20 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि & हस्त नक्षत्र और शिव योग का शुभ संयोग & सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत उत्तम & अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:58 AM से 12:53 PM तक। & हस्त नक्षत्र में भगवान शंकर की भी पूजा & शाम के समय दीपक जलाकर शिव आरती & मुख्य रूप से मां कात्यायनी (छठे नवरात्र) और मां कालरात्रि (सातवें नवरात्र) की गुप्त पूजा & 20 जुलाई 2026 (सोमवार) को शिवलिंग पर कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद चंदन, और बेलपत्र अर्पित करना सबसे उत्तम माना गया है। मनोकामना पूर्ति के लिए शिवलिंग पर पीले कनेर का फूल या धतूरा चढ़ाएं और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें。 by Chandra Shekhar Joshi Chief Editor & President Bagla Mukhi Peeth Dehradun Mob. 9412932030

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से प्रारम्भ होकर 23 जुलाई 2026, गुरुवार को समाप्त होगी छठा माँ कालरात्रि पूजा & यह नौ दिवसीय पावन पर्व माँ दुर्गा और उनके विभिन्न दिव्य स्वरूपों की आराधना को समर्पित & “क्लीं” का उच्चारण : सिंहासन प्राप्त किया
20 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और सोमवार का दिन है। सप्तमी तिथि सोमवार को पूरा दिन पार करके भोर 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। 20 जुलाई को शाम 6 बजकर 38 मिनट तक शिव योग रहेगा। शिव योग में किय गये सभी कार्यों में, विशेषकर कि मंत्र प्रयोग में सफलता मिलती है। साथ ही सोमवार को शाम 7 बजकर 10 मिनट तक हस्त नक्षत्र रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त- 04:44 ए एम से 05:28 ए एम अभिजित मुहूर्त- 12:19 पी एम से 01:11 पी एम विजय मुहूर्त – 02:56 पी एम से 03:49 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 07:17 पी एम से 07:39 पी एम & सूर्योदय- सुबह 5: 34 बजे सूर्यास्त- शाम 7: 18 बजे
मंदिरों की बात थोड़ी अलग होती है। हर मंदिर की अपनी परंपरा, मर्यादा और व्यवस्था होती है। कुछ मंदिरों में सभी भक्त शिवलिंग को स्पर्श कर सकते हैं। कुछ मंदिरों में केवल जल चढ़ाने की अनुमति होती है, स्पर्श की नहीं। किसी मंदिर में शिवलिंग को छूना सही है या नहीं, यह उस मंदिर की स्थानीय परंपरा और नियम पर निर्भर करता है। कुछ मंदिरों में केवल आचार्य या पुजारी ही अभिषेक करते हैं। ऐसी स्थिति में भक्तों को मंदिर की व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। शिव भक्ति में भाव और मर्यादा दोनों का महत्व है। यदि किसी स्थान पर स्पर्श की अनुमति नहीं है, तो बिना स्पर्श के भी भगवान शिव की पूजा पूरी श्रद्धा से की जा सकती है। मंदिर में स्पर्श की अनुमति नहीं है, तो वहां बिना स्पर्श के भी पूजा उतनी ही फलदायी मानी जा सकती है। महिलाएं भगवान शिव की पूजा कर सकती हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित कर सकती हैं।

20 जुलाई 2026 का दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि में आने के कारण धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन हस्त नक्षत्र का प्रभाव होने से यह समय कार्यों में कुशलता, योजना और सफलता प्राप्त करने के लिए अनुकूल माना जाता है। सोमवार का दिन होने के कारण भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व रहता है, जिससे मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।
20 जुलाई 2026 का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। शुक्ल पक्ष सप्तमी, हस्त नक्षत्र और सोमवार का संयोग इस दिन को विशेष ऊर्जा प्रदान करता है। श्रद्धा, भक्ति और संयम के साथ किए गए पूजा-पाठ, ध्यान और दान-पुण्य से जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि :आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से प्रारम्भ होकर 23 जुलाई 2026, गुरुवार को समाप्त होगी छठा माँ कालरात्रि पूजा & यह नौ दिवसीय पावन पर्व माँ दुर्गा और उनके विभिन्न दिव्य स्वरूपों की आराधना को समर्पित & “क्लीं” का उच्चारण : सिंहासन प्राप्त किया

प्राचीन समय में कोसल राज्य के एक युवा राजकुमार सुदर्शन थे। राजपरिवार के विरुद्ध रचे गए षड्यंत्र के कारण उन्हें और उनकी माता को अपने प्राणों की रक्षा के लिए वन में आश्रय लेना पड़ा। वन में रहते हुए सुदर्शन ने एक ध्वनि सुनी। बालसुलभ स्वभाव के कारण वे उस ध्वनि की नकल करते हुए बार-बार “क्लीं” का उच्चारण करने लगे। उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि यह माँ दुर्गा का पवित्र बीज मंत्र है। संयोगवश उस समय गुप्त नवरात्रि चल रही थी। सुदर्शन की निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर माँ दुर्गा ने उन्हें आशीर्वाद दिया। समय आने पर सुदर्शन अपने राज्य लौटे, अपना खोया हुआ सिंहासन पुनः प्राप्त किया और सम्मान तथा समृद्धि से परिपूर्ण जीवन व्यतीत किया।
इस पावन अवसर पर अनेक श्रद्धालु भोजन, वस्त्र तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी करते हैं।
भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं, तो ,,,अपनी क्षमता के अनुसार दान अवश्य करें. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई शिव आराधना का शुभ फल अवश्य मिलता है.
भगवान शिव की पूजा बिना बेलपत्र के अधूरी मानी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला साफ और ताजा बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं.
शिवलिंग पर कच्चे दूध से अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे मन की अशांति दूर होती है, परिवार में खुशहाली आती है और धन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है.

शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.
शिवलिंग पर सफेद चंदन अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं भी दूर होने लगती हैं. भगवान शिव को धतूरा और आक के फूल अत्यंत प्रिय माने जाते हैं.
by ; CHANDRA SHEKHAR JOSHI ;
Award : Sanatan Dharma Journalist of The Year 2026 अवॉर्ड: सनातन धर्म जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर , नई दिल्ली में सम्मानित
Awardy : Aadi Guru shankaracharya Sanatani Sewa Puruskar आदि गुरु शंकराचार्य सनातनी सेवा पुरस्कार, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक जी द्वारा सम्मानित &
Founder President & Sadhak संस्थापक साधक अध्यक्ष :
Mahamai Peetambra shree Bagla Mukhi Shakti Peeth Dehradun Uttrakhand
महामाई पीतांबरा श्री बगलामुखी शक्ति पीठ देहरादून
&
#President Uttrakhand: Rastriya shashkat Hindu Maha Sangh ( राष्ट्रीय सशक्त हिन्दू महासंघ, )
# President Uttrakhand: अध्यक्ष उत्तराखंड
Rashtriya Saint Suraksha Parishad (HQ Gujrat) राष्ट्रीय संत सुरक्षा महापरिषद
मुख्यालय:
Nanda Devi Enclave Banjara Wala Dehradun Uttarakhand Cont. us: Mob 9412932030 Mail himalayauk@gmail.com