हे पितरेश्वर नमन आपको, दे दो आशीर्वाद; श्राद्ध में पितृ चालीसा & दुर्वाऔर मोदक का भोग & नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए उपाय & लौंग के टोटके और उपाय & सूर्य को जल देने के बाद लौंग को घिसकर माथे पर तिलक 

7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, बुधवार और मघा नक्षत्र का संयोग है, साथ ही इस दिन इंदिरा एकादशी का पारण और पितृ पक्ष की द्वादशी का श्राद्ध भी है। इस दिन के विशेष ज्योतिषीय उपाय & भगवान गणेश को दुर्वा (घास) और मोदक का भोग लगाएं। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम एक माला जाप करें। किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल या हरे रंग के वस्त्र का दान करें। FOR DETAILS ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI CHIEF EDITOR & PRESIDENT BAGLA MUKHI PEETH DEHRADUN Mob. 9412932030

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए 5 लौंग और 1 हरी मिर्च का वंदना/टोटका या उपाय किया जाता है। एक हरी मिर्च लें और उसमें बीच से हल्का सा चीरा लगाएं या सुई/डंडी की मदद से जगह बनाएं। अब उस 5 लौंग को एक-एक करके हरी मिर्च के अंदर या उसके शरीर में गाड़ (चुभा) दें। यह उपाय आमतौर पर किसी भी दिन, विशेषकर शनिवार या गुरुवार के दिन

लौंग के टोटके और उपाय  विभिन्न समस्याओं जैसे आर्थिक तंगी, नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष को दूर करने के लिए &  प्रत्येक सोमवार को 11 फूल वाली लौंग लेकर शिवलिंग पर & शुक्रवार के दिन 5 लौंग और 5 कौड़ियां लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें & शुक्रवार के दिन 2 तेज पत्ते पर 5 लौंग रखकर जलाएं।

रोजाना सुबह सूर्य को जल देने के बाद लौंग को घिसकर माथे पर तिलक

तिथि: द्वादशी तिथि रात्रि 11:16 तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। नक्षत्र: मघा नक्षत्र रात्रि 09:40 तक, इसके बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। पक्ष व ऋतु: कृष्ण पक्ष, शरद ऋतु सूर्योदय: सुबह 06:17 बजे सूर्यास्त: शाम 05:53 बजे राहुकाल: दोपहर 12:05 से दोपहर 01:32 तक द्वादशी श्राद्ध / मघा श्राद्ध: इस दिन द्वादशी तिथि का श्राद्ध तथा संन्यासी पूर्वजों का महालय श्राद्ध किया जाएगा &

 10 अक्टूबर के दिन सर्व पितृ अमावस्या  : ॐ पितृभ्यः नमः। ॐ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हं हं सुख शान्तिं देहि फट् स्वाहा। ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।  हे पितरेश्वर नमन आपको, दे दो आशीर्वाद; श्राद्ध में पितृ चालीसा

आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है और आज के दिन चंद्रमा केतु के नक्षत्र मघा में रहेंगे। इसके साथ ही बुधवार 7 अक्टूबर के दिन द्वादशी तिथि पर दिवंगत हुए लोगों का श्राद्ध किया जाएगा और साथ ही घर के संन्यासी पूर्वजों का श्राद्ध भी इसी दिन होगा। आज के दिन शुभ नामक योग भी रहेगा।  आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि- 7 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी शुभ योग- 7 अक्टूबर 2026 को देर रात 2 बजकर 52 मिनट तक मघा नक्षत्र- 7 अक्टूबर को रात 9 बजकर 41 मिनट तक 7 अक्टूबर 2026 विशेष- द्वादशी तिथि श्राद्ध

द्वादशी तिथि के श्राद्ध को मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से दिवंगत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन उन पितरों का श्राद्ध भी किया जाता है जिन्होंने अपने जीवनकाल में संन्यास ले लिया था। इस दिन अगर आप पितृ मंत्रों का जप करते हैं या पितृ स्तोत्र का पाठ करते हैं तो आपके पितरों की आत्मा को शांति भी प्राप्त हो सकती है। इस दिन किए गए श्राद्ध से घर में सुख-शांति और संपन्नता आती है। 

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:53 ए एम से 05:42 ए एम तक
  • प्रातः सन्ध्या- 05:18 ए एम से 06:30 ए एम तक
  • विजय मुहूर्त- 02:25 पी एम से 03:12 पी एम तक
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:22 पी एम से 06:46 पी एम तक
  • कुतुप मुहूर्त – 11:45 ए एम से 12:31 पी एम तक

पितृपक्ष के साथ ही हर माह की अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों पर भी 

तर्पण करें 

सर्व पितृ अमावस्या के दिन आपको पितरों के निमित्त तर्पण करना चाहिए। तर्पण आपको दक्षिण दिशा की ओर मुंह रखकर करना चाहिए। तर्पण के लिए जल में काले तिल, कच्चा दूध, कुश, अक्षत अवश्य मिलाएं। तर्पण अंगूठे और तर्जनी उंगली के मध्य से करें, इस स्थान को पितृ तीर्थ माना जाता है। 

पीपल के तले दीपक जलाएं 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष में पितरों का वास होता है इसलिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन आपको पीपल की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही पीपल तले आपको सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। 

अन्न का दान 

सर्व पितृ अमावस्या के दिन आपको पितरों को स्मरण करते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न का दान करना चाहिए। इसके साथ ही गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी आदि को अन्न देने से भी आपको पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

घर की दक्षिण दिशा में जलाएं चौमुखी दीपक 

दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है इसलिए सर्वपितृ अमावस्या के दिन आपको अपने घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक अवश्य जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय पितरों से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना आपको करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। 

श्री पितृ चालीसा

॥ दोहा।।

हे पितरेश्वर नमन आपको, दे दो आशीर्वाद, चरणाशीश नवा दियो, रख दो सिर पर हाथ।

सबसे पहले गणपत पाछे घर कर देन मनावा जी, हे पितरेश्वर दया राखियो करियो मन की चाया जी।।

।। चौपाई।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर। चरण रज की मुक्ति सागर ।।

परम उपकार पितरेश्वर कीन्हा। मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।।
मातृ-पितृ देव मनजो भावे। सोई अमित जीवन फल पावे ।।
जे जे जे पितर जी साईं। पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहि ।।

चारों ओर प्रताप तुम्हारा। संकट में तेरा ही सहारा ।।
नारायण आधार सृष्टि का। पितरजी अंश उसी दृष्टि का ।।
प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते। भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।।
झुंझुनू ने दरबार है साजे। सब देवो संग आप विराजे ।।

प्रसन्न होय मन वांछित फल दीन्हा। कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।।
पित्तर महिमा सबसे न्यारी। जिसका गुण गावे नर नारी ।।
तीन मंड में आप बिराजे। बसु रुद्र आदित्य में साजे ।।
नाथ सकल संपदा तुम्हारी। में सेवक समेत सुत नारी ।।

छप्पन भोग नहीं है भाते। शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।।
तुम्हारे भजन परम हितकारी। छोटे बड़े सभी अधिकारी ।।
भानु उदय संग आप पुजावै। पांच अंजुलि जल रिझाने ।।
ध्वज पताका मंड पे है साजे। अखंड ज्योति में आप विराजे ।।

सदियों पुरानी ज्योत्ति तुम्हारी। धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।।
शहीद हमारे यहाँ पुजाते। मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।।
जगत पित्तरो सिद्धांत हमारा। धर्म जाति का नहीं है नारा ।।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई। सब पूजे पितर भाई।।

हिंदू वंश वृक्ष है हमारा। जान से ज्यादा हमको प्यारा ।।
गंगा ये मरूप्रदेश की। पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।।
बंधु छोड़कर इनके चरणां। इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।।
चौदस को जागरण करवाते। अमावस को हम धोक लगाते ।।

जात जडूला सभी मनाते। नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।।
धन्य जन्मभूमि का वो फूल है। जिसे पितृ मंडल की मिली धूल है।।
श्री पितर जी भक्त हितकारी। सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।।
निशदिन ध्यान धरे जो कोई। ता सम भक्त और नहीं कोई ।।

तुम अनाथ के नाथ सहाई। दीनन के हो तुम सदा सहाई ।।
चारिक वेद प्रभु के साक्षी। तुम भक्तन की लज्जा राखी ।।
नामा तुम्हारो लेत जो कोई। ता सम धन्य और नहीं कोई ।।
जो तुम्हारे नित पांच पलोटत। नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।।

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी। जो तुम ये जावे बलिहारी ।।
जो तुम्हारे चरणा चित्त लाने। ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।।
सत्य भजन तुम्हारो जो गावे। सो निश्चय चारों फल पावे ।।
तुमहि देव कुलदेव हमारे। तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।।

सत्य आस मन में जो होई। मनवांछित फल पावें कोई ।।॥
तुम्हारी महिमा बुद्धि बढ़ाई। शेष सहस्त्रमुख सके न गाई।।
में अतिदीन मतीन दुखारी। करहु कौन विधि विनय तुम्हारी ।।
अब पितर जी दया दीन पर कीजे। अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ।।

।।दोहा।।

पित्तरों के स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम। 
श्रद्धा सुमन चढ़े वहां, पूरण हो सब काम।।
झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान।
दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान।।
जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम,
पित्तर चरण की धूल ले, जीवन सफल महान।।

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