24 MAY 2026 (HIMALAYAUK LEADING NEWSPORTAL & PRINT MEDIA & YOUTUBE CHANNEL ) रविवार का दिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार सुख, समृद्धि और बड़े बदलाव लेकर आने वाला है. हिंदू पंचांग के अनुसार, कल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है. नक्षत्रों की बात करें तो कल मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके साथ ग्रहों की विशेष स्थिति से व्याघात योग का निर्माण & गंगा दशहरा 25 मई 2026 भगवान शिव की विशेष आराधना करें, क्योंकि उन्होंने ही गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था. शास्त्रों में कहा गया है, ‘गंगे तव दर्शनात मुक्तिः’ अर्थात, निष्कपट भाव से मां गंगा के सिर्फ दर्शन करने मात्र से ही मनुष्यों को कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. गंगाजल के स्पर्श से स्वर्ग की प्राप्ति होती है और दूर से भी यदि कोई पूरी श्रद्धा के साथ मां गंगा का स्मरण (याद) करता है, तो उसके सभी संताप मिट जाते हैं. जो गति बड़े-बड़े पाठ, यज्ञ, मंत्र और हवन से नहीं मिलती, वह मात्र गंगाजल के सेवन से सुलभ हो जाती है.

भगवान विष्णु का स्वरूप होते हैं ‘दामाद जी’
पुरुषोत्तम मास या अधिकमास जमाई का आदर-सत्कार करने और उन्हें उपहार देने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है.पुरुषोत्तम मास को हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी महीना माना गया है. शास्त्रों के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस साल पुरुषोत्तम की शुरुआत 17 मई हो चुकी है और 15 जून तक रहेगी. धार्मिक मान्यता है कि, पुरुषोत्तम मास के समय दान, पूजा-पाठ, जप और सेवाभाव करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
BY CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & SADHAK BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 03:59 एएम से 04:43 एएम अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:52 एएम से दोपहर 12:47 पीएम राहुकाल (अशुभ)- शाम 05:28 पीएम से शाम 07:11 पीएम यमगंड (अशुभ)- दोपहर 12:19 पीएम से 02:02 पीएम गुलिक काल- दोपहर 03:45 पीएम से 05:28 पीएम अभिजीत मुहूर्त: किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए दोपहर 11:52 से 12:47 का समय सर्वोत्तम है।
मघा नक्षत्र: आज दोपहर 04:15 पीएम तक मघा नक्षत्र रहेगा। यह पितरों का नक्षत्र माना जाता है, इसलिए आज पितरों के निमित्त तर्पण या दान करना बहुत शुभ है।
रविवार का उपाय: आज सूर्य देव को जल अर्पित करें और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जाप
कन्या राशि दुर्गा देवी की पूजा करें और सप्तशती का पाठ करें। & तुला राशि सूर्यदेव को जल और लाल फूल से अर्घ्य दें। & वृश्चिक राशि सरस्वती माता की पूजा करें & धनु राशि अन्न जल का दान करें। & मकर राशि गुड़ रोटी गाय को खिलाना शुभ रहेगा। & कुंभ राशि गाय को मीठी रोटी & मीन राशि सूर्यदेव को कुमकुम मिले जल से अर्घ्य दें, ओम श्री सूर्य देवाय नमः मंत्र
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं. भगवान विष्णु के अंगूठे से निकली गंगा मैया के धरती लोक पर आने के इस पावन पर्व को ‘गंगा दशहरा’ के रूप में मनाया जाता है.
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का समय इस प्रकार है:
- दशमी तिथि प्रारंभ: 25 मई 2026 को सुबह 04:30 बजे से
- दशमी तिथि समाप्त: 26 मई 2026 को सुबह 05:10 बजे तक
- उदया तिथि मान्यता: उदया तिथि के सिद्धांतों के अनुसार, गंगा दशहरा 25 मई को ही मनाया जाएगा.
राजा भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा के उद्धार और शांति के लिए कठिन तपस्या करके मां गंगा को धरती पर लाए थे, इसलिए उन्हें ‘भागीरथी’ भी कहा जाता है.
10 पापों का नाश: मान्यता है कि गंगा मैया मन, वाणी और शरीर द्वारा अनजाने में होने वाले 10 प्रकार के पापों का हरण करती हैं. इस दिन गंगा स्नान करने से कई बड़े यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है.
स्कन्द पुराण में गंगा की महिमा: स्कन्द पुराण के अनुसार, स्वयं भगवान शिव ने श्री विष्णु से कहा है कि मां गंगा शुद्ध, विद्यास्वरूपा, इच्छाज्ञान और क्रियारूप हैं. वे दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का शमन करने वाली तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाली शक्ति स्वरूपा हैं. कलियुग में काम, क्रोध, मद, लोभ और ईर्ष्या जैसे विकारों को नष्ट करने के लिए गंगा के समान कोई दूसरा तीर्थ नहीं है.
दान में ’10 के अंक’ का खास नियम
गंगा दशहरा पर दान का विशेष महत्व है. इस दिन ज्येष्ठ की तपती गर्मी से राहत देने वाली चीजों का दान किया जाता है. ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार, इस दिन आप जो भी चीज दान करें, उसकी संख्या 10 होनी चाहिए.
दान की जाने वाली मुख्य वस्तुएं:
- शर्बत या पानी
- मिट्टी का मटका (घड़ा)
- हाथ का पंखा
- खरबूजा या आम
- चीनी
हिंदू पंचांग की गणना सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर की जाती है. सौर वर्ष में 365 दिन 6 घंटे होते हैं, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है. इस प्रकार हर वर्ष 11 दिनों का अंतर हो जाता है और यह तीन साल में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है. इस अंतर को पाटने के लिए हर तीन वर्ष में पुरुषोत्तम मास या अधिकमास लगता है. अधिकमास पर हिंदू कैलेंडर का अतिरिक्त महीना होता है.

भगवान विष्णु का स्वरूप होते हैं ‘दामाद जी’
भारतीय हिंदू संस्कृति में जमाई राजा को साक्षात विष्णु स्वरूप माना गया है. हिंदू विवाह में कन्यादान के समय मंत्रोचारण और संकल्प इस रिश्ते की दिव्यता बताते हैं कि विष्णु स्वरूपाय वराय: इसका अर्थ है कि पिता अपनी लक्ष्मी रूपी कन्या को भगवान विष्णु के स्वरूप (वर) को सौंप रहे हैं.
दामाद जी को विष्णु स्वरूप मानने के पीछे एक धार्मिक और पौराणिक मान्यता यह भी है कि, जब भगवान विष्णु (राम अवतार में) ने माता सीता से विवाह किया था,तब वे भी राजा जनक के दामाद बने थे.
इसलिए आज भी मिथिलावासी भगवान राम और विष्णु को दामाद रूप में पूजते हैं, वहीं सीता को बेटी के रूप में सम्मानित किया जाता है. यही कारण है कि विवाह के समय या उसके बाद जब कोई दामाद अपने ससुराल आता है, तो उसे विष्णु स्वरूप मानकर उसका स्वागत और सत्कार किया जाता है.
मलमास या पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित उनका प्रिय मास है. इसलिए आज भी कई स्थानों में मलमास के समय दामाद (जमाई) के आदर-सत्कार की परंपरा निभाई जाती है. इसका कारण यह है कि, घर की बेटी को लक्ष्मी और जमाई राजा को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है. इसलिए मलमास में दामाद का आदर-सम्मान करने और शुभ वस्तुएं भेंट करना शुभ होता है.
पुरुषोत्तम मास में दामाद को सम्मानपूर्वक घर बुलाकर आदर-सत्कार करें. उनकी पसंद का भोजन तैयार करें. पीतल के पात्र में नए कपड़े (पीले रंग), ड्राई फ्रूट, फल-मिठाई आदि चीजें भेट करें. साथ ही पुरुषोत्तम मास में दामाद को सोना (Gold) देना भी शुभ माना जाता है. इसके साथ ही 33 पुआ और चांदी का पात्र भी देना उत्तम माना गया है.