TOP NATIONAL NEWS 28 MAY 2018

केरल में एक तरफ निपाह वायरस का खतरा टलने का नाम नहीं ले रहा. वहीं, भारत के लिए भी यह सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है. निपाह वायरस से जहां अब तक 14 मौत हो चुकी हैं. वहीं, केरल से फलों और सब्जियों को भी बैन कर दिया गया है. निपाह वायरस के चलते ही इन फलों को बैन किया गया है. इससे भारत के एक्सपोर्ट पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है. WHO का दावा है कि यह वायरस चमगादड़ की लार, यूरीन और मलमूत्र से फैलता है. खासकर उन फलों के जरिए जो चमगादड़ अक्सर पेड़ पर चखते हैं. विशेष रूप से यह ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट हैं, जो दक्षिण एशिया में प्रचुर मात्रा में हैं, जिसमें निपाह वायरस होता है. चेतावनी जारी होने के बाद दूसरे देश भी निपाह वायरस को लेकर अलर्ट हो गए हैं.

किन फलों को किया गया बैन
केरल के स्थानीय अखबारों के मुताबिक, निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए यूनाइटेड अरब एमिरेट्स (यूएई) और बेहरीन ने केरल से एक्सपोर्ट होने वाले फलों और सब्जियों को बैन कर दिया है. दोनों देशों ने केंद्र सरकार को इस बाबत सूचना दी है. निपाह वायरस का खतरा बताते हुए जिन फलों को बैन किया गया उनमें केला, आम, अंगूर हैं. इसके अलावा खजूर के एक्सपोर्ट पर भी रोक है. इसके अलावा सब्जियां भी बैन की गई हैं. निपाह वायरस की वजह से एक्सपोर्ट पर होने वाले नुकसान पर वाणिज्य मंत्रालय नजर रख रहा है. वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरते तो एजेंसियों को इससे निपटने के लिए कहना होगा.
एग्रीकल्चर और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के मुताबिक, पिछले साल भारत से कुल 4448.08 करोड़ के फल एक्सपोर्ट किए गए थे. इसमें ज्यादातर आम, अंगूर, केला और अनार शामिल हैं. भारत सबसे बड़ा केले का उत्पादक देश है, यहां 26.04% केला पैदा होता है. वहीं, 44.51% पपीता और 40.75% आम पैदा होता है. कॉर्मस मिनिस्ट्री रीता तेवतिया के मुताबिक, पिछले साल भारत से आम का एक्सपोर्ट 52761 टन पहुंच था. APEDA के मुताबिक, भारत से जिन देश में सबसे ज्यादा फल और सब्जियां एक्सपोर्ट होती हैं उनमें UAE, बांग्लादेश, मलेशिया, नीदरलैंड, श्रीलंका, नेपाल, UK, सऊदी अरब, पाकिस्तान और कतर हैं.
केरल में निपाह वायरस के चलते हुई मौत कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी दो बार पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का अटैक हो चुका है. 2001 में सिलीगुड़ी में निपाह वायरस का खतरा मंडराया था. वहीं, 2007 में नादिया में निपाह वायरस का अटैक हुआ था. इस बार यह देश के दक्षिण राज्य में पहुंचा है. जहां कोझीकोड़ में एक ही परिवार के लोगों में यह पाया गया.

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गुरूग्राम: केंद्रीय राज्यमंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत की हरियाणा सरकार से नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई. राव इंद्रजीत ने केंद्र सरकार के चार साल पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर गंभीर आरोप लगा दिए. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं है कि हरियाणा सरकार सांसदों की लोकसभा चुनावों में मदद भी करेगी.
इंद्रजीत राय ने भरी सभा में अपनी नाराजगी जताई. इसे सुनकर सीएम मनोहर लाल खट्टर हैरान रह गए. इसे घर की बात बताते हुए मनोहर लाल खट्टर ने बात को मन में ना रखने की तारीफ की. वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला ने भी इसे हवा ना देने की बात कही. हालांकि कार्यक्रम के बाद भी राव इंद्रजीत ने फिर से मनोहर लाल खट्टर से नाराजगी नजर जताई. राव इंद्रजीत सीएम मनोहर लाल खट्टर के वक्त पर कार्यक्रम में ना पहुंचने पर नाराज थे. वहीं बताया जा रहा है कि राव इंद्रजीत मनोहर लाल खट्टर से इसलिए नाराज हैं क्योंकि गुरुग्राम में हो रहे विकास के कामों का श्रेय उन्हें नहीं दिया जा रहा है.
बीजेपी सांसद राव इंद्रजीत सिंह गुरुग्राम लोकसभा से चार बार सांसद रह चुके हैं और दक्षिण हरियाणा के कद्दावर नेता हैं. 2014 चुनाव से पहले राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस को केवल इसीलिए छोड़ दिया था क्योंकि उनका कहना था कि उन्हें वहां सम्मान नहीं मिलता था. अब फिर से सम्मान ना मिलने की बात राव इंद्रजीत ने खुले तौर पर कही है.

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नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद् (विहिप) के पूर्व नेता प्रवीण तोगड़िया ने आज कहा कि वह 24 जून को एक नई पार्टी लेकर आएंगे. तोगड़िया ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार अपने वादों से मुकरने वाली सरकार है और लोगों की आकांक्षाएं पूरी नहीं कर पाई है.

उन्होंने मोदी सरकार के प्रदर्शन को ‘ माइनस 25 परसेंट’ बताया. उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति को “ खराब ’’ बताया.
तोगड़िया ने कहा कि “ बड़े सपने बेचना काफी नहीं है. ” साथ ही कहा कि राष्ट्र निर्माण , “ कार्यों की सच्चाई पर निर्भर होती है जो जमीनी स्तर पर नजर आनी चाहिए. ”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा से जुड़े कई लोग मोदी सरकार से “ नाराज ” और “ चकित ” हैं क्योंकि वह ‘‘ वैचारिक , समाजिक – राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर कुछ करती हुई नहीं दिख रही और कुछ मामलों में बात से पलटते हुए भी नजर आई है. ”
तोगड़िया ने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े बड़ी संख्या में लोग चकित और परेशान हैं कि मोदी सरकार सैद्धांतिक, सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर कुछ करती नहीं दिखाई दी और कई मौकों पर यू-टर्न ले गई.
उन्होंने सरकार से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून पारित कराने, गोवध पर प्रतिबंध लगाने और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 को हटाने के साथ देश में यूनिफार्म सिविल कोड लागू कराने की मांग की.
तोगड़िया ने 14 अप्रैल को तब विहिप का साथ छोड़ दिया था, जब संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए गुड़गांव में हुए चुनाव में उनके समर्थित उम्मीदवार राघव रेड्डी को हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल वीएस कोकजे ने हरा दिया था.

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नई दिल्ली: मोदी सरकार के आश्वासनों के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमत की मार आम लोगों पर जारी है. तेल की कीमत दिन व दिन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है. आज लगातार पंद्रहवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई. देश के कई हिस्सों में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 80 रुपये से 86 रुपये तक पहुंच गई है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 15 पैसे बढ़कर 78 रुपये 27 प्रति लीटर हो गई है. वहीं कोलकाता में 80 रुपये 91 पैसे, मुंबई में 86 रुपये 8 पैसे और चेन्नई में 81 रुपये 26 पैसे प्रति लीटर की दर से पेट्रोल लोगों को खरीदना पड़ रहा है.

डीजल की कीमतों में आज 11 पैसे की बढ़ोतरी हुई. इसी के साथ मुंबई में एक लीटर डीजल की कीमत 73 रुपये 64 पैसे हो गई है. तेल की कीमतों में तेजी ऐसे समय हो रही है जब पिछले हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में थोड़ी नरमी दर्ज की गई थी. एक्सपर्ट का मानना था कि इसके बाद आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में थोड़ी कमी आएगी. हालांकि दाम लगातार बढ़ रहे हैं.
कीमत बढ़ने की वजह केंद्र सरकार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई तेजी और डॉलर के मुकाबले पैसे की कमजोरी बता रही है. पेट्रोलियम मंत्री का कहना है कि हम दाम में कमी के उपायों पर लगातार विचार कर रहे हैं और ठोस उपाय लेकर आएंगे. वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार जनता को लूट रही है. उनकी मांग है कि सरकार एक्साइज ड्यूटी कम करे. विपक्षी दल देश भर में बढ़ती कीमतों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं

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बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए दो साल हो गए हैं. मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का दावा है कि इस कानून से सबसे ज्‍यादा लाभान्वित एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग हुआ है लेकिन आंकड़े कुछ और ही गवाही देते हैं. जेल अधिकारियों के मुताबिक इन समुदायों के लोगों पर इस कानून की मार सबसे ज्‍यादा पड़ी है. बिहार के एक्‍साइज व प्रोहीबिशन एक्‍ट की धारा 29 से 41 के तहत शराब रखना, पीना, बेचना और बनाना गैर जमानती अपराध है. कानून में यह भी कहा गया है कि अगर कोई वयस्‍क घर में शराब पीता पाया जाता है तो घर के अन्‍य वयस्‍क भी नपेंगे. इस मामले में बगैर अदालती आदेश सीधे गिरफ्तारी होती है.
शराबबंदी कानून तोड़ने के मामले में जेलों में बंद कैदियों में दलित समुदाय और ओबीसी कैदी की संख्‍या सबसे अधिक है. यह आंकड़ा अप्रैल 2016 के बाद बिहार की 8 केंद्रीय, 32 जिला और 17 छोटी जेलों से जुटाया गया है. मसलन जेलों में करीब 27.1 फीसदी एससी कैदी हैं जबकि राज्‍य में उनकी आबादी मात्र 16 फीसदी है. वहीं जेलों में बंद एसटी कैदी की संख्‍या 6.8 फीसदी है जबकि राज्‍य में उनकी आबादी मात्र 1.3 फीसदी है. ओबीसी के मामले में यह आंकड़ा 34.4 फीसदी है जबकि राज्‍य में उनकी आबादी 25 फीसदी है. इंडियन एक्‍सप्रेस ने जेल अधिकारियों के हवाले से कहा कि शराबबंदी को लेकर जेल में बंद कैदियों में 80 फीसदी नियमित तौर पर शराब पीने वाले हैं, जिन्‍हें बीते दो साल में पकड़ा गया. पूर्व कैदी और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने शराब माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की. रिपोर्ट में पटना, गया और मोतिहारी जेल सर्किल की तीन केंद्रीय, 10 जिला और 9 छोटी जेलों में बंद कैदियों की प्रोफाइल का जिक्र है. इनमें बीते दो साल में 1,22,392 लोगों (67.1 फीसदी) को बीते दो साल में शराबबंदी कानून तोड़ने पर पकड़ा गया है.
राज्‍य के जेल प्रशासन ने दो माह पहले शराबबंदी कानून में बंद सामान्‍य, ओबीसी, ईबीसी, एससी और एसटी कैदियों की स्थिति पर वर्गवार रिपोर्ट मांगी थी. एक अधिकारी ने बताया कि यह सर्वे कैदियों के शराब पीने की आदत और सामाजिक आर्थिक दर्जे को ध्‍यान में रखकर तैयार की गई है. चूंकि जेल एडमिशन रजिस्‍टर में हरेक कैदी की जाति/धर्म का उल्‍लेख होता है, इसलिए यह सर्वे कराना मुश्किल भी नहीं था. बिहार के डीजीपी केएस द्विवेदी ने हालांकि इस रिपोर्ट से इनकार किया. उन्‍होंने कहा कि जेल विभाग ने खुद ही ऐसा सर्वे कराया होगा. शराबबंदी कानून तोड़ने के मामले में सवर्ण की संख्‍या कम इसलिए है क्‍योंकि पुलिस को झुग्‍गी-बस्तियों में जाकर छापेमारी करना ज्‍यादा आसान लगता है.

 

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