स्वर्गलोक के सत्ता सिंहासन पर आसीन इन्द्रदेव ने सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से अनुरोध किया कि आप लोग क्रमशः अपने मुख से अपना-अपना शुभ, अशुभ, आकृति-प्रकृति, व्यक्तित्व, प्रभाव, शक्ति, पराक्रम और गरिमा का वर्णन करें. तब नवग्रहों में सबसे सूर्य, फिर चंद्रशनि देव ने समस्त ग्रहों को संबोधित करते हुए कहा, ‘तुम सब कोरी बकवास कर रहे हो. तुममें सबसे बड़ा तो मैं ही हूं. मेरे पिताजी सूर्य देव भी मेरी ऊंचाई से घबराते हैं, क्योंकि मैं उनसे भी ऊंचा हूं. सूर्य देव सारे ग्रहों में प्रबल हैं, उन्हीं से सारे ग्रह प्रकाश पाते हैं, किंतु मैं उससे भी ज्यादा प्रबल एवं पराक्रमी हूं. सूर्य देव भी मेरा लोहा मानते हैं. मेरा रंग भले ही काला है पर शिव के महाकाल का स्वरूप भी काला है. इसलिए मैं शिव स्वरूप महाकाल का शिष्य हूं. हर पल सोच-विचार कर सतर्क कदमों से शनैः-शनैः चलने के कारण ही मुझे शनैश्चर कहते हैं. शरीर में लौह तत्व के रूप में विराजमान रहता हूं. प्राणियों को मैं सुख-दुख भोगने वाला बनाता रहता हूं. मैं रहस्य विद्या, गूढ़ तत्व ज्ञान, नौकर-चाकर, यश-अपयश तथा शारीरिक बल प्रदान करने वाला हूं. मैं ही व्यक्ति के लिए मृत्यु का कारण बनता हूं. मैं न्यायकारी हूं, अपराधी को दंड देने में समर्थ हूं.मा,फिर मंगल, फिर बुध, गुरु और फिर शुक्र ने अपने गुणों का गुणगान किया,
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR MOB. 9412932030

मैं अखंड ब्रह्मांड का सर्वोच्च न्यायाधीश हूं. मेरे प्रभुत्व में तिल, पेट्रोल, डीजल, जलाने का तेल, कोयला, मादक पदार्थ के व्यापार से लाभ होता है. मैं भले ही धीरे-धीरे चलता हूं, किंतु लाभ-हानि देने में बहुत ही तेज हूं. मेरे कारण व्यक्ति को अप्रत्याशित लाभ एवं अप्रत्याशित हानि दोनों ही हो जाती हैं.
मेरे वार यानी शनिवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति तीव्र स्वभाव का, दृढ़ प्रतिज्ञ, रंग-रूप में श्याम वर्ण लिए हुए, पुरुषत्व से पूर्ण, साहसी तथा मन में उत्साही होता है. ऐसा व्यक्ति लंबे तन का, अंडाकार मुखमंडल वाला, लंबे काले बालों से परिपूर्ण होता है और मेरे अशुभ होने पर 27वें-29वें वर्ष में कष्ट भोगता है तथा पूरे 88 वर्षों तक जीवित रहता है. यदि मैं उच्च आयु का दाता बनूं तो 120 वर्ष की आयु देता हूं.

मैं सारे जगत को प्रेरणा देता हूं कि वे कर्म करें और शतायु प्राप्त कर सुख भोगें. इसलिए मेरी तीसरी साढ़ेसाती का द्वितीय और तृतीय चरण व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है. कोई भी व्यक्ति अपने संपूर्ण जीवन में तीसरी साढ़ेसाती को भोगकर आगे की आयु प्राप्त नहीं कर सकता, चाहे वह देव हो या दानव.
मेरे वार शनिवार के दिन गृहप्रवेश, नौकर-चाकर रखना, लौह धातु, मशीनरी तथा कलपुर्जों के साथ तिल और तेल का व्यापार करना शुभ रहता है. बुरे कार्य करना, तेल लगाना, तेल घर पर लाना, लोहा लाना, बीज बोना तथा कोई भी कृषि कार्य कराना अशुभ माना जाता है. मेरी दो राशियां मकर और कुंभ हैं. उच्च राशि तुला है और नीच राशि मेष है. कलियुग में मेरा महत्व सबसे अधिक है, इसलिए मैं सारे ग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा हूं.
देव गुरु बृहस्पति ग्रह की कथा
देवताओं का गुरु होने के कारण सभी मुझे मानते हैं. देवगुरु के रूप में इस सभा में मेरा उच्च स्थान है. मैं ही जातक की कुंडली में राजयोग बनाकर देवर्षि का पद दिलाता हूं. मैं पुत्र प्राप्ति तथा संतान सुख का कारक हूं. व्यक्ति के शुभ-अशुभ कर्मों, धर्म, ज्ञान और मानसिक योग्यता का विचार भी मुझसे ही किया जाता है. मैं सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला ग्रह हूं. परिवार, अचल संपत्ति, वाणी की मधुरता और सद्गुणों का दाता भी मैं ही हूं. आध्यात्मिक ज्ञान और श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करना मेरा स्वभाव है.
सतयुग में मैं सत्यवादी हरिश्चंद्र के रूप में प्रसिद्ध था, त्रेतायुग में श्रीराम के स्वरूप में मेरा महत्व झलकता था और द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में भी मेरा ही प्रभाव था. मैं ही विष्णु स्वरूप हूं और तीनों लोकों में पूजनीय हूं. कलियुग में शांति, ज्ञान और सदाचार की रक्षा भी मेरे प्रभाव से ही बनी हुई है.
बृहस्पतिवार के दिन जन्म लेने वाले व्यक्ति उच्च आदर्शों वाले, विद्वान, शिक्षक, कवि, लेखक, नेता, मंत्री, न्यायप्रिय और धर्मपरायण होते हैं. ऐसे लोग तपस्वी, योगी, ज्ञानी और भगवान विष्णु के भक्त माने जाते हैं. मैं क्रोध पर नियंत्रण रखने वाला सौम्य ग्रह हूं, इसलिए अधिक कुपित होने पर भी बहुत बड़ा अनिष्ट नहीं करता.
जो लोग, विशेषकर महिलाएं, गुरुवार के दिन व्रत-उपासना करती हैं, पीले वस्त्र धारण करती हैं और पीले पदार्थों का भोग लगाकर परिवार में बांटती हैं, उन पर मैं अत्यंत प्रसन्न होता हूं और उन्हें सुख, सौभाग्य, पुत्र-पौत्र तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करता हूं.
मैं व्यक्ति को अनुष्ठान करने की शक्ति और प्रेरणा देता हूं. मेरे कुपित होने पर मनुष्य ज्ञानहीन, शिक्षा से वंचित और शक्तिहीन हो जाता है. गुरुवार के दिन जन्म लेने वाला व्यक्ति जीवन के विशेष वर्षों में शुभ-अशुभ प्रभावों का अनुभव करता है और सामान्यतः दीर्घायु होता है. पूर्ण शुभ स्थिति में मैं 115 वर्ष से अधिक आयु का आशीर्वाद भी देता हूं.
मेरे वार के दिन ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा आरंभ, धर्म-कर्म, न्याय, अनुष्ठान और ग्रहशांति जैसे कार्य करने से सफलता प्राप्त होती है. चने की दाल खाना, केसर मिश्रित मिठाई का सेवन और दान करना, तथा गाय को पीली रोटी खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. शरीर में मैं मस्तिष्क का कारक हूं.

कुंडली में प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, दशम और एकादश भाव में मैं शुभ फल प्रदान करता हूं। धनु और मीन राशि का स्वामी मैं ही हूं. कर्क मेरी उच्च राशि तथा मकर मेरी नीच राशि मानी जाती है. मेरी पंचम, सप्तम और नवम दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, उसके महत्व और शुभता को बढ़ा देती है. मंगल और सूर्य मेरे मित्र ग्रह हैं, जबकि शुक्र को मेरा शत्रु माना गया है.

नवग्रहों में मंगल देव ने अपने स्वरूप, शक्ति व प्रभाव का वर्णन किया है. मंगल साहस, शक्ति, रक्त और उत्साह के कारक हैं. मंगलवार व्रत और हनुमान पूजा से दुख-बाधा से दूर होती है.
मंगल देव की कथा (Mamgal Dev Kahani)
राजन! आपने चंद्रमा की आत्मप्रशंसा तो सुन ली, लेकिन मेरा महत्व भी किसी से कम नहीं है. मेरा नाम ही मंगल है. जिस व्यक्ति पर मैं प्रसन्न होता हूं, उसका जीवन सुख, साहस और मंगलमय बना देता हूं, लेकिन जब मैं क्रोधित होता हूं तो विनाश करने में भी देर नहीं लगाता. मेरी उग्रता और शक्ति से देवता तक भयभीत रहते हैं.

मैं अग्नितत्व से युक्त, सिंदूरी वर्ण वाला पराक्रमी देव हूं. मनुष्यों के भीतर साहस, शक्ति, रक्त और उत्साह का संचार मैं ही करता हूं. मेरे शुभ प्रभाव से व्यक्ति को वीरता, आत्मविश्वास और सफलता मिलती है, लेकिन अशुभ होने पर दुर्घटना, रक्त संबंधी कष्ट, चोट, क्रोध, संघर्ष और अनेक प्रकार की परेशानियां जीवन में बढ़ जाती हैं.
मैं व्यक्ति को स्वस्थ, मजबूत, साहसी और विजेता बनाता हूं. पुलिस, सेना और पराक्रम से जुड़े क्षेत्रों में सफलता दिलाने में मेरा विशेष प्रभाव माना जाता है. भूमि, भवन और संपत्ति का सुख भी मेरी कृपा से प्राप्त होता है, लेकिन जब मैं अशुभ होता हूं तो व्यक्ति घर-भूमि से वंचित होकर दर-दर भटकने लगता है.
मंगलवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति सामान्यतः ऊर्जावान, स्वाभिमानी, वीर और साहसी स्वभाव का होता है. ऐसे लोग खेल, सेना, जासूसी, नेतृत्व और जोखिम वाले कार्यों में आगे रहते हैं. मेरी शुभ स्थिति व्यक्ति को विजय, भूमि लाभ, निर्माण कार्य, राजनीति और साहसिक क्षेत्रों में सफलता देती है, जबकि अशुभ प्रभाव विवाद, ऋण, दुर्घटना, क्रोध और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बढ़ा सकता है.
मैं उग्र और प्रभावशाली ग्रह हूं. यदि मेरी स्थिति अनुकूल हो तो व्यक्ति जीवन में ऊंचाइयों को छूता है, लेकिन प्रतिकूल होने पर उसे संघर्ष, रोग, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है. मंगलवार का व्रत, संयम और पूजा-पाठ मेरे अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायक माने गए हैं.
जो व्यक्ति मंगलवार के दिन व्रत रखता है, नमक का त्याग करता है, चने से बने प्रसाद का सेवन करता है और मेरे मंत्रों का जाप करता है, उस पर मेरी विशेष कृपा बनी रहती है. जो भक्त हनुमान जी को बेसन के लड्डू अर्पित कर उन्हें गाय, कुत्ते, बंदरों और जरूरतमंदों में बांटता है, उसके जीवन में सुख और मंगल बढ़ता है. मंगलवार के दिन गुड़ और चने का सेवन भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है.
यदि कोई व्यक्ति मेरे अशुभ प्रभावों से बचना चाहता है, तो उसे मसूर दाल, चना, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करना चाहिए तथा श्रद्धा से मेरी उपासना करनी चाहिए. मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामी मैं ही हूं. मकर राशि में मैं उच्च का और कर्क राशि में नीच का माना जाता हूं. जन्म कुंडली में शुभ स्थिति में होने पर मैं व्यक्ति को प्रशासन, सेना, नेतृत्व और भूमि संबंधी कार्यों में बड़ी सफलता दिलाता हूं, लेकिन अशुभ स्थिति जीवन में संघर्ष और कष्ट बढ़ा सकती है.