सितारों की उथल-पुथल- ग्रहों का दुर्लभ संयोग ; बड़े बदलाव संभव

ज्योतिष के नौ ग्रहों के द्वारा हम सभी का जीवन संचालित होता है। हम सभी के जीवन की छोटी-बड़ी सभी घटनाओं में बदलते हुए ग्रहों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि किसी एक समय के दो अच्छे मित्र ग्रह, गोचर और दशा बदलने पर शत्रु बन जाते हैं। वास्तव में देखा जाए तो सभी जीवमात्र उस सर्वशक्तिमान सत्ता के हाथों की कठपुतलियां हैं, जिनमें धागों का कार्य नवग्रह कर रहे हैं।

होली 21 मार्च 2019 (Holi 2019) को है। होलाष्‍टक 2019 (Holastak 2019) होली से 8 दिन पहले शुरू हो जाते हैं होलाष्‍टक और इस बार होलाष्‍टक 14 मार्च से 21 मार्च तक रहेंगे।  हिन्दू मान्यताओं के अनुसार होलाष्‍टक लगने के बाद कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि ये 8 दिन अशुभ माने जाते हैं। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी अर्थात होलाष्‍टक से प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ जाता है।  होलाष्‍टक से होली तक विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसा शुभ संस्‍कार नहीं किए जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष अष्टमी से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक की अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। होलाष्‍टक के दिन होली का डंडा गाडा जाता है और तब से ही होलिका दहन के लिए लकड़ियां एकत्रित करने का काम शुरू हो जाता है। होलाष्टक की रात में मीन संक्रांति 2019 भी है, मीन संक्रांति यानी सूर्य का राशि परिवर्तन होगा और इस दिन सूर्य अपनी मकर राशि से मीन राशि में संचरण करेंगे और 14 अप्रेल तक मीन राशि में ही रहेंगे। हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार 15 मार्च को सूर्यदय से पहले सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए ज्योतिषीय आधार पर यह संक्रांति 14 मार्च को कही जाएगी और इसका पुण्यकाल 15 मार्च को माना जाएगा। इसलिए होलाष्टक से खरमास भी लग रहा है और दौरान कोई भी शुभ कार्य, विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसा शुभ संस्‍कार नहीं किए जाते हैं। होलाष्टक से ही होलिका दहन के लिए स्‍थान का चयन कर लिया जाता है और पूर्णिमा के दिन सांयकाल के शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है। 

29 मार्च को गुरू का मिलन शनि से होगा क्योंकि वे पहले ही इस राशि में मौजूद हैं। इसका राजनीतिक घटना क्रमों पर व्यापक प्रभाव होगा। मार्च 2019, इस महीने शनि को छोड़कर अन्य 8 ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा। सितारों की इस उथल-पुथल के कारण कई लोगों की नौकरी और बिजनेस में बड़े बदलाव हो सकते हैं। मार्च के शुरुआती दिनो में ही राहु-केतु ने राशि बदल ली। इसके बाद महीने के बीच में सूर्य फिर महीने के आखिरी दिनों में मंगल, बुध, गुरु और शुक्र का भी राशि परिवर्तन होगा। इन ग्रहों के राशि बदलने के कारण मिथुन और कर्क राशि वाले लोगों के लिए मिला-जुला समय है। वहीं कन्या और वृश्चिक राशि वाले लोगों को संभलकर रहना होगा। इनके अलावा मेष, वृष, सिंह, तुला, धनु,मकर, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों के लिए ये महीना खास रहने वाला है। मार्च 2019 में ग्रहों के कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। इस माह में शनि को छोड़कर शेष सभी 8 ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा। ये एक दुर्लभ योग है, जब एक ही महीने में 8 ग्रह राशि बदलेंगे।

मार्च 2019 में ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, एक ही महीने में 8 ग्रह बदलने वाले हैं राशि, सूर्य 15 मार्च को कुंभ से मीन में जाएगा, सालभर बाद गुरु ग्रह 30 मार्च को धनु राशि में प्रवेश करेगा

लोकसभा चुनाव परिणाम : ज्योतिष की राय
देशभर में यह बहस चल रही है कि भारत का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा । ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार लोकसभा चुनाव 2019 पर आकाशीय ग्रहों की स्थिति अप्रत्याशित परिणामों की ओर इशारा कर रही है,
क्योंकि जब भारत निर्वाचन आयोग ने यह बताया कि लोकसभा चुनाव 2019 कब है, तब राहुकाल चल रहा था, अर्थात लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा रविवार शाम 5 बजकर 29 मिनट पर हुई उस वक्त दक्षिण भारत में राहुकाल चल रहा था। जबकि चौघडिया की बात करें तो ‘उद्वेग’ यानि अशुभ समय चल रहा था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अशुभ समय में किया गया कोई भी कार्य आसानी से पूर्ण नहीं होता इसलिए ये लोकसभा चुनाव तीखे प्रहारों के बीना संपन्न नहीं हो सकता –
चुनाव के ऐलान से पहले ही शनि-राहु-केतु की युति बन चुकी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि-राहु-केतु अगर अपना घर बदल लें तो किसी को राज योग दे देते हैं और किसी को कंगाल बना देते हैं। 7 मार्च 2019 को शनि-राहु-केतु ने अपनी चाल बदल ली थी जिसका असर भारत में होनें वाले आम चुनावों पर भी नजर आने वाला है। शनि न्याय के देवता हैं, जबकि राहु-केतु पाप ग्रह कहे जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी शनि और केतु की युति बनती है तो जातक अत्यधिक अपरिपक्व हो जाता है। क्योंकि इस दौरान शनि अपना मूल तत्व छोड़कर अप्रत्याशित काम करता है, जिसका असर पीएम नरेंद्र मोदी और उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आने वाले दिनों में दिखेगा। 

शनि-केतु की युति से बनी 13 दिन की अटल सरकार

1996 में भी अप्रेल-मई में चुनाव हुए थे और इस दौरान भी शनि-केतु की यह युति मीन राशि में थी और शनि-केतु की इस युति का असर ऐसा था कि उस वक्त भी किसी भी पार्टी को पूरा बहुमत नहीं मिला। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की महज 13 दिन की सरकार बनी। वहीं 1984 की बात करें तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद दिसंबर में चुनाव हुए और तब शनि-केतु का गोचर वृश्चिक राशि में था, जिसका असर ऐसा था कि राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को जबरदस्त जीत मिली। जबकि 1962 में चुनाव के दौरान भी शनि-केतु की युति मकर राशि में थी, जिसका असर ऐसा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू को अपने तीसरे और आखिरी चुनाव में एक तरफा जीत मिली। इन तीन चुनावों के परिणाम बताते हैं कि शनि-केतु की युति किसी को भी राजा और रंक बना देती है। 

सूर्य : माह की शुरुआत में सूर्य कुंभ राशि में रहेगा। 15 मार्च की सुबह ये ग्रह मीन राशि में प्रवेश करेगा।

चंद्र : 1 मार्च को चंद्र धनु राशि में है, 2 मार्च की दोपहर मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसके बाद हर ढाई दिन में चंद्र का राशि परिवर्तन होगा।

मंगल : मार्च की शुरुआत में मंगल मेष राशि में है। 22 तारीख को ये ग्रह वृष राशि में प्रवेश करेगा।

बुध : मीन राशि के बुध के साथ महीने की शुरुआत होगी। इसके बाद 6 मार्च को ये ग्रह वक्री होगा, 15 मार्च को कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इसके बाद 28 मार्च को फिर से मार्गी हो जाएगा।

गुरु : लगभग एक साल से ये ग्रह अभी वृश्चिक राशि में है। 30 मार्च को ये ग्रह धनु राशि में जाएगा।

शुक्र : माह की शुरुआत में शुक्र मकर राशि में है। 21 मार्च को कुंभ राशि में प्रवेश करेगा।

शनि : इस माह सिर्फ ये एक ग्रह राशि नहीं बदलेगा और पूरे माह धनु राशि में रहेगा।

राहु-केतु : माह की शुरुआत में राहु कर्क में और केतु मकर राशि में है। 6 मार्च को राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में प्रवेश ।

साल 2017 में 26 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 53 मिनट पर शनि ने धनु राशि में प्रवेश किया था आैर अब वे 24 जनवरी 2020 को प्रात:काल 10 बज कर 03 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसका अर्थ ये हुआ पहले से ही धनु राशि में स्थित शनि 2019 में भी इसी में रहेंगे। इस दौरान में कुछ परिवर्तन अवश्य करेंगे। 6 सितंबर 2018 को शाम 5 बजकर 2 मिनट पर शनि ग्रह मार्गी हो गए थे आैर अब 30 अप्रैल 2019 तक मार्गी ही रहेंगे। इसी दिन सांय 5 बजकर 32 मिनट पर शनिदेव धनु राशि में ही मार्गी से वक्री हो जायेंगे। यह स्थित 18 सितंबर दोपहर तक रहेगी आैर उसके बाद 2 बज कर 25 मिनट पर वे धनु राशि में पुनः मार्गी हो जायेंगे। इस बीच 20 जनवरी 2019 तक शनि अस्त रहेंगे यानि उनका प्रभाव कम हो जाएगा। साल के अंत में 27 दिसंबर को वे पुनः अस्त होंगे जनवरी 2020 तक इसी स्थिति में रहेंगे। 2019 शनि ज्यादातर समय पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेंगे और 27 दिसंबर 2019 को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

जब लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों का ऐलान होगा तब शुक्र का वृषभ राशि में गोचर में होगा उस दौरान पीएम मोदी की राशि वृश्चिक पर इसका अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रभाव पड़ेंगे क्योंकि मोदी की राशि से सप्तम भाव में शुक्र आ रहे हैं। सप्तम भाव आपके रिश्तों को दर्शाता है इसलिए इस दौरान कई संबंध टूटते हैं और कई संबंध नए बनते हैं। राजनीति के कोण से देखें तो आपको इस गोचर के दौरान मिला-जुला सहयोग मिलेगा। 

इस साल होलिका दहन 20 मार्च तथा 21 मार्च को रंग खेला जाएगा। होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है जो इस बार 14 मार्च से शुरू हो जाएगा और 21 को होली के पर्व के साथ खत्म होगा। हिंदू धर्म के अनुसार होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। तिथि के अनुसार होलाष्टक फाल्गुन माह की शुक्लपक्ष अष्टमी से प्रारंभ होता है। माना जाता है कि होलिका दहन के लिए लकड़ियां एकत्र करने का काम होलाष्टक के दिन से ही शुरू कर दिया जाता है। इस साल होलाष्टक के साथ मीन संक्रांति भी है इसलिए इस दौरान खरमास भी शुरू हो जाएगा। बुधवार (13 मार्च) की रात को 11 बजकर 38 मिनट से अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्योदय के साथ तिथि की शुरुआत होती है इसलिए 14 मार्च से होलाष्टक शुरू होगा, जो 20 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाएंगे। 15 मार्च से सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा और वो 14 अप्रैल तक रहने वाला है। इस वजह से खरमास भी प्रारम्भ हो जाएगा। खरमास शुरू हो जाने के कारण इस दौरान कोई भी शुभ अनुष्ठान जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि काम नहीं किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि होली से आठ दिन पहले सभी नौ ग्रहों का व्यवहार उग्र हो जाता है। प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस वजह से सभी शुभ कार्य इस दौरान करने से बचना चाहिए। पौराणिक मान्यता ये भी है कि हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्लपक्ष अष्टमी को ही भक्त प्रह्लाद को बंदी बनाया था और उसके साथ दुर्व्यवहार किया था। होलिका ने भी अपने भाई की बात रखने के लिए इसी दिन प्रह्लाद को जलाने की तैयारी शुरू की थी।
ये भी कथा है कि होलाष्टक के दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इस वजह से प्रकृति में निरसता बढ़ गयी थी और सभी ने शुभ कार्य करना बंद कर दिया था। होली के दिन ही कामदेव को वापस जीवित होने का वरदान मिला जिसके बाद फिर से सबकुछ सामान्य हो गया।
इस दौरान दान पुण्य का काम भी वर्जित होता है। प्रकृति में नकारात्मक शक्तियां बढ़ जाती हैं, इस वजह से ये समय तांत्रिक विद्या जानने वालों के लिए तपस्या करने का सही समय होता है।

 होली का दहन 20 मार्च को ही किया जाएगा। 21 मार्च गुरुवार को धुलंडी मनाई जाएगी। पं. दाधीच के अनुसार सौभाग्यवती स्त्रियों को काले व नीले रंगों से होली नहीं खेलनी चाहिए। धर्मसिंधु के अनुसार भद्राकाल में होलिका दहन करने से उस क्षेत्र में अशुभ घटनाएं हो सकती है। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त भद्रा के पश्चात रात 9 से मध्यरात्रि 12:15 बजे तक रहेगा। 14 मार्च को होलाष्टक लग जाने और 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मीन की संक्रांति होने से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। 

राशि के अनुसार होली खेलना ज्यादा शुभकारी 

मिथुन: हरे रंग से होली खेलना शुभ रहेगा। 

कर्क: सफेद कपड़े पहन नीले या हरे रंग से होली खेलें। 

सिंह: गोल्डन, पीले, लाल और नारंगी रंग से होली खेलें। 

कन्या: हरे, भूरे, नारंगी रंगों से होली खेलें। 

तुला: सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनें। नीले, केसरिया-गुलाबी रंगों से होली खेलें। 

वृश्चिक: लाल, मैरुन, पीले रंग से होली खेलें। 

धनु: लाल अथवा पीले रंग से होली खेले। 

मकर: नीले अथवा काले रंग से होली खेलें। 

कुंभ: काले, बेंगनी, लाल, गुलाबी रंग से होली खेलें। 

मीन: पीले, केसरिया अथवा गोल्डन रंगों से होली खेलें। 

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