एग्जिट पोल्स सही हुए तो व्यापक बदलाव मजबूरी बन जायेगी

 एग्जिट पोल्स के हिसाब से ही नतीजे आए तो सरकार का स्टैंड बदल सकता है।   पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब एग्जिट पोल्स भी सामने आ गए हैं। अगर यही नतीजे 11 दिसंबर को आए तो इसके क्या मायने होंगे और 2019 के लिए यह क्या संकेत देंगे? 11 दिसंबर को इसी तरह से नतीजे आते हैं तो उसके संकेत, प्रभाव अैर असर क्या होंगे।  कांग्रेस अगर इन राज्यों में बीजेपी को मात देने में सफल होती है तो यह मोदी की उस अजेय इमेज को बुरी तरह तोड़ेगा जो इमेज बीजेपी दिखाने की कोशिश करती रही है।  एग्जिट पोल्स के नतीजे विपक्ष के लिए ऑक्सिजन का काम कर सकते हैं। अगर यही नतीजे आए तो संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष के आक्रामक तेवर दिखेंगे। कांग्रेस फिर से सेंटर पॉइंट में दिखेगी और विपक्षी एकता की धुरी बनने की फिर एक कोशिश हो सकती है। राफेल से लेकर किसानों का मुद्दा और नोटबंदी से हुई दिक्कतों पर विपक्ष सरकार की घेराबंदी कर सकता है। 

वसुंधरा हारी तो राजस्थान में राज्यवर्धन राठौर युग  

राजस्थान मेंसीएम वसुंधरा राजे सिंधिया के खिलाफ नाराजगी की बात सामने आती रही है। उन्हेंहटाने की भी चर्चा हुई लेकिन केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती देते वह जमी रहीं। टिकटवितरण में भी उनकी चली। प्रदेश अध्यक्ष भी अपने हिसाब से तय किया लेकिन जिस तरहएग्जिट पोल्स के नतीजे उनके खिलाफ दिख रहे हैं, अगर सही हुए तो उनके नेतृत्व पर सवाल उठेंगे।पार्टी उन्हें हटा भी सकती है। वहां, गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्यवर्धन राठौर के रूप में समानांतर नेतृत्वमौजूद है। 


 गूगल ट्रेंड्स ने भी रूझान दे दिये थे

गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है  चीनके बाद सबसे ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल हमारे देश में होता है और ये बहुत तेजी सेबढ़ भी रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक 48.1 करोड़ लोग भारत में इंटरनेट काइस्तेमाल करते हैं. यही वजह है कि चुनावों में टिकट बांटने से लेकर प्रचार करने तकके लिए पार्टियां इंटरनेट का खूब इस्तेमाल करती हैं. इंटरनेट की दुनिया में किसपार्टी और किस नेता का जलवा रहा और कौन सी पार्टी और नेता फिसड्डी रहे. चुनावों केदौरान ‘गूगलट्रेंड्स’ परकौन छाया रहा और कितना छाया रहा. ‘गूगल ट्रेंड्स’ दुनिया भर में सर्च किएजा रहे शब्दों,सवालों और विषयों का हिसाब रखता है और हमें बताता है कि किस दिन, किस जगह, कितने लोगों ने क्यासर्च किया यानी उनकी दिलचस्पी क्या जानने में रही. इंटरनेट इस्तेमालकर्ताओं केव्यवहार को आसानी से समझा जा सकता है. तेलंगाना में कांग्रेस कीलोकप्रियता सबसे ज्यादा – इनचुनावों को 2019में होने वाले आम चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जारहा है.  

– गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक मध्यप्रदेश  राज्य में कांग्रेस और बीजेपीलगभग समान रूप से लोकप्रिय हैं. छत्तीसगढ़ में   ‘गूगल ट्रेंड्स’  केमुताबिक बीजेपी और कांग्रेस में मुख्य मुकाबला है और ये मुकाबला कांटे का है पर चुनावतक कांग्रेस पहले नंबर पर पहुंच गई और  बीजेपीकाफी नीचे खिसक गई. मतलब पहले और दूसरे चरण के मतदान के बीच कांग्रेस कीलोकप्रियता बढ़ी. राजस्थान में  राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रतिलोगों में बहुत गुस्सा है और इस वजह से यहां बीजेपी को नुकसान हो सकता है. इंटरनेटीबदलावों पर नजर डालने से पता चलता है कि राजस्थान में सत्तारूढ़ बीजेपी की तुलनामें कांग्रेस ज्यादा लोकप्रिय है. हालांकि दोनों पार्टियों की लोकप्रियता में कोईबड़ा अंतर नहीं है. औसतन 4 अंकों का अंतर है.   गूगलट्रेंड्स के मुताबिक 15 नवंबर को 100 प्वाइंट्स के साथ कांग्रेस लोकप्रियता के शीर्ष परथी तो इस दिन बीजेपी के पास मात्र 28 नंबर थे  तेलंगाना राज्य में  गूगलट्रेंड्स के मुताबिक चुनावी मौसम में कांग्रेस राज्य में लोकप्रियता के मामले मेंसबसे आगे है. इन दो महीनों में कांग्रेस के पास 35 प्वाइंट हैं, बीजेपी के पास 26 प्वाइंट हैं. वहींतेलुगू देशम पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति के पास क्रमश: 17 और 15 प्वाइंट हैं. 

 अधिकतर एग्जिट पोल्स राजस्थान में कांग्रेस की मजबूत स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। कमोबेश सभीमें कांग्रेस की जीत का अनुमान जताया गया है। कांग्रेस ने इस बार राजस्थान चुनावोंमें प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के साथ-साथ पूर्व सीएम अशोक गहलोत को भी रणभूमि में उतारा है। दोनों के हीकांग्रेस की तरफ से सीएम कैंडिडेट होने के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में वोटिंग केतुरंत बाद पायलट और गहलोत का दिल्ली पहुंचना सीएम पद की रेस के लिए अपनी दावेदारीपेश करने के रूप में भी देखा जा रहा है। स्वभाविक सवाल उठ रहा है कि कहीं ये दोनोंनेता राजस्थान में मजबूत स्थिति को देख तो दिल्ली नहीं पहुंचे हैं। 

  राजस्थान और तेलंगाना में वोटिंग थमने के साथ ही पांच चुनावी राज्यों के एग्जिट पोल्स आ गए। मध्यप्रदेश के लिए अब तक 8 सर्वे सामने आए हैं। पांच में कांग्रेस को बहुमत मिलता दिख रहा है। राजस्थान के 6 सर्वे में से 4 में कांग्रेस की सरकार बनने के आसार हैं। छत्तीसगढ़ के 8 सर्वे में भाजपा 4 और कांग्रेस 4 पर आगे है। तेलंगाना में 4 सर्वे आए हैं, सभी में टीआरएस की सरकार बनने का अनुमान जताया गया है।

इंडिया टुडे एक्सिस माय इंडिया एक्जिट पोल के मुताबिक राजस्थान की जनता ने सत्तारूढ़ BJP को बाहर कर दिया है. एक्जिट पोल में कांग्रेस की भारी बहुमत के साथ वापसी देखी जा रही है. राजस्थान में बीजेपी को 55 से 72 सीटों पर सिमटते देखा गया है. वहीं विपक्ष में बैठी कांग्रेस को 119 से 141 सीटों पर जीतता दिखाया जा रहा है.

राजस्थान में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने का अनुमान है. कांग्रेस के लिए 42% और बीजेपी के लिए 37% वोट का अनुमान है.

इंडिया टुडे एक्सिस माय इंडिया के एक्जिट पोल में मध्य प्रदेश में कांग्रेस को बढ़त. एक्जिट पोल ने कांग्रेस को 104 से 122 सीटों पर जीतते हुए दिखाया है वहीं BJP को 102 से 120 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान जारी किया है. राज्य में मुकाबला दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के बीच दिख रहा है और अन्य दलों को महज 4 से 11 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है.

एक्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश में बीजेपी को 40 फीसदी वोट, कांग्रेस को 41 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है.

इंडिया टुडे एक्जिट पोल ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बीजेपी पर भारी दिखाया है. एक्जिट पोल के मुताबिक जहां कांग्रेस को 55-65 सीटों पर जीतते हुए सरकार बनाने का स्पष्ट बहुमत लेते दिखाया है. वहीं बीजेपी को राज्य में महज 21 से 31 सीटों पर जीत हासिल करते दिखाया गया. बीएसपी और अजीत जोगी की पार्टी के गठबंधन को 90 में से सिर्फ 4-8 सीटें मिलती दिख रही हैं. अन्य को राज्य में एक भी सीट नहीं मिलने का अनुमान है.

कांग्रेस और बीजेपी के वोट शेयर में भी बड़ा फासला नजर आ रहा है. कांग्रेस को राज्य में 45 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है, वहीं बीजेपी को 38 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है. अगर बीजेपी-जेसीसी गठबंधन की बात करें तो इस गठबंधन को 9 फीसद वोट मिलने का अनुमान है. अन्य दलों को खाते में 8 फीसद वोट जा सकता है.

इंडिया टुडे एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के सर्वे में केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पूर्ण बहुमत के साथ तेलंगाना में सत्ता में लौट रही है. हालांकि बीजेपी को इस राज्य में भी बड़ा झटका लगने जा रहा है. सर्वे में 119 सदस्यीय तेलंगाना विधानसभा में केसीआर की पार्टी को 79 से 91 के बीच सीटें मिल सकती हैं. जबकि कांग्रेस और टीडीपी गठबंधन को कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा. गठबंधन को 21 से 33 सीटें मिल सकती हैं. वहीं तेलंगाना में जमकर प्रचार करने वाली बीजेपी का प्रदर्शन पिछली बार से भी कम हो सकता है. इस बार उसे 1 से 3 सीटें मिल सकती हैं. पिछली बार उसके खाते में 5 सीटें आई थीं.

राज्य में हुए चुनाव के आधार पर मिले वोट शेयर की बात की जाए तो टीआरएस को 46 फीसदी वोट मिलने की संभावना है. कांग्रेस गठबंधन को 37 फीसदी और बीजेपी को 7 फीसदी वोट मिल सकता है. ओवैसी को पार्टी AIMIM को 3 फीसदी वोट मिलने के आसार जताए गए हैं.

इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक राजस्थान में बीजेपी को करारी मात मिलती दिख रही है. सूबे की कुल 200 विधानसभा सीटों में कांग्रेस के खाते में 119 से 141 सीटें जाती दिख रही हैं. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी को 55 से 72 सीटें मिल सकती हैं. यही नहीं, बाकी आए एक्जिट पोल में भी बीजेपी की हार दिख रही है. जबकि 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 163 सीटें हासिल हुई थीं. ऐसे में सवाल उठता है कि एक्जिट पोल अगर नतीजों में बदलते हैं तो राजस्थान में बीजेपी की हार का ठीकरा किसके सिर फूटेगा. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की जिम्मेदारी होगी या फिर पार्टी के आला नेता की. हालांकि प्रदेश में ‘मोदी से बैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं’ के नारे लग रहे थे.

इसी के चलते राजस्थान में वसुंधरा राजे को जीत दिलाने के लिए पीएम मोदी ने 13 रैलियां की हैं, अमित शाह ने प्रदेश के सभी जिलों का दौरा किया और 38 कार्यक्रम किए. वसुंधरा राजे ने भी 75 रैलियां कीं. पार्टी के दूसरे नेताओं ने कुल 222 रैलियां और 15 रोड शो किए.

इसके बावजूद एक्जिट पोल में बीजेपी की करारी हार नजर आ रही है. ऐसी सूरत में बीजेपी को जीत मिलती तो निश्चित रूप से जीत का श्रेय पीएम मोदी और पार्टी के आला नेताओं की दिया जाता, लेकिन हार के लिए जिम्मेदारी किसकी होगी, ये अहम सवाल है.

छत्तीसगढ़ में चावल बाबा की विदाई

इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल छत्तीसगढ़ की सत्ता पर 15 साल से काबिज बीजेपी को करारी मात मिलती दिख रही है. राज्य की 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को 55 से 65 सीटें और बीजेपी को 21 से 31 सीटों के बीच ही संतोष करना पड़ सकता है. जबकि अन्य को 4 से 8 सीटें मिलने की संभावना है. पोल के मुताबिक मुख्यमंत्री रमन सिंह की सत्ता से विदाई तय है.

छत्तीसगढ़ में Exit Poll नतीजों में तब्दील होते हैं तो फिर हार की जिम्मेदारी किसकी होगी. मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ न तो राजस्थान जैसी सत्ताविरोधी लहर थी और न ही पार्टी में किसी तरह का बगावती सुर था. इसके बावजूद एक्जिट पोल में हार होती दिख रही है. तो ऐसे में फिर हार की जिम्मेदारी किसकी होगी. जबकि पीएम मोदी और अमित शाह सहित पार्टी के कई नेताओं ने कई रैलियां की हैं.

मध्य प्रदेश में मामा शिवराज की राह मुश्किल

मध्य प्रदेश की सत्ता में 15 साल से काबिज बीजेपी का दुर्ग दरकता नजर आ रहा है. इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है. लेकिन कांग्रेस मामूली बढ़त के साथ आगे है.

पोल के मुताबिक 230 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी को 102 से 120 सीट और कांग्रेस 104 से 122 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि बसपा को 3 और अन्य को 3 से 8 सीटें मिलने का अनुमान है. सनद रहे कि 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165 और कांग्रेस को 58 सीटें मिली थीं.

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान पिछले 13 साल से मुख्यमंत्री हैं. शिवराज के खिलाफ भी न कोई खास सत्ताविरोधी लहर और न ही पार्टी में कोई चुनौती दिखी. मोदी ने भी अपनी चुनावी रैलियों में शिवराज के कामकाज की जमकर तारीफ की थी. इसके बावजूद एक्जिट पोल में एमपी में बीजेपी से आगे कांग्रेस दिख रही है. नतीजे ऐसे ही रहे तो फिर जिम्मेदारी किसकी होगी.

2019 से पहले हार की जिम्मेदारी पर सवाल

दरअसल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को 2019 का सेमीफाइल माना जा रहा है. ऐसे में बीजेपी शासित तीनों राज्य उसके हाथ से निकलते हैं, तो इसका असर लोकसभा चुनाव में भी पड़ेगा. ऐसे में बीजेपी के आला नेता कभी नहीं चाहेंगे कि हार की जिम्मेदारी राष्ट्रीय नेतृत्व या फिर नरेंद्र मोदी के सिर फूटे. इस सूरत में तीनों मुख्यमंत्री को अपने सिर हार का ‘सेहरा’ बांधना पड़ सकता है.

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