, ऊं शम्भवे नम:, ऊं नम: शिवाय, ऊं पशुपतये नम: व ऊं महादेवाय नम:

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