9 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) & विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी) शक संवत: 1948 (पराभव) पक्ष: कृष्ण पक्ष तिथि: कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (रात 09:35 PM तक, उसके बाद अमावस्या) नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी (रात 09:19 PM तक, उसके बाद हस्त) योग: ब्रह्म योग (रात 11:21 PM तक) & सूर्योदय: सुबह 06:18 AM सूर्यास्त: शाम 05:58 PM & अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:45 AM से दोपहर 12:31 PM तक ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:49 AM से सुबह 05:37 AM तक & राहुकाल: सुबह 10:41 AM से दोपहर 12:08 PM तक ^ उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा और लगभग रात 9:19 बजे के बाद नक्षत्र परिवर्तन BY Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & President Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 94152932030

पितृ पक्ष अपने अंतिम पड़ाव पर है और 9 अक्टूबर का पंचांग इसी बदलाव की ओर संकेत करता है। आज कृष्ण चतुर्दशी रहेगी, जबकि रात के बाद अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे समय में कई परिवार अपने पूर्वजों को याद करने, तर्पण और धार्मिक कार्यों की तैयारी पर विशेष ध्यान देते हैं।
9 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और शुक्रवार का दिन है। चतुर्दशी तिथि शुक्रवार को रात 9 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। 9 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा। शुक्रवार को रात 11 बजकर 21 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा। साथ ही 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 20 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।
- आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि- 9 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 36 मिनट तक
- ब्रह्म योग- 9 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजकर 21 मिनट तक
- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र- 9 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 20 मिनट तक
- 9 अक्टूबर 2026 विशेष- चतुर्दशी तिथि श्राद्ध
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:40 ए एम से 05:29 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:04 ए एम से 06:18 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:45 ए एम से 12:31 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:05 पी एम से 02:51 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:58 पी एम से 06:23 पी एम
- सूर्योदय- सुबह 06:17 बजे
- सूर्यास्त- शाम 05:59 बजे
शुक्रवार को चतुर्दशी तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा। यानि आज उन लोगों का श्राद्ध किया जायेगा, जिनका स्वर्गवास किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ हो। साथ ही आज उन लोगों के भी श्राद्ध कार्य पूर्ण किये जायेंगे, जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो यानि जिनकी मृत्यु किसी एक्सीडेंट या किसी शस्त्र आदि से हुई हो। इस दिन श्राद्ध करने से व्यक्ति को किसी भी अज्ञात भय का खतरा नहीं रहता।
09 अक्टूबर 2026 का हिन्दू पंचांग और सर्व पितृ अमावस्या के उपाय
चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।* *श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार 10 अक्टूबर, शनिवार को यह अमावस्या है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्राद्ध पक्ष की अमावस्या पर कुछ विशेष उपाय करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष भी कम होता है। इसलिए इस दिन भी ये उपाय किए जा सकते हैं।* पीपल में पितरों का वास माना गया है ।सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं ।* सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़ आदि का दान करें ।* *इस अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें ।इससे भी पितृगण प्रसन्न होते हैं ।* *सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर अपने पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें ।इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं ।*
*इस अमावस्या पर चावल के आटे से 5 पिडं बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में प्रवाहित कर दें ।* *अमावस्या पर गाय के गोबर से बने कंड़े को जलाकर उस पर घी-गुड़ की धूप दें और पितृ देवताभ्यो अर्पणमस्तु बोलें ।* *इस अमावस्या पर कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करें ।ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा ।*
*पितृ पक्ष का आखिरी दिन पितृ अमावस्या होती है। इस दिन कुल के सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। फिर चाहे उनकी मृत्यु तिथि पता न हो। तब भी आप पितृ अमावस्या पर उनका तर्पण कर सकते हैं।* *पितृ पक्ष की अमावस्या को सूर्यास्त से पहले ये उपाय करना है। इस उपाय में एक स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले व सफेद तिल और जौ मिला लें। इसके साथ कोई भी सफेद मिठाई, एक नारियल, कुछ सिक्के और एक जनेऊ पीपल के पेड़ के नीचे जाकर सबसे पहले ये सारा सामान पेड़ की जड़ में चढ़ा दें। इस दौरान सर्व पितृ देवभ्यो नम: का जप करते रहें।* *ये मंत्र बोलते हुए पीपल को जनेऊ भी चढ़ाएं। इस पूरी विधि के बाद मन में सात बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें और भगवान विष्णु से कहें मेरे जो भी अतृप्त पितृ हों वो तृप्त हो जाए। इस उपाय को करने से पितृ तृप्त होते हैं पितृ दोष का प्रभाव खत्म होता है और उनका अशीर्वाद मिलने लगता है। हर तरह की आर्थिक और मानसिक समस्याएं दूर होती हैं।*