27 अक्टूबर मंगलवार के दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 07:01 बजे तक रहेगी, जिसके बाद द्वitiya (द्वितीया) तिथि आरंभ & हेमंत ऋतु व्रत / त्यौहार: अशून्य शयन व्रत & सूर्योदय: सुबह 06:29 बजे सूर्यास्त: शाम 05:40 बजे & अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:47 बजे से सुबह 05:38 बजे तक राहुकाल: दोपहर 02:52 बजे से शाम 04:16 बजे तक
29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ : by Chandra Shekhar Joshi Chief EDitor & Founder President Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030
27 अक्टूबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और मंगलवार का दिन है। द्वितीया तिथि मंगलवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के भोर 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। 27 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा, उसके बाद व्यतिपात योग लग जायेगा। साथ ही मंगलवार को दोपहर बाद 3 बजकर 40 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा 27 अक्टूबर को अशून्य शयन व्रत है।
चातुर्मास के दौरान पड़ने वाले प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को अशून्य शयन व्रत किया जाता है। कार्तिक चातुर्मास के दौरान पड़ने वाला आखिरी महीना है। आपको बता दें कि व्रत पुरुषों द्वारा किया जाता है। इस व्रत को करने से जीवन भर पति-पत्नी का साथ बना रहता है और रिश्तों में मजबूती आती है। दरअसल अशून्य शयन द्वितीया का अर्थ ही होता है कि अकेले न सोना पड़े यानि लंबे समय तक दोनों का साथ बना रहे। अतः आज के दिन पति इस व्रत को करके अपने जीवनसाथी का साथ सुनिश्चित कर सकता है।
अशून्य शयन द्वितीया व्रत में मां लक्ष्मी और श्री विष्णु की पूजा का विधान है। अशून्य शयन के दिन पूरा दिन व्रत करके शाम को चंद्रोदय होने पर, चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है । 27 अक्टूबर को चंद्रोदय शाम 6 बजकर 19 मिनट पर होगा।
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:47 ए एम से 05:38 ए एम
- प्रातः संध्या- 05:13 ए एम से 06:29 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
- विजय मुहूर्त- 01:57 पी एम से 02:41 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 05:40 पी एम से 06:06 पी एम
- सायाह्न संध्या- 05:40 पी एम से 06:57 पी एम
- अमृत काल- 11:15 ए एम से 12:43 पी एम
- निशिता मुहूर्त- 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 28
- त्रिपुष्कर योग- 03:39 पी एम से 04:06 ए एम, अक्टूबर 28
- सर्वार्थ सिद्धि योग- 03:39 पी एम से 06:30 ए एम, अक्टूबर 28
इस माह में स्नान-दान करने से व्यक्ति को पुण्य लाभ मिलते हैं। कार्तिक का पूरा माह जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसे में इस माह में नियमित रूप से नारायण की पूजा करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 26 अक्टूबर 2026 से कार्तिक का पावन महीना शुरू हो चुका है जिसका समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा। इस दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है।
करें ये काम ;
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान- कार्तिक माह में सूर्योदय से पहले गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करें। अगर कहीं बाहर जाना संभव नहीं है तो घर पर ही नहाने वाले पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसे कार्तिक स्नान कहा जाता है।
- तुलसी पूजा- कार्तिक महीने में तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। इस माह में रोजाना सुबह तुलसी में जल अर्पित करने और शाम में घी का दीया जलाने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है।
- दान-पुण्य- कार्तिक माह में दान-पुण्य करने से धन-धान्य में बरकत होती है। इस महीने में किसी गरीब या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, धन का दान करें।
- दीपदान- कार्तिक मास में दीपदान करने से कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस पूरे महीने शाम के समय पीपल, तुलसी, गंगा तट या घर के मुख्य द्वार और मंदिर में दीया जलाएं।
इस इस माह में उड़द, मसूर, चना, मटर और राई का सेवन न करें। भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। वहीं शाम के समय मां लक्ष्मी की पूजा करें।
कार्तिक माह में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
करवा चौथ का व्रत सुहागिनों का प्रमुख त्यौहार माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। करवा चौथ व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद चांद को देखने के बाद ही किया जाता है। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस साल यह पावन दिन 29 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है। इसी दिन सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी। करवा चौथ के दिन करवा माता, भगवान शिव, मां पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 29 अक्टूबर को मध्यरात्रि 1 बजे से होगा। चतुर्थी तिथि का समापन 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा। करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। वहीं करवा चौथ व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
करवा चौथ 2026 के दिन चांद निकलने का समय
करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। बिना चांद की पूजा और दर्शन के यह व्रत पूरा नहीं माना जाता है। करवा चौथ के दिन चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 17 मिनट रहेगा। हालांकि शहर के अनुसार चंद्रोदय का समय अलग-अलग हो सकता है।
करवा चौथ 2026 के दिन भद्रा कितने बजे तक रहेगा?
भद्रा काल 28 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 31 मिनट से आरंभ होगा और समाप्त 29 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। ऐसे में करवा चौथ के दिन पूजा के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं होगा। वहीं व्रती महिलाएं भद्रा समाप्त होने के बाद सरगी भी कर सकती हैं।
करवा चौथ पूजा सामग्री लिस्ट
करवा और ढक्कन (मिट्टी या तांबा), छलनी, कांस की तीलियां, पानी का लोटा, मिठाई, दीपक, मिट्टी की पांच डेलियां, सिंदूर, अक्षत, रोली, मौल, कुमकुम, देसी घी,चावल, फूल, फल, चंदन, सुहाग का सामान (16 श्रृंगार का सामान), पका हुआ भोजन, हलवा, आठ पूरियों की अठावरी, कच्चा दूध, नारियल, पान, व्रत कथा की किताब, करवा माता की तस्वीर, ड्राई फ्रूट्स, कपूर, रूई की बाती, अगरबत्ती-धूप, हल्दी, दही, इत्यादि।