14 मई 2026, गुरुवार को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो प्रदोष व्रत के लिए उत्तम है। इस दिन रेवती नक्षत्र रात 10:34 तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा। चंद्र मीन राशि में गोचर करेंगे और दिन का शुभ समय (अभिजीत मुहूर्त) दोपहर 11:51 से 12:45 तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त: 11:51 AM से 12:45 PM। अमृत काल: सुबह 05:13 AM – 06:44 AM (सुबह)। राहुकाल: दोपहर 02:08 PM से 03:51 PM तक। इस समय कोई नया काम शुरू न करें। विशिष्ट योग – सर्वार्थसिद्धि योग सूर्योदय से संपूर्ण दिनरात्रि

by CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT SADHAK BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN 9412932030

14 मई, गुरुवार को चंद्रमा और शुक्र ग्रह राशि बदलेंगे। इस दिन गुरु प्रदोष का व्रत भी किया जाएगा। मेष राशि में 4 ग्रह होने से चतुर्ग्रही संयोग
17 मई से शनि बदलेंगे नक्षत्र, मिथुन-सिंह समेत 3 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें & हर शनिवार को पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीया जलाएं। शनि से जुड़ी चीजों का दान करें और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। आपको भगवान बुद्ध का आशीर्वाद भी चाहिए, इसलिए बुधवार को हरी चीजें दान करें। बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा घास और लड्डू चढ़ाएं इससे चीजें बैलेंस्ड रहती हैं।
‘गुरुवार, 14 मई 2026 का पंचांग धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज सर्वार्थसिद्धि योग, प्रदोष व्रत, मधुसूदन द्वादशी और कई शुभ योग बन रहे हैं। रेवती एवं अश्विनी नक्षत्र के प्रभाव के साथ बुध, गुरु और शुक्र ग्रह भी राशि एवं नक्षत्र परिवर्तन कर रहे हैं।
व्रत / दिवस विशेष – प्रदोष व्रत, मधुसूदन द्वादशी, मुनि अनन्तनाथ जयंती, वट सावित्री व्रत प्रारंभ तीन दिन का, पचक रात्रि 10-34 तक, विवाह मुहूर्त्त्त रेवती नक्षत्र में, गंडमूल संपूर्ण दिनरात्रि,
- विक्रम संवत् – 2083
- संवत्सर नाम – रौद्र
- शक संवत् – 1948
- हिजरी सन् – 1447
- मु. मास – 26 जिल्काद
- अयन – उत्तरायण
- ऋतु – ग्रीष्म ऋतु
- मास – प्रथम ज्येष्ठ (शुद्ध)
- पक्ष – कृष्ण
- ग्रह का राशि /नक्षत्र परिवर्तन – बुध ग्रह का वृष राशि में प्रवेश रात्रि 12-31 पर, गुरु का पुनर्वसु नक्षत्र चरण 3 में प्रवेश प्रातः 6-36 पर, शुक्र ग्रह का मिथुन राशि में प्रवेश दिन 10-53 पर,
17 मई से न्याय के देवता माने जाने वाले शनि देव रेवती नक्षत्र में चले जाएंगे। रेवती नक्षत्र को कंट्रोल करने वाला ग्रह बुध, 9 अक्टूबर तक इसी नक्षत्र में रहेगा। एस्ट्रोलॉजर डॉ शरद शर्मा के अनुसार, ये बदलाव उन लोगों के लिए बिल्कुल भी लकी नहीं हैं जिनकी राशि पहले से ही ढैया से गुजर रही है। यह शनि के ट्रांज़िट का एक मुश्किल दौर है। खासकर मिथुन राशि वालों को सावधान रहने की जरूरत है। यह नक्षत्र परिवर्तन उनके लिए भी अच्छा नहीं लग रहा है। इसलिए मिथुन, सिंह और धनु राशि वालों के लिए, ज्योतिषी चेतावनी देते हैं। अक्टूबर 2026 तक सावधानी से चलें।
14 मई को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और गुरुवार का दिन है। द्वादशी तिथि गुरुवार दोपहर पहले 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। इसके अलावा 14 मई को प्रदोष व्रत किया जायेगा। गुरुवार को शाम 5 बजकर 53 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। साथ ही 14 मई को रात 10 बजकर 34 मिनट तक रेवती नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा गुरुवार को रात 12 बजकर 30 मिनट पर बुध वृष राशि में गोचर कर रहे है।
14 मई 2026 का पंचांग
- ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि- 14 मई 2026 को दोपहर पहले 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जाएगी।
- प्रीति योग- 14 मई 2026 को शाम 5 बजकर 53 मिनट तक
- रेवती नक्षत्र- 14 मई 2026 को रात 10 बजकर 34 मिनट तक
- बुध गोचर- 14 मई 2026 को रात 12 बजकर 30 मिनट पर बुध वृष राशि में गोचर करेंगे
- 14 मई 2026 व्रत-त्यौहार- अपरा एकादशी व्रत पारण, प्रदोष व्रत (गुरु प्रदोष)
- प्रदोष पूजा मुहूर्त – 07:05 पी एम से 09:17 पी एम
- अपरा एकादशी पारण का समय- 14 मई 2026 को सुबह 06:04 ए एम से 08:41 ए एम तक
14 मई 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 ए एम से 05:20 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:09 पी एम से 01:01 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:37 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:04 पी एम से 07:26 पी एम
- अमृत काल- 08:20 पी एम से 09:49 पी एम
अशुभ मुहूर्त 14 मई 2026
- राहुकाल- 02:13 पी एम से 03:50 पी एम
- यमगण्ड- 06:04 ए एम से 07:42 ए एम
- गुलिक काल- 09:20 ए एम से 10:57 ए एम
- विडाल योग- 10:34 पी एम से 06:04 ए एम, मई 15
- वर्ज्य- 11:25 ए एम से 12:54 पी एम
- दुर्मुहूर्त- 10:25 ए एम से 11:17 ए एम
- पंचक- 06:04 ए एम से 10:34 पी एम
गुरुवार को चंद्रमा मीन से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेगा, जहां पहले से सूर्य, मंगल और बुध की युति है। इस तरह मेष राशि चतुर्ग्रही संयोग बनेगा। साथ ही शुक्र भी इस दिन वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। अन्य ग्रहों की बात करें तो इस दिन मंगल, सूर्य और बुध मेष राशि में, राहु कुंभ राशि में, केतु सिंह राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र वृषभ राशि में और शनि मीन राशि में रहेंगे। यानी ग्रहों की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दही या जीरा मुंह में डाल कर निकलें। 14 मई, गुरुवार को राहुकाल दोपहर 02 बजकर 01 मिनिट से शुरू होगा जो 03 बजकर 39 मिनिट तक रहेगा। राहुकाल में कोई भी शुभ काम और यात्रा नहीं करना चाहिए।
प्रदोष व्रत (गुरु प्रदोष): शाम को त्रयोदशी तिथि लगने के कारण आज प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। गुरुवार को प्रदोष होने से यह “गुरु प्रदोष” कहलाता है, जो शत्रुओं के नाश और सफलता के लिए उत्तम है। भगवान विष्णु को पीले फल अर्पित करें और शाम के समय शिव मंदिर में दीप दान करें।